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मजबूरी है...बॉर्डर पर पुलिस तैनात तो खेतों के रास्ते तपती सड़क पर नंगे पांव निकले प्रवासी मजदूर
Thu, 21 May 2020 02:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला, यमुनानगर
अमर उजाला, यमुनानगर
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 May 2020 02:38 PM IST
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बिहार जाने के लिए लुधियाना से चले मजदूर
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प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद प्रवासी रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। जो प्रशासन व पुलिस से बचने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। प्रवासियों ने बार्डर पार करने के लिए अब खेतों का रास्ता चुना है। चूंकि बार्डर व हाईवे पर पुलिस तैनात है। जो प्रवासियों को रोक कर शेल्टर होम पहुंचा रही है। हालांकि प्रवासियों को शैल्टर होम से बस व रेल मार्ग से घर भेजा जा रहा है। लेकिन इस प्रक्रिया में काफी वक्त लग रहा है। जिस कारण प्रवासी रूक नहीं रहे हैं।
प्रवासियों का कहना है कि यदि वे शेल्टर होम में रुकते हैं, तो उन्हें पहले पंजीकरण की लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा। शेल्टर होम में पंजीकरण के साथ करीब तीन दिन लग रहे हैं। वहीं प्रवासियों ने पहले ऑनलाइन पंजीकरण करवाया था। लेकिन 15-15 दिन बाद भी उनका नंबर नहीं पड़ा। जिसके बाद उन्होंने पैदल ही घर जाना स्वीकार किया। यही कारण है कि वे अब शेल्टर होम न जाकर पैदल ही घर जाना चाहते हैं। काफी संख्या में प्रवासी नंगे पांव तपती सड़क से निकल रहे हैं। कई संस्थाओं ने उनके लिए चप्पल और जूते उपलब्ध भी करवाएं हैं।
बिहार के सासाराम जिला निवासी अब्दुल, करीम, जरीफ, याकूब ने बताया कि 15 दिन पहले उन्होंने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाया था। रोज वे नंबर पड़ने का इंतजार करते थे, लेकिन उनका नंबर नहीं आया। बात करने पर पता चला कि रजिस्ट्रेशन कैंसिल हो गया है। इस दौरान उनके पास न तो खाने के लिए कुछ बचा और न रहने के लिए किराया दे पा रहे थे। उन्होंने बताया कि तीन दिन उन्होंने एक वक्त का खाना खाकर बिताया। मालिक व सरकार से सहायता की आस खत्म हो गई। जिसके बाद वे पैदल ही निकल गए।
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प्रवासियों का कहना है कि यदि वे शेल्टर होम में रुकते हैं, तो उन्हें पहले पंजीकरण की लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा। शेल्टर होम में पंजीकरण के साथ करीब तीन दिन लग रहे हैं। वहीं प्रवासियों ने पहले ऑनलाइन पंजीकरण करवाया था। लेकिन 15-15 दिन बाद भी उनका नंबर नहीं पड़ा। जिसके बाद उन्होंने पैदल ही घर जाना स्वीकार किया। यही कारण है कि वे अब शेल्टर होम न जाकर पैदल ही घर जाना चाहते हैं। काफी संख्या में प्रवासी नंगे पांव तपती सड़क से निकल रहे हैं। कई संस्थाओं ने उनके लिए चप्पल और जूते उपलब्ध भी करवाएं हैं।
