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सर्वे तक साफ शहर, अब दिख रहा गंदगी का ढेर
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स्वच्छता सर्वे के लिए केंद्रीय टीमों के शहर में आने से शहर की तस्वीर साफ-सुथरी होने लगी थी, लेकिन टीम के जाते ही मौजूदा समय में गंदगी का ढेर लग गया है। पॉश एरिया से बाजारों व रिहायशी कॉलोनियों की सड़कों व गलियों किनारे कचरे के ढेर लगे हुए हैं। ठेके पर चला डोर टू डोर कचरा उठान का काम नगर निगम के जिम्मे आते ही लड़खड़ा गया है। हालात बता रहे हैं कि शहर में सभी चरण के सर्वे कर टीमें लौट गई हैं।
अप्रैल के पहले सप्ताह में केंद्रीय टीम सर्वे के लिए आई थी और उसके जाने के बाद लगभग एक पखवारा से शहर में कचरे का ढेर लग गया है। शहर में 272 मिट्रिक टन कचरा प्रतिदिन निकलता है। इसके निस्तारण के लिए 746 कर्मचारी लगाए गए हैं। सफाई व्यवस्था के पटरी से उतरने में पार्षद नगर निगम अफसरों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। कांग्रेस से वार्ड-3 से पार्षद हरमीन कोहली, 4 से देवेंर सिंह, 5 से विनय कांबोज, 13 से निर्मल चौहान व इनेलो से वार्ड-8 के पार्षद विनोद मरहवा ने कहा कि सफाई के मौजूदा हालात की वजह डोर टू डोर कचरा उठान से निस्तारण के टेंडर करने में नगर निगम अफसरों की लेटलतीफी रही।
कचरा उठान के नए टेंडर करने के लिए अफसर पुराने टेंडर के खत्म होने के इंतजार में रहे, जिसमें पुराने टेंडर की अवधि खत्म होने से नए टेंडर की प्रक्रिया लटक गई है। हालांकि जोन-2 (वार्ड-12 से 22) में कचरा उठान के ठेके का काम बंद होने पर आनन-फानन में अफसर 13 मार्च को सभी 22 वार्ड का सिंगल टेंडर लगा चुके थे। बीती सदन की बैठक में सिंगल टेंडर रद्द कर मेयर के प्रस्ताव पर छोटे टेंडर लगेंगे। लेकिन तब तक जोन-1 (वार्ड-1 से 11) में भी ठेके पर चल रहा कचरा उठान का काम भी बंद हो जाएगा। ऐसे में दोनों जोन में कचरा उठान की व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती है, इसका कारण निगम के पास स्टाफ व संसाधन कम हैं।
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वर्ष रैंक
2017 346
2018 310
2019 218
2020 147
2021 243
22 वार्डों पर 1700 की डिमांड में से नगर निगम के पास 746 सफाई कर्मी (532 कच्चे व 214 पक्के) ही हैं। इसके अलावा फंड से लेकर संसाधन भी कम हैं। कचरा उठान के कई टिपर खराब पड़े हैं और चालू टिपर भी कभी भी बीच में जवाब दे जाते हैं। डंपिंग साइट पर कचरे के निस्तारण की व्यवस्था भी नहीं है।
शहर में कचरा उठान से लेकर सफाई व्यवस्था बनाने के लिए प्रयासरत हैं। इसके लिए अलग-अलग शिफ्ट में सफाई कर्मचारी ड्यूटी पर लगाए गए हैं।
-सुरेंद्र चोपड़ा, सीएसआई, नगर निगम।
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अप्रैल के पहले सप्ताह में केंद्रीय टीम सर्वे के लिए आई थी और उसके जाने के बाद लगभग एक पखवारा से शहर में कचरे का ढेर लग गया है। शहर में 272 मिट्रिक टन कचरा प्रतिदिन निकलता है। इसके निस्तारण के लिए 746 कर्मचारी लगाए गए हैं। सफाई व्यवस्था के पटरी से उतरने में पार्षद नगर निगम अफसरों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। कांग्रेस से वार्ड-3 से पार्षद हरमीन कोहली, 4 से देवेंर सिंह, 5 से विनय कांबोज, 13 से निर्मल चौहान व इनेलो से वार्ड-8 के पार्षद विनोद मरहवा ने कहा कि सफाई के मौजूदा हालात की वजह डोर टू डोर कचरा उठान से निस्तारण के टेंडर करने में नगर निगम अफसरों की लेटलतीफी रही।
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कचरा उठान के नए टेंडर करने के लिए अफसर पुराने टेंडर के खत्म होने के इंतजार में रहे, जिसमें पुराने टेंडर की अवधि खत्म होने से नए टेंडर की प्रक्रिया लटक गई है। हालांकि जोन-2 (वार्ड-12 से 22) में कचरा उठान के ठेके का काम बंद होने पर आनन-फानन में अफसर 13 मार्च को सभी 22 वार्ड का सिंगल टेंडर लगा चुके थे। बीती सदन की बैठक में सिंगल टेंडर रद्द कर मेयर के प्रस्ताव पर छोटे टेंडर लगेंगे। लेकिन तब तक जोन-1 (वार्ड-1 से 11) में भी ठेके पर चल रहा कचरा उठान का काम भी बंद हो जाएगा। ऐसे में दोनों जोन में कचरा उठान की व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती है, इसका कारण निगम के पास स्टाफ व संसाधन कम हैं।
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2017 346
2018 310
2019 218
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22 वार्डों पर 1700 की डिमांड में से नगर निगम के पास 746 सफाई कर्मी (532 कच्चे व 214 पक्के) ही हैं। इसके अलावा फंड से लेकर संसाधन भी कम हैं। कचरा उठान के कई टिपर खराब पड़े हैं और चालू टिपर भी कभी भी बीच में जवाब दे जाते हैं। डंपिंग साइट पर कचरे के निस्तारण की व्यवस्था भी नहीं है।
शहर में कचरा उठान से लेकर सफाई व्यवस्था बनाने के लिए प्रयासरत हैं। इसके लिए अलग-अलग शिफ्ट में सफाई कर्मचारी ड्यूटी पर लगाए गए हैं।
-सुरेंद्र चोपड़ा, सीएसआई, नगर निगम।