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अवैध कॉलोनियां होंगी नियमित
अमर उजाला ब्यूरो, यमुनानगर
Updated Mon, 27 Jul 2015 12:15 AM IST
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नगर निगम बनने के बाद भी विकास की बाट जोह रहे अनियमित कॉलोनियों के लोगों के लिए अच्छी खबर है। जल्द ही उनके यहां भी विकास कार्य हो सकेंगे। सरकार ने 50 प्रतिशत आबाद अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने के लिए रिपोर्ट मांगी है। नगर निगम को यह रिपोर्ट सर्वे के आधार पर तीन माह में भेजनी है।
17 जुलाई की हाउस मीटिंग में सर्वे के प्रस्ताव पर मंजूरी के बाद इस पर कागजी कार्रवाई शुरू हो गई है। बता दें कि नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी के अंतर्गत करीब सौ से अधिक कॉलोनियां अनियमित बताई जाती हैं। निगम बनने के दो साल बाद भी इनमें विकास के लिए पैसा नहीं लग पाया। क्योंकि वार्ड पार्षद चाहकर भी इन कॉलोनियों में विकास कार्य नहीं करवा पा रहे हैं।
इस मुद्दे को दिसंबर व मार्च में हुई हाउस मीटिंग में रखा गया और सर्वसम्मति से अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने के लिए सर्वे का प्रस्ताव सरकार के विचारार्थ भेजा गया। हाल ही में 17 जुलाई को हुई हाउस मीटिंग में सरकार की ओर से सर्वे के लिए मंजूरी देकर शीघ्र इसकी रिपोर्ट भेजने के प्रस्ताव पर पार्षदों ने सहमति जताई। इसके बाद नगर निगम ने कागजी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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टैक्स देने के बावजूद नहीं लगा रहा विकास पर पैसा
अनियमित कॉलोनियों की लिस्ट में शामिल अधिकतर कॉलोनियां ऐसी हैं, जिनमें वर्षों से लाखों बाशिंदों बसे हैं। इनके पास मकान की रजिस्ट्री के अलावा बिजली-पानी-सीवरेज के कनेक्शन भी हैं। यहां तक की लोगों से प्रॉपर्टी टैक्स भी वसूल किया जा रहा है। बावजूद इसके कॉलोनियों को अवैध मानकर निगम यहां विकास के नाम पर कोई पैसा नहीं खर्च कर रहा है। कई कॉलोनियों में निवासी एक-दो दशक से बसें हैं, जो विकास कार्य न होने से सरकार और जनप्रतिनिधियों को कोस रहे हैं। क्योंकि वर्षों बाद भी इन कॉलोनियों में लोगों की सड़क, पेयजल, निकासी, स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पाई हैं।
अमरपुरी के सुनील कुमार, सतबीर, चर्णजीत, शिवपुरी-बी के राजेंद्र कुमार, जिला सिंह, कांसापुर रोड के रमेश भारद्वाज, सुरेश सैनी का कहना है कि उनके साथ दोहरा व्यवहार हो रहा है। जब विकास कार्य कराने की बात आती है तो निगम अधिकारी कॉलोनी को अवैध बताकर हाथ खड़े कर देते हैं, किंतु टैक्स वसूलने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती है।
सबसे ज्यादा मेयर के वार्ड में अनियमित कॉलोनियां
नगर निगम यमुनानगर/जगाधरी में कुल 20 वार्ड हैं। सभी वार्डों में सौ से अधिक कॉलोनियां अनियमित हैं, इनमें सबसे ज्यादा मेयर सरोज बाला के वार्ड में हैं। मेयर के वार्ड नंबर-20 में दो दर्जन कॉलोनियां अनियमित हैं, इनमें बूटर विहार, अशोक विहार, एकता विहार, गोविंद विहार, शिवपुरी-ए, शिवपुरी-बी, रामनगर, आर्यनगर, शिवदयालपुरी, आशानगर, मायापुरी, बैंक कॉलोनी शामिल है। इनके सहित अन्य 19 वार्डों में भी करीब सौ कॉलोनियां अनियमित हैं।
