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Yamuna Nagar News: सुरक्षा के लिए बने तटबंध में आई दरारें
Wed, 14 Aug 2024 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 14 Aug 2024 01:10 AM IST
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साहिल घई
साढौरा। नकटी नदी के उफान से कस्बे को बचाने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से बनाया गया तटबंध खुद ही असुरक्षित हो गया है। पहली ही बरसात के दौरान इस तटबंध में कई जगह गहरी दरारें आ गई हैं। वहीं इस तटबंध पर लगाए गए छोटे आकार के पत्थर बरसात के पानी की मार को न सहते हुए पानी में बह गए हैं। जिससे इस तटबंध के लंबे समय तक सुरक्षित रहने पर सवाल उठ रहे हैं।
सिंचाई विभाग ने सढौरा से गुजर रही नकटी नदी के किनारे मई के मध्य में इस तटबंध को बनाने का काम शुरू किया था। तब भी एक ही मशीन से काम शुरू किया गया। देर से काम शुरू किए जाने के कारण जुलाई में मानसून सीजन शुरु होने तक इस तटबंध का निर्माण पूरा नहीं हो पाया था। जैसे-तैसे इस तटबंध को नदी की रेत से बनाया गया। इसके बाद बरसात शुरु होने से पहले जल्दबाजी में तटबंध पर पत्थर लगाने का काम शुरु किया गया।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों की निगरानी के अभाव में ठेकेदार ने नियमों का उल्लंघन करते हुए तटबंध पर बड़ी मात्रा में छोटे आकार के पत्थर लगा दिए। यही नहीं तटबंध पर लगे पत्थरों की मजबूती के लिए कहीं भी क्रेट वायर तक नहीं लगाई गई। नतीजन पहली ही बरसात में इस तटबंध पर लगे छोटे पत्थर नदी में आए पानी के बहाव में बह गए।
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वहीं तटबंध पर बहुत जगह पर गहरी दरारें आ गई हैं। स्थानीय निवासी अमित सेतिया ने कहा कि अगर इन दरारों को पाटने का काम जल्दी ही शुरू न किया गया तो अगले दिनों में होने वाली बरसात के दौरान यह तटबंध पूरी तरह से ध्वस्त हो सकता है। उन्होंने इस तटबंध के निर्माण में बरती गई अनियमितताओं की जांच की भी मांग की है।
यह तटबंध शुरू से ही विवादों में रहा है। नगरपालिका की चेयरपर्सन शालिनी शर्मा ने तो इस तटबंध के बनाए जाने के औचित्य पर ही सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि तटबंध बनाने की बजाए नदी की खोदाई करवाई जाए तो कस्बे में जलभराव नहीं होगा। तटबंध बनाने की बजाए खोदाई पर लागत भी कम आती। रिटायर्ड बीईओ अख्तर अली, अमित सेतिया व सतनाम सिंह ने नदी में सरकारी जमीन पर किए गए कब्जों से हटकर बनाए जा रहे तटबंध से केवल अवैध कब्जे ही सुरक्षित होने की बात कही थी। इनका मानना है कि कब्जों को हटाकर तटबंध बनाया जाता तो नदी का प्रवाह क्षेत्र का दायरा भी कम नहीं होता। संवाद
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साढौरा। नकटी नदी के उफान से कस्बे को बचाने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से बनाया गया तटबंध खुद ही असुरक्षित हो गया है। पहली ही बरसात के दौरान इस तटबंध में कई जगह गहरी दरारें आ गई हैं। वहीं इस तटबंध पर लगाए गए छोटे आकार के पत्थर बरसात के पानी की मार को न सहते हुए पानी में बह गए हैं। जिससे इस तटबंध के लंबे समय तक सुरक्षित रहने पर सवाल उठ रहे हैं।
सिंचाई विभाग ने सढौरा से गुजर रही नकटी नदी के किनारे मई के मध्य में इस तटबंध को बनाने का काम शुरू किया था। तब भी एक ही मशीन से काम शुरू किया गया। देर से काम शुरू किए जाने के कारण जुलाई में मानसून सीजन शुरु होने तक इस तटबंध का निर्माण पूरा नहीं हो पाया था। जैसे-तैसे इस तटबंध को नदी की रेत से बनाया गया। इसके बाद बरसात शुरु होने से पहले जल्दबाजी में तटबंध पर पत्थर लगाने का काम शुरु किया गया।
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सिंचाई विभाग के अधिकारियों की निगरानी के अभाव में ठेकेदार ने नियमों का उल्लंघन करते हुए तटबंध पर बड़ी मात्रा में छोटे आकार के पत्थर लगा दिए। यही नहीं तटबंध पर लगे पत्थरों की मजबूती के लिए कहीं भी क्रेट वायर तक नहीं लगाई गई। नतीजन पहली ही बरसात में इस तटबंध पर लगे छोटे पत्थर नदी में आए पानी के बहाव में बह गए।
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वहीं तटबंध पर बहुत जगह पर गहरी दरारें आ गई हैं। स्थानीय निवासी अमित सेतिया ने कहा कि अगर इन दरारों को पाटने का काम जल्दी ही शुरू न किया गया तो अगले दिनों में होने वाली बरसात के दौरान यह तटबंध पूरी तरह से ध्वस्त हो सकता है। उन्होंने इस तटबंध के निर्माण में बरती गई अनियमितताओं की जांच की भी मांग की है।
यह तटबंध शुरू से ही विवादों में रहा है। नगरपालिका की चेयरपर्सन शालिनी शर्मा ने तो इस तटबंध के बनाए जाने के औचित्य पर ही सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि तटबंध बनाने की बजाए नदी की खोदाई करवाई जाए तो कस्बे में जलभराव नहीं होगा। तटबंध बनाने की बजाए खोदाई पर लागत भी कम आती। रिटायर्ड बीईओ अख्तर अली, अमित सेतिया व सतनाम सिंह ने नदी में सरकारी जमीन पर किए गए कब्जों से हटकर बनाए जा रहे तटबंध से केवल अवैध कब्जे ही सुरक्षित होने की बात कही थी। इनका मानना है कि कब्जों को हटाकर तटबंध बनाया जाता तो नदी का प्रवाह क्षेत्र का दायरा भी कम नहीं होता। संवाद