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एफआइआर दज होने के बाद भी चल रहे अवैध स्क्रीनिंग प्लांट, एनजीटी का डंडा पड़ा तो प्रदूषण विभाग ने तीन पर लगाई सील
Updated Sat, 29 Sep 2018 01:02 AM IST
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एफआईआर दर्ज होने के बाद भी चल रहे अवैध स्क्रीनिंग प्लांट, एनजीटी का डंडा पड़ा तो प्रदूषण विभाग ने तीन पर लगाई सील
-जिनके खिलाफ एफआईआर, पुलिस उन स्क्रीनिंग प्लांट मालिकों का पता तक नहीं लगा पाई
अमर उजाला ब्यूरो
खिजराबाद
ताजेवाला के लाल टोपी घाट व उसके आस-पास यमुना के साथ लगते क्षेत्र में अवैध रूप से एक दर्जन से भी अधिक स्क्रीनिंग प्लांट व क्रशर चल रहे हैं। खनन, प्रदूषण व पुलिस विभाग की मिलीभगत से यहां अवैध खनन किया जा रहा है। इस खनन को अवैध स्क्रीनिंग पर लाया जाता है। शिकायतों के बाद पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज की, लेकिन अभी तक कुछ स्क्रिनिंग प्लांट संचालकों का पता चल नहीं चल सका। अब एनजीटी ने अवैध स्क्रीनिंग प्लांट व क्रशर के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए तो अधिकारी हरकत में आएं। गुरुवार को प्रदूषण बोर्ड की टीम ने बेगमपुर इलाके में तीन स्क्रीनिंग प्लांट पर सील लगाई। इनमें जय भोले स्क्रीनिंग प्लांट, भारत ग्राम स्क्रीनिंग और आरएस स्क्रीनिंग प्लांट के नाम शामिल हैं। ये शर्तें पूरी किए बगैर ही चल रहे थे को विभाग के अधिकारियों ने आगामी आदेश तक इन्हें बंद कर दिया है। बोर्ड के एसडीओ विपिन कुमार ने बताया सूचना मिली थी कि कुछ प्लांट अनापति प्रमाण पत्र लिए बिना ही चल रहे हैं। तीन स्क्रिनिंग प्लांटों पर सील लगा दी और आगामी आदशों तक बंद कर दिया है।
बॉक्स
कई स्क्रीनिंग प्लांट संचालकों ने तोड़ दी सील
कुछ महीने पहले प्रदूषण बोर्ड ने करीब एक दर्जन स्क्रीनिंग प्लांटों पर सील लगाई थी। कुछ दिन बाद ही संचालकों ने जुगाड़ कर सील लगे पार्ट्स को ही बड़ी होशियारी से अलग कर दिया और उसकी जगह पर दूसरा पार्ट फिट करके प्लांट चलाना शुरू कर दिया।
बॉक्स
खोद दिए 10 फीट गहरे गड्ढे
ताजेवाला के आसपास अवैध खनन करने वालों ने यमुना के साथ-साथ यमुना के साथ लगते जमीन में किनारों को भी कई कई फुट तक गहराई तक खोद दिया है। जिनको देखकर यह लगता है कि जिस हिसाब से यमुना को किनारे में उसके साथ लगती जमीन पर खनन हो रहा है आने वाले समय ताजे वाला व उसके साथ लगते आधा दर्जन गांव यमुना में ही समा जाएंगे।
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कर्मचारियों पर हो चुके हमले
अवैध खनन करने वाले माइनिंग माफिया ने कर्मचारियों पर कई बार जानलेवा हमले भी किए हैं। वन विभाग के दरोगा की भी बुरी तरह पिटाई भी कर दी थी। जिसमें करीब आधा दर्जन लोगों पर जान से मारने का प्रयास करने का मामला दर्ज हुआ था। वन विभाग के दरोगा को सूचना मिली थी कि अवैध खनन करने वाले वन विभाग की जमीन को खोद रहे हैं। जैसे ही वह मौके पर पहुंचे ओर उनको रोकने का प्रयास तो उन्होंने उसकी ही पिटाई कर दी। लाल टोपी घाट पर अवैध खनन की सूचना पर दो पुलिसकर्मी मौके पर गए तो अवैध खनन करने वाले लोगों ने उनके साथ धक्का-मुक्की कर जान से मारने की धमकी दी थी।
बॉक्स
लेनी होती है कई विभागों से परमिशन
-प्रदेश सरकार के नए नियमों के अनुसार स्क्रीनिंग प्लांट के लिए कुछ पैरामीटर तैयार किए हैं। वन विभाग, सिंचाई विभाग, शिक्षा विभाग, पंचायत विभाग, सड़क, वन्य प्राणी विभाग समेत कई विभागों से मंजूरी मिलने के बाद ही स्क्रीनिंग प्लांट लगाया जा सकता है। बल्लेवाला, बेलगढ, चुहड़पुर, नत्थनपुर, देवधर, बेगमपुर आदि एरिया में लगभग 200 स्क्रीनिंग प्लाट लग चुके हैं। जिनमें से मात्र 30 प्रतिशत मालिकों ने पैरामीटर के हिसाब से अपना प्लांट लगाया है।
