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अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, ताजेवाला में चल रहे स्क्रीनिंग प्लांट और स्टोन क्रशरों को क्लोजर नोटिस
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। ताजेवाला में बिना एनओसी के चल रहे क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांटों पर गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की गई है। प्रदूषण बोर्ड, सिंचाई विभाग और खनन विभाग की संयुक्त टीम ने यमुना की 500 मीटर की परिधि में चल रहे क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांटों पर छापे मारे और उनके कागजात चेक किए जो पूरे नहीं पाए। इस पर छह स्क्रीनिंग प्लांटों को क्लोजर नोटिस दिए गए हैं। इस कार्रवाई से क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांट संचालकों में हड़कंप मच गया और अपने सरपरस्त लोगों को फोन किया जाने लगा, लेकिन प्रशासन की टीम पूरी तैयारी के साथ आई थी और उन्होंने किसी भी नेता का फोन नहीं उठाया। कार्रवाई पूरी होने के बाद अधिकारियों ने आसपास के इलाके में हुए अवैध खनन का जायजा भी लिया और वहां की वीडियोग्राफी की। यहां कुल 14 स्क्रीनिंग प्लांट और क्रशर हैं। जिनमें से 8 को पहले ही क्लोजर नोटिस दिए जा चुके हैं। जांच टीम ने इन सभी स्कीनिंग प्लांट और क्रशरों को बंद करने की सिफारिश की है।
यमुना के किनारे भी खा गए माफिया
अवैध खनन के कारण यमुना नदी के राइट लोअर डाउन स्ट्रीम तटबंध यानि बाढ़ रोकने वाले बांध को बड़ा नुकसान पहुंचा हैं। यहां तक की खनन माफिया नदी के किनारे भी खा गए हैं। यहां 50 से 80 फीट तक के गड्ढे खोद दिए गए हैं। हाल ही में सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने अपने उच्च अधिकारियों को इस बाबत रिपोर्ट भेजी थी और जिले में बरसात के समय बाढ़ की आशंका जताई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि ताजेवाला में लाल टोपी घाट के आसपास चल रहे स्क्रीनिंग प्लांट और क्रशर संचालकों द्वारा ही अवैध खनन करवाया जा रहा है।
आचार संहिता का फायदा उठाया लंबे समय से ताजेवाला में स्टोन क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांट चल रहे थे। बताया जा रहा है कि इन्हें राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ था। इस वजह से अधिकारी इन पर हाथ डालने से कतराते थे। पहले किसी अधिकारी ने इनके खिलाफ कार्रवाई करने का प्रयास किया तो उन्हें ट्रांसफर झेलना पड़ा। अब आचार संहिता का फायदा उठाते हुए इनके क्रशरों के खिलाफ कार्रवाई की है।
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पांच सौ मीटर में नहीं हो सकता खनन
-20 जून 2012 के खान एवं भूविज्ञान विभाग हरियाणा के राजपत्र अधिसूचना के अनुसार यमुना नदी के तटबंधों के किनारे से 500 मीटर की चौड़ाई तक के क्षेत्र में कोई भी खनन कार्य नहीं हो सकता। 19600 फीट की लंबाई वाला आरएलडीएस यमुना नदी के किनारे पुरानी ताजवाला हेडवर्क्स के करीब मौजूद है। इसका निर्माण 1873 में किया गया था। 2011-13 में केंद्रीय जल आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार 3398.43 लाख रुपये के हिसाब से आरएलडीएसई की मरम्मत की गई थी। व्यापक अवैध खनन ने आरएलडीएसई के खत्म होने का खतरा पैदा कर दिया है। अगर ऐसा हुआ, तो यह आने वाले बरसात के मौसम में इलाके के गांवों में कहर बरपाने के अलावा ओल्ड ताजवाला हेडवर्क्स की लगभग 3.5 किलोमीटर की धारा में स्थित हथिनी कुंड बैराज को नुकसान पहुंचा सकता है।
-सिंचाई विभाग के एक्सईएन हरिदेव काम्बोज का कहना है कि अवैध खनन के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर जा रही है। 2010 में आई बाढ़ ने लाल टोपी घाट की पटरी को तोड़ दिया था । अब यमुना नदी के बैड लेवल से दूसरी साइड में हुए अवैध खनन से लेवल बहुत गहरा हो गया है। इससे पटरी के टूटने का अंदेशा बना हुआ है। यह सारा अवैध खनन यहां चल रहे स्टोन क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांट संचालकों द्वारा ही करवाया जा रहा है।
-प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल ऑफिसर निर्मल कश्यप का कहना है ताजेवाला में चल रहे सभी स्क्रीनिंग प्लाटों के दस्तावेज जांचे गए हैं। अधिकतर के पास एनओसी नहीं है। यह क्षेत्र खनन के लिए पहले से ही प्रतिबंधित है। जहां पर खनन की इजाजत होती है वहां पर भी यमुना नदी से 500 मीटर तक खुदाई नहीं हो सकती। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जल्दी ही यहां लगाए गए स्क्रीनिंग प्लाटों के खिलाफ उचित कार्रवाई करेगा।
-समय-समय पर अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। हर महीने कई एफआइआर भी दर्ज करवाई जा रही है। अवैध खनन माफिया को स्थानीय लोगों का भी सहयोग मिल रहा है। हम पहले से ही इस क्षेत्र में अवैध खनन में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज कर चुके हैं।
