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भारत भेजने के एवज में मांग रहे सैकड़ों डालर
ब्यूरो/अमर उजाला यमुनानगर
Updated Sat, 21 Jun 2014 12:49 AM IST
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रादौर। ईराक में फंसे भारतीय युवकों के लिए एक और मुसीबत खड़ी हो गई है। भारतीय युवक जिन कंपनियों में काम कर रहे हैं, उन कंपनियों के अधिकारी युवकों को पासपोर्ट और अन्य जरू री कागजात देने और भारत भेजने के एवज में सैकडों डालर की मांग कर रहे हैं।
इसके अलावा कंपनी ने पिछले तीन माह से युवकाें को तनख्वाह भी नहीं दी है। ऐसे में इन युवकों के परिजनों बुरी तरह परेशान है। यमुनानगर के खंड रादौर के गांव खेड़की ब्राह्मणा से सात युवक दीपक कुमार सपुत्र सतीश कुमार, सुभाष सपुत्र राजकुमार, सुनील सपुत्र रतनलाल, अमित कुमार सपुत्र रामेश्वर दास, मोहित सपुत्र शिवकुमार, गुलशन पुत्र रामसिंह तथा बलवंत सिंह पुत्र जयकिशन है।
जबकि गांव शहजादपुर से विश्वास कुमार सपुत्र अमर सिंह, गांव बापा से जोगिंद्र कुमार, फतेहगढ़ से संदीप कुमार सपुत्र मानसिंह और कस्बा रादौर से भी एक युवक ईराक में फंसा हुआ है। युवक दीपक के पिता सतीश कुमार, विश्वास के पिता अमरसिंह के अनुसार इनमें से कुछ युवक वहां जीएनएम नामक एक कंपनी में कार्य करते हैं।
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दोनों युवकों के पिता ने कहा कि उनके बेटों ने फोन पर उन्हें बताया इस कंपनी में कार्य करने वाले सभी भारतीय युवकों ने कंपनी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है, लेकिन कंपनी के अधिकारी उन्हें उनका पासपोर्ट तथा अन्य जरूरी कागजात उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं। इसकी एवज में पहले तो कंपनी के अधिकारियों ने उनसे 600 डॉलर की मांग की थी, इसके बाद 700 और अब 900 डॉलर की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि कंपनी ने पिछले तीन माह से युवकों को उनकी तनख्वाह भी नहीं दी है। इस कारणअब परिजनों के सामने बच्चों को वापस बुलाने के लिए पैसे इकट्ठे करने का संकट भी खड़ा हो गया है। युवकों के परिजनों ने बताया कि वे पहले ही लाखों रुपये का कर्जा लेकर बेटों को ईराक भेजने पर खर्च कर चुके है और अब वे पैसे का इंतजाम कैसे करें।
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इसके अलावा कंपनी ने पिछले तीन माह से युवकाें को तनख्वाह भी नहीं दी है। ऐसे में इन युवकों के परिजनों बुरी तरह परेशान है। यमुनानगर के खंड रादौर के गांव खेड़की ब्राह्मणा से सात युवक दीपक कुमार सपुत्र सतीश कुमार, सुभाष सपुत्र राजकुमार, सुनील सपुत्र रतनलाल, अमित कुमार सपुत्र रामेश्वर दास, मोहित सपुत्र शिवकुमार, गुलशन पुत्र रामसिंह तथा बलवंत सिंह पुत्र जयकिशन है।
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जबकि गांव शहजादपुर से विश्वास कुमार सपुत्र अमर सिंह, गांव बापा से जोगिंद्र कुमार, फतेहगढ़ से संदीप कुमार सपुत्र मानसिंह और कस्बा रादौर से भी एक युवक ईराक में फंसा हुआ है। युवक दीपक के पिता सतीश कुमार, विश्वास के पिता अमरसिंह के अनुसार इनमें से कुछ युवक वहां जीएनएम नामक एक कंपनी में कार्य करते हैं।
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दोनों युवकों के पिता ने कहा कि उनके बेटों ने फोन पर उन्हें बताया इस कंपनी में कार्य करने वाले सभी भारतीय युवकों ने कंपनी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है, लेकिन कंपनी के अधिकारी उन्हें उनका पासपोर्ट तथा अन्य जरूरी कागजात उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं। इसकी एवज में पहले तो कंपनी के अधिकारियों ने उनसे 600 डॉलर की मांग की थी, इसके बाद 700 और अब 900 डॉलर की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि कंपनी ने पिछले तीन माह से युवकों को उनकी तनख्वाह भी नहीं दी है। इस कारणअब परिजनों के सामने बच्चों को वापस बुलाने के लिए पैसे इकट्ठे करने का संकट भी खड़ा हो गया है। युवकों के परिजनों ने बताया कि वे पहले ही लाखों रुपये का कर्जा लेकर बेटों को ईराक भेजने पर खर्च कर चुके है और अब वे पैसे का इंतजाम कैसे करें।