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स्कूल डायरेक्टर और टीचर को छह-छह साल कैद
अमर उजाला ब्यूरो, यमुनानगर
Updated Wed, 29 Jul 2015 12:10 AM IST
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12वीं कक्षा के छात्र को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के दोषी एक निजी स्कूल डायरेक्टर तथा टीचर को कोर्ट ने छह-छह साल कैद तथा 60 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है जबकि प्रिंसिपल को बरी कर दिया गया है। यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायाधीश सरिता गुप्ता की कोर्ट ने सुनाया है।
कोर्ट में करीब साढ़े तीन साल तक चली सुनवाई के दौरान 22 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मंगलवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।
यह था मामला : पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 9 दिसंबर, 2011 को पुलिस को सूचना मिली थी कि कुलदीप नगर निवासी रंजन शर्मा पुत्र धर्मेंद्र की मौत हो गई है। जिसका शव यमुनानगर सिविल अस्पताल के शवगृह में रखा हुआ है। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस को दी शिकायत में मृतक की मां अनीता ने कहा कि वह सरकारी स्कूल में टीचर है। उसका बेटा रंजन कैंप क्षेत्र स्थित एक निजी स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ता था। 8 दिसंबर, 2011 को वह स्कूल गया था।
स्कूल में पहले पीरियड में राकेश नाम के टीचर ने उससे पूछा कि वह रेगुलर स्कूल में क्यों नहीं आता। इसके बाद उसके बेटे को क्लास से बाहर खड़ा कर दिया। इसी दौरान स्कूल प्रिंसिपल नीलम राउंड पर थीं, जब उसने रंजन को क्लास के बाहर खड़ा देखा, तो उसने उसे अपने ऑफिस में बुला लिया और कहा कि वह रेगुलर स्कूल नहीं आता है और न ही फाइन अदा करता है। फिर उसके बेटे को स्कूल के डायरेक्टर राजबीर पुंडीर के पास ले गए। जहां पर उसे कहा गया कि वे उसका कैरियर बर्बाद कर देंगे और उसे रोल नंबर नहीं देंगे। न ही प्रैक्टिकल में नंबर देंगे। शिकायतकर्ता के मुताबिक उपरोक्त लोगों ने उसके बेटे को दिमागी रूप से परेशान किया। साथ ही कहा कि वे उससे दोबारा से 12वीं कराएंगे जबकि रंजन पढ़ने में होशियार था।
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बेटे को पीटा
शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में बताया कि टीचर ने उसके बेटे के साथ मारपीट की और उसे फोन करके स्कूल बुला लिया। जब वह स्कूल पहुंची, तो उसे गेट पर रोक लिया गया। सब ने उससे मिलने से इंकार कर दिया। गेट पर काफी देर तक इंतजार करने के बाद वह अपने घर लौट आई। शाम साढ़े चार बजे तक रंजन घर नहीं पहुंचा, तो उसकी चिंता बढ़ गई। सुबह करीब तीन बजे आवाजें आईं, जब उसने छत पर जाकर देखा, तो रंजन आग में जल रहा था। पड़ोसियों की मदद से किसी तरह से आग पर काबू पाया।
गंभीर हालत में रंजन को अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां से चिकित्सकों ने उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया लेकिन रास्ते में ही रंजन ने दम तोड़ दिया। साथ ही पुलिस को रंजन द्वारा लिखा गया सुसाइड नोट भी मिला। इसमें उसने अपनी मौत के लिए स्कूल डायरेक्टर, प्रिंसिपल व टीचर को जिम्मेदार ठहराया। पुलिस ने मृतक की मां अनीता की शिकायत पर स्कूल डायरेक्टर राजबीर पुंडीर, प्रिंसिपल नीलम तथा टीचर राकेश के खिलाफ रंजन को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।
