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नगर निगम भवन के लिए जमीन का विवाद सुलझाने का दावा निकला झूठा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 27 Feb 2022 01:11 AM IST
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Claim of settlement of land dispute for Municipal Corporation building turned out to be false
यमुनानगर। शहर में नगर निगम के भवन के लिए शहर में जमीन नहीं मिल पा रही है। वह भी तब जब अधिकारी साढ़े तीन साल पहले मुख्यमंत्री के हाथों नए भवन का शिलान्यास करवा चुके हैं। शायद यह निगम की पहली ऐसी परियोजना है जिसका शिलान्यास से लेकर टेंडर होने के बाद वर्क ऑर्डर तक सब हो चुके हैं, परंतु जहां भवन बनना है वहां उसके लिए जमीन नहीं है। जब जमीन तलाशने में ही इतना समय बीत गया तो भवन बनने में कितना समय लगेगा। यह एक अहम सवाल बना हुआ है।
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जमीन न मिलने के कारण ठेकेदार भी भवन बनाने का काम शुरू नहीं कर पा रहा। नगर निगम के नए भवन के लिए अधिकारियों ने पंचायत भवन के पीछे खाली पड़ी चार एकड़ जमीन देखी थी। साल 2018 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने निगम कार्यालय का भवन बनाने की घोषणा की थी। मार्च 2018 में 28.28 करोड़ का पहला टेंडर लगाया गया था। एक सितंबर 2018 को मुख्यमंत्री ने इसका शिलान्यास भी कर दिया था। शिलान्यास के बाद पता चला कि जिस जगह का चयन किया गया है वह जमीन तालाब की है। इसके विरोध में गोबिंदपुरा गांव के लोगों ने कोर्ट में याचिका लगाते हुए तालाब की जमीन पर भवन बनाने का विरोध किया। यह मामला फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है। जिस पर मार्च में अगली सुनवाई होनी है।
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विवाद सुलझाने का दावा निकला झूठा
दिसंबर माह में मेयर मदन चौहान ने निगम के अधिकारियों के साथ पंचायत भवन के पीछे चयनित जमीन का निरीक्षण किया तब उन्होंने कहा था कि जो लोग इस मामले को कोर्ट में लेकर गए थे उनसे बातचीत कर विवाद को सुलझा लिया गया है। जल्द ही इसी जमीन पर नया भवन बनाया जाएगा। उन्होंने टेंडर लेने वाले एजेंसी को जल्द से जल्द भवन का काम शुरू करने को कहा था। परंतु विवाद को सुलझाने के सारे दावे हवा हवाई निकले। मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। ठेकेदार काम इसलिए शुरू नहीं कर रहा क्योंकि उसे डर है कि लोग कोर्ट से स्टे न ले आएं। ऐसे में उसका सारा काम बीच में रुक जाएगा। जो काम किया होगा उसकी भी पेमेंट अधर में लटक जाएगी।
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तीन जगहों पर चल रहा निगम कार्यालय
नगर निगम के अधिकारियों को जिला परिषद से सबक लेना चाहिए। क्योंकि एक साल के भीतर जिला परिषद ने जगाधरी में मिल्ट्री ग्राउंड के पास आलीशान कार्यालय बना कर इसमें काम भी शुरू कर दिया। जबकि 2010 में नगर निगम बन जाने के बाद भी अधिकारी अपना भवन नहीं बना पाए। इसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। क्योंकि जगह के अभाव में निगम कार्यालय एक या दो नहीं बल्कि तीन जगहों पर चल रहा है। निगम का मुख्य कार्यालय यमुनानगर में स्टेशन रोड पर, दूसरा जगाधरी में है। निगम का तीसरा कार्यालय कन्हैया साहिब चौक के पास खोल दिया गया है। जिसमें इंजीनियरिंग ब्रांच के अधिकारी व स्टॉफ बैठते हैं। लोगों को अपने काम के लिए तीनों कार्यालयों में भटकना पड़ता है।
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मामला अभी कोर्ट में है: मदन चौहान
नगर निगम के मेयर मदन चौहान ने बताया कि पंचायत भवन के पीछे चयनित जमीन पर भवन बनाने का काम शुरू नहीं हो सका है। यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है।
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