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Yamuna Nagar News: दवा घोटाले में सिविल सर्जन, नोडल अधिकारी को मिली राहत
Tue, 08 Jul 2025 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 08 Jul 2025 12:24 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह व टीबी मुक्त अभियान के नोडल ऑफिसर डॉ. अनूप गोयल डीजी हेल्थ कार्यालय से बड़ी राहत मिली है। दोनों पर मरीजों के लिए खरीदी गई टीबी की दवा में 18 लाख रुपये के घोटाले का आरोप था। डीजी कार्यालय से यह कह कर जांच नहीं कराई गई यह पहले दी गई शिकायत की ही नकल है। मामले की विजिलेंस से जांच कराई जा रही है।
बलविंद्र सिंह टीबी दवा घोटाले को लेकर अब तक तीन शिकायतें सीएम विंडो पर दे चुके हैं। जिनमें से दो को बंद कर दिया गया है। एक शिकायत की स्वास्थ्य विभाग की ओर से विजिलेंस से जांच करवाई जा रही है। विजिलेंस की जांच अभी शुरू ही हुई है, जिसे पूरा होने में अभी कई माह का समय लग सकता है। दूसरी शिकायत की जांच कराने के लिए सिविल सर्जन ने तीन डिप्टी सिविल सर्जन की कमेटी बनाकर जांच कराई थी।
शिकायतकर्ता ने तब भी सवाल उठाया था कि कोई अधिकारी अपने खिलाफ जूनियर से जांच कैसे करवा सकता है। वहीं तीन में से केवल दो डॉक्टरों डॉ. दिव्या मंगला व डाॅ. संजय राठी ने ही जांच में हिस्सा लिया था। डॉ. सुशीला सैनी जांच शुरू होने से पहले ही एक सप्ताह की छुट्टी पर चली गई थी। डॉ. सुशीला पर सीएम विंडो की एटीआर पर हस्ताक्षर कराने का दबाव भी बनाया गया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया।
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इसके बाद सिविल सर्जन ने डॉ. सुशीला से कई कार्यों के चार्ज वापस ले लिए थे। वहीं गत सप्ताह स्टेट टीबी ऑफिसर भी सिविल सर्जन कार्यालय में पहुंचे थे। माना जा रहा है कि वह भी दवा घोटाले से जुड़े मामले में ही आए थे।
वह काफी देर तक सिविल सर्जन कार्यालय में रहे। उल्लेखनीय है कि बलविंद्र सिंह ने डॉ. मंजीत सिंह व डॉ. अनूप गोयल पर टीबी मरीजों के लिए खरीदी गई दवा में 18 लाख रुपये का घोटाला करने के आरोप लगाए थे।
मुझे जांच में शामिल नहीं किया : बलविंद्र सिंह
शिकायतकर्ता बलविंद्र सिंह ने सीएम विंडो की शिकायत को बंद करने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। जांच में उसे शामिल नहीं किया गया। जब घोटाले का आरोप है तो डॉ. मंजीत सिंह को यमुनानगर के सिविल सर्जन को करनाल का अतिरिक्त कार्यभार क्यों सौंप रखा है। उन्हें करनाल में उनके मूल पद पर भेजा जाना चाहिए।
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यमुनानगर। सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह व टीबी मुक्त अभियान के नोडल ऑफिसर डॉ. अनूप गोयल डीजी हेल्थ कार्यालय से बड़ी राहत मिली है। दोनों पर मरीजों के लिए खरीदी गई टीबी की दवा में 18 लाख रुपये के घोटाले का आरोप था। डीजी कार्यालय से यह कह कर जांच नहीं कराई गई यह पहले दी गई शिकायत की ही नकल है। मामले की विजिलेंस से जांच कराई जा रही है।
बलविंद्र सिंह टीबी दवा घोटाले को लेकर अब तक तीन शिकायतें सीएम विंडो पर दे चुके हैं। जिनमें से दो को बंद कर दिया गया है। एक शिकायत की स्वास्थ्य विभाग की ओर से विजिलेंस से जांच करवाई जा रही है। विजिलेंस की जांच अभी शुरू ही हुई है, जिसे पूरा होने में अभी कई माह का समय लग सकता है। दूसरी शिकायत की जांच कराने के लिए सिविल सर्जन ने तीन डिप्टी सिविल सर्जन की कमेटी बनाकर जांच कराई थी।
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शिकायतकर्ता ने तब भी सवाल उठाया था कि कोई अधिकारी अपने खिलाफ जूनियर से जांच कैसे करवा सकता है। वहीं तीन में से केवल दो डॉक्टरों डॉ. दिव्या मंगला व डाॅ. संजय राठी ने ही जांच में हिस्सा लिया था। डॉ. सुशीला सैनी जांच शुरू होने से पहले ही एक सप्ताह की छुट्टी पर चली गई थी। डॉ. सुशीला पर सीएम विंडो की एटीआर पर हस्ताक्षर कराने का दबाव भी बनाया गया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया।
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इसके बाद सिविल सर्जन ने डॉ. सुशीला से कई कार्यों के चार्ज वापस ले लिए थे। वहीं गत सप्ताह स्टेट टीबी ऑफिसर भी सिविल सर्जन कार्यालय में पहुंचे थे। माना जा रहा है कि वह भी दवा घोटाले से जुड़े मामले में ही आए थे।
वह काफी देर तक सिविल सर्जन कार्यालय में रहे। उल्लेखनीय है कि बलविंद्र सिंह ने डॉ. मंजीत सिंह व डॉ. अनूप गोयल पर टीबी मरीजों के लिए खरीदी गई दवा में 18 लाख रुपये का घोटाला करने के आरोप लगाए थे।
मुझे जांच में शामिल नहीं किया : बलविंद्र सिंह
शिकायतकर्ता बलविंद्र सिंह ने सीएम विंडो की शिकायत को बंद करने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। जांच में उसे शामिल नहीं किया गया। जब घोटाले का आरोप है तो डॉ. मंजीत सिंह को यमुनानगर के सिविल सर्जन को करनाल का अतिरिक्त कार्यभार क्यों सौंप रखा है। उन्हें करनाल में उनके मूल पद पर भेजा जाना चाहिए।