इसके बाद मामले की सुनवाई कोर्ट में शुरू हो गई। कोर्ट में करीब साढ़े तीन साल चली सुनवाई के दौरान 22 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश सरिता गुप्ता की कोर्ट ने प्रिंसिपल नीलम को बरी कर दिया। जबकि डायरेक्टर राजबीर व टीचर राकेश को भादंसं की धारा 306 के तहत दोषी करार देते हुए अपना फैसला सुना दिया। कोर्ट ने स्कूल के डायरेक्टर राजबीर पुंडीर तथा स्कूल टीचर राकेश कुमार को छह-छह साल कैद तथा 30-30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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कोर्ट में करीब साढ़े तीन साल तक चली सुनवाई के दौरान 22 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मंगलवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।
यह था मामला : पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 9 दिसंबर, 2011 को पुलिस को सूचना मिली थी कि कुलदीप नगर निवासी रंजन शर्मा पुत्र धर्मेंद्र की मौत हो गई है। जिसका शव यमुनानगर सिविल अस्पताल के शवगृह में रखा हुआ है। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस को दी शिकायत में मृतक की मां अनीता ने कहा कि वह सरकारी स्कूल में टीचर है। उसका बेटा रंजन कैंप क्षेत्र स्थित एक निजी स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ता था। 8 दिसंबर, 2011 को वह स्कूल गया था।
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स्कूल में पहले पीरियड में राकेश नाम के टीचर ने उससे पूछा कि वह रेगुलर स्कूल में क्यों नहीं आता। इसके बाद उसके बेटे को क्लास से बाहर खड़ा कर दिया। इसी दौरान स्कूल प्रिंसिपल नीलम राउंड पर थीं, जब उसने रंजन को क्लास के बाहर खड़ा देखा, तो उसने उसे अपने ऑफिस में बुला लिया और कहा कि वह रेगुलर स्कूल नहीं आता है और न ही फाइन अदा करता है। फिर उसके बेटे को स्कूल के डायरेक्टर राजबीर पुंडीर के पास ले गए। जहां पर उसे कहा गया कि वे उसका कैरियर बर्बाद कर देंगे और उसे रोल नंबर नहीं देंगे। न ही प्रैक्टिकल में नंबर देंगे। शिकायतकर्ता के मुताबिक उपरोक्त लोगों ने उसके बेटे को दिमागी रूप से परेशान किया। साथ ही कहा कि वे उससे दोबारा से 12वीं कराएंगे जबकि रंजन पढ़ने में होशियार था।
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बेटे को पीटा
शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में बताया कि टीचर ने उसके बेटे के साथ मारपीट की और उसे फोन करके स्कूल बुला लिया। जब वह स्कूल पहुंची, तो उसे गेट पर रोक लिया गया। सब ने उससे मिलने से इंकार कर दिया। गेट पर काफी देर तक इंतजार करने के बाद वह अपने घर लौट आई। शाम साढ़े चार बजे तक रंजन घर नहीं पहुंचा, तो उसकी चिंता बढ़ गई। सुबह करीब तीन बजे आवाजें आईं, जब उसने छत पर जाकर देखा, तो रंजन आग में जल रहा था। पड़ोसियों की मदद से किसी तरह से आग पर काबू पाया।
गंभीर हालत में रंजन को अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां से चिकित्सकों ने उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया लेकिन रास्ते में ही रंजन ने दम तोड़ दिया। साथ ही पुलिस को रंजन द्वारा लिखा गया सुसाइड नोट भी मिला। इसमें उसने अपनी मौत के लिए स्कूल डायरेक्टर, प्रिंसिपल व टीचर को जिम्मेदार ठहराया। पुलिस ने मृतक की मां अनीता की शिकायत पर स्कूल डायरेक्टर राजबीर पुंडीर, प्रिंसिपल नीलम तथा टीचर राकेश के खिलाफ रंजन को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।
इसके बाद मामले की सुनवाई कोर्ट में शुरू हो गई। कोर्ट में करीब साढ़े तीन साल चली सुनवाई के दौरान 22 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश सरिता गुप्ता की कोर्ट ने प्रिंसिपल नीलम को बरी कर दिया। जबकि डायरेक्टर राजबीर व टीचर राकेश को भादंसं की धारा 306 के तहत दोषी करार देते हुए अपना फैसला सुना दिया। कोर्ट ने स्कूल के डायरेक्टर राजबीर पुंडीर तथा स्कूल टीचर राकेश कुमार को छह-छह साल कैद तथा 30-30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।