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चार गुणा मुआवजा न मिला तो नहीं होने देंगे बाईपास का निर्माण
ब्यूरो/अमर उजाला/यमुनानगर
Updated Thu, 14 Jan 2016 12:45 AM IST
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ट्विनसिटी से गुजरने वाले एनएच-73 को शहर से बाहर करने के लिए बनाए जाने वाले बाईपास निर्माण में एक बार फिर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। कैल से कलानौर तक बाईपास निर्माण में अधिग्रहित की गई सवा चार सौ एकड़ जमीन के किसानों ने नए भूमि अधिग्रहण विधेयक के तहत मार्केट रेट से चार गुणा मुआवजे की मांग की है।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें मार्केट रेट से चार गुणा अधिक मुआवजा न मिला तो वे बाईपास का निर्माण नहीं होने देंगे। किसान बुधवार को भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले लघु सचिवालय में पहुंचे। यहां उन्होंने एडीसी को ज्ञापन देकर अपनी मांगे रखी।
कैल से कलानौर तक बनाए जाने वाले बाईपास निर्माण में अधिग्रहित की गई जमीन का मार्केट रेट से चार गुणा मुआवजा दिलाने व अन्य मांगों को लेकर काफी संख्या में किसान भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले लघु सचिवालय पहुंचे। भाकियू के प्रदेश सचिव हरपाल सुढै़ल, बाबू राम गुंदियाना, महेंद्र सिंह, मामचंद ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से ट्विनसिटी में गुजर रहे चंडीगढ़ रुड़की नेशनल हाईवे 73 को शहर से बाहर करने के लिए बाईपास निर्माण किया जाएगा।
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इसके लिए सरकार द्वारा जिले की करीब सवा चार सौ एकड़ जमीन अधिग्रहित की है। सरकार ने जमीन का मुआवजा 25 लाख रुपये प्रति एकड़ दिया है, वह भी सरकार के दबाव में लिया है। अब दो साल से मुआवजा बढ़ाने को लेकर उनके केस एडीसी के पास लंबित हैं, जिसका कोई भी परिणाम अब तक नहीं निकला है और बाईपास के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है।
उनकी मांग है कि 15 दिन के अंदर एडीसी के पास लंबित पड़े केसों फैसला सुनाया जाए और नए भूमि अधिग्रहण बिल के अनुसार मार्केट रेट से चार गुना मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही जिन किसानों ने अपनी जमीन दी है, उनके परिवार के किसी सदस्य को नौकरी दी जाए। इसके साथ ही अगर किसान रोजगार करना चाहे तो मुफ्त सीएलयू दिया जाए। किसानों ने एडीसी को ज्ञापन देकर उक्त मांगों को पूरा करने की मांग की। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगे नहीं मानी गई तो वह बाईपास का निर्माण नहीं देंगे और काम बीच में ही रुकवा देंगे।
-बाईपास के लिए अधिग्रहित हुई थी 28 गांवों की 425 एकड़ जमीन
बाईपास निर्माण के लिए कलानौर, तिगरी, मंडोली, करहेड़ा खुर्द, पांजूपुर, खंडवा, हरिपुर, सुखपुरा, औरंगाबाद, रोड छप्पर, हरगढ़, गोलनपुर, हरनौल, गलौली, मंडेबरी, सुढ़ल, सुढै़ल, रुलाखेड़ी, कैल, भंभौली, कान्हड़ी खुर्द, गधौला, गधौली, मिल्क माजरा, लंढ़ौरा, मंसूरपुर व सबलुपर सहित 28 गांवों की करीब 425 एकड़ जमीन एक्वायर की गई थी।
एक दशक से लटका हुआ है निर्माण :
बाईपास का निर्माण पिछले करीब एक दशक से लटका हुआ है। यमुनानगर व जगाधरी शहर के लिए बाईपास का निर्माण बहुत महत्वपूर्ण है। इसके तहत यमुनानगर और जगाधरी से गुजरने वाले नेशनल हाईवे को शहर से बाहर बनाया जाना है। दोनों शहरों के बीच करीब 10 किलोमीटर लंबा नेशनल हाईवे गुजरता है। हाईवेे से गुजरने वाले भारी वाहनों के कारण आए-दिन जानलेवा सड़क हादसे होते रहते हैं। बीते 10 सालों में हाईवे पर सड़क हादसों में करीब 300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी हैं।
