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जलस्तर गिरने से बढ़ी किसानों की चिंता
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संवाद न्यूज एजेंसी
छछरौली। जलस्तर गिरने से किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। खासकर धान, गन्ना और पापुलर के किसान परेशान हैं। जलस्तर गिरने से खेतों में लगे ट्यूबवेल से पानी कम निकल रहा है। इससे धान की फसल को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पा रहा है।
सबसे ज्यादा समस्या घाड़ क्षेत्र के गांवों को हो रही है, क्योंकि वहां पहले से ही जलस्तर बहुत नीचे हैं। इस बारे में कृषि उपनिदेशक डॉ. जसविंद्र सिंह का कहना है कि सरकार की ओर से जलस्तर बढ़ाने के लिए कदम उठाएं जा रहे हैं। धान की खेती की जगह अन्य फसलें लगाने वालों को प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। किसानों का सहयोग बहुत जरूरी है, तभी जिले के जलस्तर में सुधार हो सकेगा। उन्होंने कहा कि ज्यादा पानी वाली धान जैसी फसल की जगह पर अन्य नकदी फसलों की तरफ किसान ध्यान दें।
किसान सुरेंद्र का कहना है कि जलस्तर का गिरना बहुत बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। इसका सबसे ज्यादा असर धान की फसल पर पड़ रहा है। धान की खेती को सिंचाई के लिए सबसे ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है। जलस्तर कम होने की वजह से ट्यूबवेल में पानी आधा ही रह गया है। सरकार को जलस्तर बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए। ताकि जमीन में पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध रहें।
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किसान जस्सी विर्क का कहना है कि धरती का जो जलस्तर गिर रहा है। उसके कहीं ना कहीं जिम्मेदार हम खुद ही हैं। इंसान प्रकृति के साथ छेड़छाड़ ज्यादा कर रहा है। जिसकी वजह से तेजी से ग्लेशियर पिघल रहे हैं और बरसात भी कम हो गई है। बरसात कम होने की वजह से धरती का जलस्तर गिरा हुआ है। हमें चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाएं और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखें।
किसान काका दादूपुर का कहना है कि पर्यावरण को बचाने के लिए हमारी तरफ से लापरवाही की जा रही है। जिसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ रहा है। हम कई बार देखते हैं कि बिना जरूरत के भी हमारे नलकूप व ट्यूबवेल चलते रहते हैं। पानी की बर्बादी भी धरती के जलस्तर गिरने का एक मुख्य कारण है।
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छछरौली। जलस्तर गिरने से किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। खासकर धान, गन्ना और पापुलर के किसान परेशान हैं। जलस्तर गिरने से खेतों में लगे ट्यूबवेल से पानी कम निकल रहा है। इससे धान की फसल को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पा रहा है।
सबसे ज्यादा समस्या घाड़ क्षेत्र के गांवों को हो रही है, क्योंकि वहां पहले से ही जलस्तर बहुत नीचे हैं। इस बारे में कृषि उपनिदेशक डॉ. जसविंद्र सिंह का कहना है कि सरकार की ओर से जलस्तर बढ़ाने के लिए कदम उठाएं जा रहे हैं। धान की खेती की जगह अन्य फसलें लगाने वालों को प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। किसानों का सहयोग बहुत जरूरी है, तभी जिले के जलस्तर में सुधार हो सकेगा। उन्होंने कहा कि ज्यादा पानी वाली धान जैसी फसल की जगह पर अन्य नकदी फसलों की तरफ किसान ध्यान दें।
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किसान सुरेंद्र का कहना है कि जलस्तर का गिरना बहुत बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। इसका सबसे ज्यादा असर धान की फसल पर पड़ रहा है। धान की खेती को सिंचाई के लिए सबसे ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है। जलस्तर कम होने की वजह से ट्यूबवेल में पानी आधा ही रह गया है। सरकार को जलस्तर बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए। ताकि जमीन में पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध रहें।
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किसान जस्सी विर्क का कहना है कि धरती का जो जलस्तर गिर रहा है। उसके कहीं ना कहीं जिम्मेदार हम खुद ही हैं। इंसान प्रकृति के साथ छेड़छाड़ ज्यादा कर रहा है। जिसकी वजह से तेजी से ग्लेशियर पिघल रहे हैं और बरसात भी कम हो गई है। बरसात कम होने की वजह से धरती का जलस्तर गिरा हुआ है। हमें चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाएं और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखें।
किसान काका दादूपुर का कहना है कि पर्यावरण को बचाने के लिए हमारी तरफ से लापरवाही की जा रही है। जिसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ रहा है। हम कई बार देखते हैं कि बिना जरूरत के भी हमारे नलकूप व ट्यूबवेल चलते रहते हैं। पानी की बर्बादी भी धरती के जलस्तर गिरने का एक मुख्य कारण है।