सर्वे के लिए होगा गूगल व हरसेक का प्रयोग
सरकार की ओर से 31 मार्च, 2015 को आधार मानकर शेष अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने के लिए सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। इसमें 50 प्रतिशत आबाद हो चुकी कॉलोनियों को नियमित किया जाना है, जिनका सर्वे करने के उपरांत तीन माह के अंदर रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी। इसके लिए निगम गूगल/हरसेक का प्रयोग करेगा। सर्वे के लिए जिला राजस्व अधिकारी, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी के साथ नगर निगम व अन्य विभागों के कार्यकारी अभियंताओं को शामिल कर टीम गठित की जाएगी। सभी पार्षदों से उनके वार्ड में लगने वाली अनियमित कॉलोनियों की लिस्ट मांग ली गई है। जबकि सर्वे भी संबंधित वार्ड पार्षद की मौजूदगी में ही होगा।
हाउस मीटिंग में जो प्रस्ताव पास हुए हैं, उन पर जरूर काम होगा। इसमें अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने के लिए सर्वे का प्रस्ताव भी शामिल है। पार्षदों की इस प्रस्ताव पर सहमति के बारे में सरकार को प्रोसिडिंग भेज दी गई है। जैसे ही दिशा-निर्देश मिलेंगे कार्रवाई करेंगे।
डॉ. अरविंद बालियान, ईओ, नगर निगम।
निगम बनने के दो साल बाद भी पार्षद कॉलोनियों के अनियमित होने के कारण चाहकर भी वहां विकास नहीं करवा पा रहे हैं। दिसंबर व मार्च की हाउस मीटिंग में कॉलोनियों को नियमित करने के लिए सर्वे का प्रस्ताव सर्वसम्मति से सरकार के पास भेजा था। इस पर सरकार ने मंजूरी देते हुए तीन माह में सर्वे रिपोर्ट मांगी है। अनियमित कॉलोनियों को नियमित किए जाने से वहां भी विकास कार्यों पर पैसा लग सकेगा।
सरोज बाला, मेयर, नगर निगम।
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17 जुलाई की हाउस मीटिंग में सर्वे के प्रस्ताव पर मंजूरी के बाद इस पर कागजी कार्रवाई शुरू हो गई है। बता दें कि नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी के अंतर्गत करीब सौ से अधिक कॉलोनियां अनियमित बताई जाती हैं। निगम बनने के दो साल बाद भी इनमें विकास के लिए पैसा नहीं लग पाया। क्योंकि वार्ड पार्षद चाहकर भी इन कॉलोनियों में विकास कार्य नहीं करवा पा रहे हैं।
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इस मुद्दे को दिसंबर व मार्च में हुई हाउस मीटिंग में रखा गया और सर्वसम्मति से अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने के लिए सर्वे का प्रस्ताव सरकार के विचारार्थ भेजा गया। हाल ही में 17 जुलाई को हुई हाउस मीटिंग में सरकार की ओर से सर्वे के लिए मंजूरी देकर शीघ्र इसकी रिपोर्ट भेजने के प्रस्ताव पर पार्षदों ने सहमति जताई। इसके बाद नगर निगम ने कागजी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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टैक्स देने के बावजूद नहीं लगा रहा विकास पर पैसा