बॉक्स
ये होना जरूरी
-निर्देशों के अनुसार गांव से लगभग एक किलोमीटर दूरी, स्कूल से दो सौ मीटर, जंगल से दो सौ मीटर, नेशनल हाइवे से एक किलोमीटर, स्टेट हाइवे से पांच सौ मीटर की दूरी पर ही स्क्रीनिंग प्लांट लगाया जा सकता है।
बॉक्स
नीचे जा रहा है जलस्तर
-स्क्रीनिंग प्लांट की बढ़ती संख्या से जलस्तर भी नीचे जा रहा है। क्योंकि स्क्रीनिंग प्लांट के लिए रेत बजरी को क्रश और धोने के लिए पानी की आवश्कता पड़ती है और नियमानुसार स्क्रीनिंग प्लांट पर पानी के टैंक का प्रावधान है जोकि किसी भी स्क्रीनिंग प्लांट पर उपलब्ध नहीं है। हर रोज लाखों लीटर पानी व्यर्थ ही बहाया जा रहा है। जब एक प्लांट चलता है तो काफी दूर तक प्रदूषण की मार करता है।
वर्जन
जिला खनन अधिकारी गुरजीत का कहना है कि ताजेवाला लाल टोपी व उसके आसपास के क्षेत्र में अवैध खनन की सूचना मिलने पर कार्रवाई की जाती है। अगर अब भी कहीं पर अवैध खनन किया जा रहा है उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जिला अधिकारी बलराज अहलावत का कहना है कि वह अभी दो दिन पहले ही यमुनानगर में ड्यूटी पर आए हैं। संबंधित एसडीओ से रिपोर्ट मंगाई जाएगी और कहीं भी अवैध तरीके से कोई कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
-थाना खिजराबाद प्रभारी लज्जा राम का कहना है कि खनन विभाग की तरफ से ताजेवाला में चल रहे स्क्रीनिंग प्लांटों पर एफ आई आर दर्ज है। स्क्रीन प्लांटों के मालिकों का पता लगाया जा रहा है। ताजेवाला में अवैध खनन रोकने के लिए पुलिस नाका लगाया हुआ है।
फोटो नंबर- 19 से 23 तक
एफआईआर दर्ज होने के बाद भी चल रहे अवैध स्क्रीनिंग प्लांट, एनजीटी का डंडा पड़ा तो प्रदूषण विभाग ने तीन पर लगाई सील
-जिनके खिलाफ एफआईआर, पुलिस उन स्क्रीनिंग प्लांट मालिकों का पता तक नहीं लगा पाई
अमर उजाला ब्यूरो
खिजराबाद
ताजेवाला के लाल टोपी घाट व उसके आस-पास यमुना के साथ लगते क्षेत्र में अवैध रूप से एक दर्जन से भी अधिक स्क्रीनिंग प्लांट व क्रशर चल रहे हैं। खनन, प्रदूषण व पुलिस विभाग की मिलीभगत से यहां अवैध खनन किया जा रहा है। इस खनन को अवैध स्क्रीनिंग पर लाया जाता है। शिकायतों के बाद पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज की, लेकिन अभी तक कुछ स्क्रिनिंग प्लांट संचालकों का पता चल नहीं चल सका। अब एनजीटी ने अवैध स्क्रीनिंग प्लांट व क्रशर के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए तो अधिकारी हरकत में आएं। गुरुवार को प्रदूषण बोर्ड की टीम ने बेगमपुर इलाके में तीन स्क्रीनिंग प्लांट पर सील लगाई। इनमें जय भोले स्क्रीनिंग प्लांट, भारत ग्राम स्क्रीनिंग और आरएस स्क्रीनिंग प्लांट के नाम शामिल हैं। ये शर्तें पूरी किए बगैर ही चल रहे थे को विभाग के अधिकारियों ने आगामी आदेश तक इन्हें बंद कर दिया है। बोर्ड के एसडीओ विपिन कुमार ने बताया सूचना मिली थी कि कुछ प्लांट अनापति प्रमाण पत्र लिए बिना ही चल रहे हैं। तीन स्क्रिनिंग प्लांटों पर सील लगा दी और आगामी आदशों तक बंद कर दिया है।
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कई स्क्रीनिंग प्लांट संचालकों ने तोड़ दी सील
कुछ महीने पहले प्रदूषण बोर्ड ने करीब एक दर्जन स्क्रीनिंग प्लांटों पर सील लगाई थी। कुछ दिन बाद ही संचालकों ने जुगाड़ कर सील लगे पार्ट्स को ही बड़ी होशियारी से अलग कर दिया और उसकी जगह पर दूसरा पार्ट फिट करके प्लांट चलाना शुरू कर दिया।