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बिहार के सासाराम जिला निवासी अब्दुल, करीम, जरीफ, याकूब ने बताया कि 15 दिन पहले उन्होंने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाया था। रोज वे नंबर पड़ने का इंतजार करते थे, लेकिन उनका नंबर नहीं आया। बात करने पर पता चला कि रजिस्ट्रेशन कैंसिल हो गया है। इस दौरान उनके पास न तो खाने के लिए कुछ बचा और न रहने के लिए किराया दे पा रहे थे। उन्होंने बताया कि तीन दिन उन्होंने एक वक्त का खाना खाकर बिताया। मालिक व सरकार से सहायता की आस खत्म हो गई। जिसके बाद वे पैदल ही निकल गए।
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हम से झूठ बोला कि रेल से भेजेंगे घर
बिलासपुर प्रशासन की ओर से करीब 642 बिहारी प्रवासियों को 13 बसों में भरकर बिलासपुर प्रशासन के हवाले कर दिया। बिलासपुर प्रशासन ने मॉडल स्कूल, राजकीय स्कूल, खेड़ा मंदिर हॉल व महार्षि वेद व्यास भवन में इनके ठहरने की व्यवस्था की। एसडीएम नवीन आहुजा, तहसीलदार तरूण सहोता, बीडीपीओ बलराम, एसएचओ रवि खुंडिया, मार्केट कमेटी चेयरमेन विपिन सिंगला व सरपंच चंद्रमोहन कटारिया ने चारों स्थानों का दौरा कर वहां पर ठहरे प्रवासियों प्रवासियों का हाल जाना।
एसडीएम आहुजा ने कहा कि यह प्रवासी कोरोना महामारी के चलते पंजाब व अन्य राज्यों से पैदल अपने घरों को निकल पड़े थे। यूपी बार्डर से प्रशासन ने इन्हें वापिस कर दिया था। छह दिन मानकपुर लक्कड़ मंडी में ठहराने के बाद वहां पर ज्यादा भीड़ को देखते हुए इन्हें बिलासपुर व साढौरा भेज दिया। प्रशासन व सरकार की तरफ से जब तक इनके जाने के लिए बस या ट्रेन की व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक से यहीं रहेंगे। तहसीलदार तरूण सहोता ने बताया कि राधा स्वामी सत्संग घर बिलासपुर व श्राइन बोर्ड के द्वारा इनके लिए खाने की व्यवस्था की गई है।
कस्बा की हर आंगन खुशियां संस्था, महार्षि वेद व्यास समिति, खेड़ा मंदिर कमेटी, श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति सहित कस्बे के अन्य समाज सेवी संस्थाएं भोजन वितरण भोजन बनाने व अन्य सेवा कार्यों में सहयोग कर रही हैं। ग्राम पंचायत बिलासपुर की तरफ से सुबह शाम चाय बिस्किट की सेवा की जा रही है। वहीं पंचायत अधिकारी राजेश, सचिव बलकार, विजयंत, भूपेन्द्र, सुरेन्द्र, प्रीतम पटवारी संजय की ड्यूटी भी प्रवासियों की देखरेख के लिए लगाई गई है।
एसडीएम आहुजा ने कहा कि यह प्रवासी कोरोना महामारी के चलते पंजाब व अन्य राज्यों से पैदल अपने घरों को निकल पड़े थे। यूपी बार्डर से प्रशासन ने इन्हें वापिस कर दिया था। छह दिन मानकपुर लक्कड़ मंडी में ठहराने के बाद वहां पर ज्यादा भीड़ को देखते हुए इन्हें बिलासपुर व साढौरा भेज दिया। प्रशासन व सरकार की तरफ से जब तक इनके जाने के लिए बस या ट्रेन की व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक से यहीं रहेंगे। तहसीलदार तरूण सहोता ने बताया कि राधा स्वामी सत्संग घर बिलासपुर व श्राइन बोर्ड के द्वारा इनके लिए खाने की व्यवस्था की गई है।
कस्बा की हर आंगन खुशियां संस्था, महार्षि वेद व्यास समिति, खेड़ा मंदिर कमेटी, श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति सहित कस्बे के अन्य समाज सेवी संस्थाएं भोजन वितरण भोजन बनाने व अन्य सेवा कार्यों में सहयोग कर रही हैं। ग्राम पंचायत बिलासपुर की तरफ से सुबह शाम चाय बिस्किट की सेवा की जा रही है। वहीं पंचायत अधिकारी राजेश, सचिव बलकार, विजयंत, भूपेन्द्र, सुरेन्द्र, प्रीतम पटवारी संजय की ड्यूटी भी प्रवासियों की देखरेख के लिए लगाई गई है।