अनियमित कॉलोनियों की लिस्ट में शामिल अधिकतर कॉलोनियां ऐसी हैं, जिनमें वर्षों से लाखों बाशिंदों बसे हैं। इनके पास मकान की रजिस्ट्री के अलावा बिजली-पानी-सीवरेज के कनेक्शन भी हैं। यहां तक की लोगों से प्रॉपर्टी टैक्स भी वसूल किया जा रहा है। बावजूद इसके कॉलोनियों को अवैध मानकर निगम यहां विकास के नाम पर कोई पैसा नहीं खर्च कर रहा है। कई कॉलोनियों में निवासी एक-दो दशक से बसें हैं, जो विकास कार्य न होने से सरकार और जनप्रतिनिधियों को कोस रहे हैं। क्योंकि वर्षों बाद भी इन कॉलोनियों में लोगों की सड़क, पेयजल, निकासी, स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पाई हैं।
अमरपुरी के सुनील कुमार, सतबीर, चर्णजीत, शिवपुरी-बी के राजेंद्र कुमार, जिला सिंह, कांसापुर रोड के रमेश भारद्वाज, सुरेश सैनी का कहना है कि उनके साथ दोहरा व्यवहार हो रहा है। जब विकास कार्य कराने की बात आती है तो निगम अधिकारी कॉलोनी को अवैध बताकर हाथ खड़े कर देते हैं, किंतु टैक्स वसूलने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती है।
सबसे ज्यादा मेयर के वार्ड में अनियमित कॉलोनियां
नगर निगम यमुनानगर/जगाधरी में कुल 20 वार्ड हैं। सभी वार्डों में सौ से अधिक कॉलोनियां अनियमित हैं, इनमें सबसे ज्यादा मेयर सरोज बाला के वार्ड में हैं। मेयर के वार्ड नंबर-20 में दो दर्जन कॉलोनियां अनियमित हैं, इनमें बूटर विहार, अशोक विहार, एकता विहार, गोविंद विहार, शिवपुरी-ए, शिवपुरी-बी, रामनगर, आर्यनगर, शिवदयालपुरी, आशानगर, मायापुरी, बैंक कॉलोनी शामिल है। इनके सहित अन्य 19 वार्डों में भी करीब सौ कॉलोनियां अनियमित हैं।
सर्वे के लिए होगा गूगल व हरसेक का प्रयोग
सरकार की ओर से 31 मार्च, 2015 को आधार मानकर शेष अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने के लिए सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। इसमें 50 प्रतिशत आबाद हो चुकी कॉलोनियों को नियमित किया जाना है, जिनका सर्वे करने के उपरांत तीन माह के अंदर रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी। इसके लिए निगम गूगल/हरसेक का प्रयोग करेगा। सर्वे के लिए जिला राजस्व अधिकारी, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी के साथ नगर निगम व अन्य विभागों के कार्यकारी अभियंताओं को शामिल कर टीम गठित की जाएगी। सभी पार्षदों से उनके वार्ड में लगने वाली अनियमित कॉलोनियों की लिस्ट मांग ली गई है। जबकि सर्वे भी संबंधित वार्ड पार्षद की मौजूदगी में ही होगा।
हाउस मीटिंग में जो प्रस्ताव पास हुए हैं, उन पर जरूर काम होगा। इसमें अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने के लिए सर्वे का प्रस्ताव भी शामिल है। पार्षदों की इस प्रस्ताव पर सहमति के बारे में सरकार को प्रोसिडिंग भेज दी गई है। जैसे ही दिशा-निर्देश मिलेंगे कार्रवाई करेंगे।
डॉ. अरविंद बालियान, ईओ, नगर निगम।
निगम बनने के दो साल बाद भी पार्षद कॉलोनियों के अनियमित होने के कारण चाहकर भी वहां विकास नहीं करवा पा रहे हैं। दिसंबर व मार्च की हाउस मीटिंग में कॉलोनियों को नियमित करने के लिए सर्वे का प्रस्ताव सर्वसम्मति से सरकार के पास भेजा था। इस पर सरकार ने मंजूरी देते हुए तीन माह में सर्वे रिपोर्ट मांगी है। अनियमित कॉलोनियों को नियमित किए जाने से वहां भी विकास कार्यों पर पैसा लग सकेगा।
सरोज बाला, मेयर, नगर निगम।