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खोद दिए 10 फीट गहरे गड्ढे
ताजेवाला के आसपास अवैध खनन करने वालों ने यमुना के साथ-साथ यमुना के साथ लगते जमीन में किनारों को भी कई कई फुट तक गहराई तक खोद दिया है। जिनको देखकर यह लगता है कि जिस हिसाब से यमुना को किनारे में उसके साथ लगती जमीन पर खनन हो रहा है आने वाले समय ताजे वाला व उसके साथ लगते आधा दर्जन गांव यमुना में ही समा जाएंगे।
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कर्मचारियों पर हो चुके हमले
अवैध खनन करने वाले माइनिंग माफिया ने कर्मचारियों पर कई बार जानलेवा हमले भी किए हैं। वन विभाग के दरोगा की भी बुरी तरह पिटाई भी कर दी थी। जिसमें करीब आधा दर्जन लोगों पर जान से मारने का प्रयास करने का मामला दर्ज हुआ था। वन विभाग के दरोगा को सूचना मिली थी कि अवैध खनन करने वाले वन विभाग की जमीन को खोद रहे हैं। जैसे ही वह मौके पर पहुंचे ओर उनको रोकने का प्रयास तो उन्होंने उसकी ही पिटाई कर दी। लाल टोपी घाट पर अवैध खनन की सूचना पर दो पुलिसकर्मी मौके पर गए तो अवैध खनन करने वाले लोगों ने उनके साथ धक्का-मुक्की कर जान से मारने की धमकी दी थी।
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लेनी होती है कई विभागों से परमिशन
-प्रदेश सरकार के नए नियमों के अनुसार स्क्रीनिंग प्लांट के लिए कुछ पैरामीटर तैयार किए हैं। वन विभाग, सिंचाई विभाग, शिक्षा विभाग, पंचायत विभाग, सड़क, वन्य प्राणी विभाग समेत कई विभागों से मंजूरी मिलने के बाद ही स्क्रीनिंग प्लांट लगाया जा सकता है। बल्लेवाला, बेलगढ, चुहड़पुर, नत्थनपुर, देवधर, बेगमपुर आदि एरिया में लगभग 200 स्क्रीनिंग प्लाट लग चुके हैं। जिनमें से मात्र 30 प्रतिशत मालिकों ने पैरामीटर के हिसाब से अपना प्लांट लगाया है।
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ये होना जरूरी
-निर्देशों के अनुसार गांव से लगभग एक किलोमीटर दूरी, स्कूल से दो सौ मीटर, जंगल से दो सौ मीटर, नेशनल हाइवे से एक किलोमीटर, स्टेट हाइवे से पांच सौ मीटर की दूरी पर ही स्क्रीनिंग प्लांट लगाया जा सकता है।
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नीचे जा रहा है जलस्तर
-स्क्रीनिंग प्लांट की बढ़ती संख्या से जलस्तर भी नीचे जा रहा है। क्योंकि स्क्रीनिंग प्लांट के लिए रेत बजरी को क्रश और धोने के लिए पानी की आवश्कता पड़ती है और नियमानुसार स्क्रीनिंग प्लांट पर पानी के टैंक का प्रावधान है जोकि किसी भी स्क्रीनिंग प्लांट पर उपलब्ध नहीं है। हर रोज लाखों लीटर पानी व्यर्थ ही बहाया जा रहा है। जब एक प्लांट चलता है तो काफी दूर तक प्रदूषण की मार करता है।
वर्जन
जिला खनन अधिकारी गुरजीत का कहना है कि ताजेवाला लाल टोपी व उसके आसपास के क्षेत्र में अवैध खनन की सूचना मिलने पर कार्रवाई की जाती है। अगर अब भी कहीं पर अवैध खनन किया जा रहा है उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जिला अधिकारी बलराज अहलावत का कहना है कि वह अभी दो दिन पहले ही यमुनानगर में ड्यूटी पर आए हैं। संबंधित एसडीओ से रिपोर्ट मंगाई जाएगी और कहीं भी अवैध तरीके से कोई कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
-थाना खिजराबाद प्रभारी लज्जा राम का कहना है कि खनन विभाग की तरफ से ताजेवाला में चल रहे स्क्रीनिंग प्लांटों पर एफ आई आर दर्ज है। स्क्रीन प्लांटों के मालिकों का पता लगाया जा रहा है। ताजेवाला में अवैध खनन रोकने के लिए पुलिस नाका लगाया हुआ है।
फोटो नंबर- 19 से 23 तक