-संजय सभ्रवाल, जिला खनन अधिकारी
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यमुनानगर। ताजेवाला में बिना एनओसी के चल रहे क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांटों पर गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की गई है। प्रदूषण बोर्ड, सिंचाई विभाग और खनन विभाग की संयुक्त टीम ने यमुना की 500 मीटर की परिधि में चल रहे क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांटों पर छापे मारे और उनके कागजात चेक किए जो पूरे नहीं पाए। इस पर छह स्क्रीनिंग प्लांटों को क्लोजर नोटिस दिए गए हैं। इस कार्रवाई से क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांट संचालकों में हड़कंप मच गया और अपने सरपरस्त लोगों को फोन किया जाने लगा, लेकिन प्रशासन की टीम पूरी तैयारी के साथ आई थी और उन्होंने किसी भी नेता का फोन नहीं उठाया। कार्रवाई पूरी होने के बाद अधिकारियों ने आसपास के इलाके में हुए अवैध खनन का जायजा भी लिया और वहां की वीडियोग्राफी की। यहां कुल 14 स्क्रीनिंग प्लांट और क्रशर हैं। जिनमें से 8 को पहले ही क्लोजर नोटिस दिए जा चुके हैं। जांच टीम ने इन सभी स्कीनिंग प्लांट और क्रशरों को बंद करने की सिफारिश की है।
यमुना के किनारे भी खा गए माफिया
अवैध खनन के कारण यमुना नदी के राइट लोअर डाउन स्ट्रीम तटबंध यानि बाढ़ रोकने वाले बांध को बड़ा नुकसान पहुंचा हैं। यहां तक की खनन माफिया नदी के किनारे भी खा गए हैं। यहां 50 से 80 फीट तक के गड्ढे खोद दिए गए हैं। हाल ही में सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने अपने उच्च अधिकारियों को इस बाबत रिपोर्ट भेजी थी और जिले में बरसात के समय बाढ़ की आशंका जताई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि ताजेवाला में लाल टोपी घाट के आसपास चल रहे स्क्रीनिंग प्लांट और क्रशर संचालकों द्वारा ही अवैध खनन करवाया जा रहा है।
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आचार संहिता का फायदा उठाया लंबे समय से ताजेवाला में स्टोन क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांट चल रहे थे। बताया जा रहा है कि इन्हें राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ था। इस वजह से अधिकारी इन पर हाथ डालने से कतराते थे। पहले किसी अधिकारी ने इनके खिलाफ कार्रवाई करने का प्रयास किया तो उन्हें ट्रांसफर झेलना पड़ा। अब आचार संहिता का फायदा उठाते हुए इनके क्रशरों के खिलाफ कार्रवाई की है।
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पांच सौ मीटर में नहीं हो सकता खनन
-20 जून 2012 के खान एवं भूविज्ञान विभाग हरियाणा के राजपत्र अधिसूचना के अनुसार यमुना नदी के तटबंधों के किनारे से 500 मीटर की चौड़ाई तक के क्षेत्र में कोई भी खनन कार्य नहीं हो सकता। 19600 फीट की लंबाई वाला आरएलडीएस यमुना नदी के किनारे पुरानी ताजवाला हेडवर्क्स के करीब मौजूद है। इसका निर्माण 1873 में किया गया था। 2011-13 में केंद्रीय जल आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार 3398.43 लाख रुपये के हिसाब से आरएलडीएसई की मरम्मत की गई थी। व्यापक अवैध खनन ने आरएलडीएसई के खत्म होने का खतरा पैदा कर दिया है। अगर ऐसा हुआ, तो यह आने वाले बरसात के मौसम में इलाके के गांवों में कहर बरपाने के अलावा ओल्ड ताजवाला हेडवर्क्स की लगभग 3.5 किलोमीटर की धारा में स्थित हथिनी कुंड बैराज को नुकसान पहुंचा सकता है।
-सिंचाई विभाग के एक्सईएन हरिदेव काम्बोज का कहना है कि अवैध खनन के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर जा रही है। 2010 में आई बाढ़ ने लाल टोपी घाट की पटरी को तोड़ दिया था । अब यमुना नदी के बैड लेवल से दूसरी साइड में हुए अवैध खनन से लेवल बहुत गहरा हो गया है। इससे पटरी के टूटने का अंदेशा बना हुआ है। यह सारा अवैध खनन यहां चल रहे स्टोन क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांट संचालकों द्वारा ही करवाया जा रहा है।
-प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल ऑफिसर निर्मल कश्यप का कहना है ताजेवाला में चल रहे सभी स्क्रीनिंग प्लाटों के दस्तावेज जांचे गए हैं। अधिकतर के पास एनओसी नहीं है। यह क्षेत्र खनन के लिए पहले से ही प्रतिबंधित है। जहां पर खनन की इजाजत होती है वहां पर भी यमुना नदी से 500 मीटर तक खुदाई नहीं हो सकती। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जल्दी ही यहां लगाए गए स्क्रीनिंग प्लाटों के खिलाफ उचित कार्रवाई करेगा।
-समय-समय पर अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। हर महीने कई एफआइआर भी दर्ज करवाई जा रही है। अवैध खनन माफिया को स्थानीय लोगों का भी सहयोग मिल रहा है। हम पहले से ही इस क्षेत्र में अवैध खनन में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज कर चुके हैं।
-संजय सभ्रवाल, जिला खनन अधिकारी