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किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें मार्केट रेट से चार गुणा अधिक मुआवजा न मिला तो वे बाईपास का निर्माण नहीं होने देंगे। किसान बुधवार को भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले लघु सचिवालय में पहुंचे। यहां उन्होंने एडीसी को ज्ञापन देकर अपनी मांगे रखी।
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कैल से कलानौर तक बनाए जाने वाले बाईपास निर्माण में अधिग्रहित की गई जमीन का मार्केट रेट से चार गुणा मुआवजा दिलाने व अन्य मांगों को लेकर काफी संख्या में किसान भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले लघु सचिवालय पहुंचे। भाकियू के प्रदेश सचिव हरपाल सुढै़ल, बाबू राम गुंदियाना, महेंद्र सिंह, मामचंद ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से ट्विनसिटी में गुजर रहे चंडीगढ़ रुड़की नेशनल हाईवे 73 को शहर से बाहर करने के लिए बाईपास निर्माण किया जाएगा।
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इसके लिए सरकार द्वारा जिले की करीब सवा चार सौ एकड़ जमीन अधिग्रहित की है। सरकार ने जमीन का मुआवजा 25 लाख रुपये प्रति एकड़ दिया है, वह भी सरकार के दबाव में लिया है। अब दो साल से मुआवजा बढ़ाने को लेकर उनके केस एडीसी के पास लंबित हैं, जिसका कोई भी परिणाम अब तक नहीं निकला है और बाईपास के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है।
उनकी मांग है कि 15 दिन के अंदर एडीसी के पास लंबित पड़े केसों फैसला सुनाया जाए और नए भूमि अधिग्रहण बिल के अनुसार मार्केट रेट से चार गुना मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही जिन किसानों ने अपनी जमीन दी है, उनके परिवार के किसी सदस्य को नौकरी दी जाए। इसके साथ ही अगर किसान रोजगार करना चाहे तो मुफ्त सीएलयू दिया जाए। किसानों ने एडीसी को ज्ञापन देकर उक्त मांगों को पूरा करने की मांग की। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगे नहीं मानी गई तो वह बाईपास का निर्माण नहीं देंगे और काम बीच में ही रुकवा देंगे।
-बाईपास के लिए अधिग्रहित हुई थी 28 गांवों की 425 एकड़ जमीन
बाईपास निर्माण के लिए कलानौर, तिगरी, मंडोली, करहेड़ा खुर्द, पांजूपुर, खंडवा, हरिपुर, सुखपुरा, औरंगाबाद, रोड छप्पर, हरगढ़, गोलनपुर, हरनौल, गलौली, मंडेबरी, सुढ़ल, सुढै़ल, रुलाखेड़ी, कैल, भंभौली, कान्हड़ी खुर्द, गधौला, गधौली, मिल्क माजरा, लंढ़ौरा, मंसूरपुर व सबलुपर सहित 28 गांवों की करीब 425 एकड़ जमीन एक्वायर की गई थी।
एक दशक से लटका हुआ है निर्माण :
बाईपास का निर्माण पिछले करीब एक दशक से लटका हुआ है। यमुनानगर व जगाधरी शहर के लिए बाईपास का निर्माण बहुत महत्वपूर्ण है। इसके तहत यमुनानगर और जगाधरी से गुजरने वाले नेशनल हाईवे को शहर से बाहर बनाया जाना है। दोनों शहरों के बीच करीब 10 किलोमीटर लंबा नेशनल हाईवे गुजरता है। हाईवेे से गुजरने वाले भारी वाहनों के कारण आए-दिन जानलेवा सड़क हादसे होते रहते हैं। बीते 10 सालों में हाईवे पर सड़क हादसों में करीब 300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी हैं।