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लाखों रुपये खर्च के बाद भी लग रहा जाम
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महाराणा प्रताप चौक से रेलवे बाईपास तक लगने वाले जाम से लोगों को अब तक निजात नहीं मिल सकी। पीडब्ल्यूूडी ने करीब 800 मीटर लंबी सड़क पर लाखों रुपये खर्च भी किए। अधिकारियों ने जाम से निजात दिलाने के लिए कौन सी इंजीनियरिंग अपनाई यह आज तक कोई नहीं जान पाया। यहां तक की यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा इसे नहीं समझ सके। वह कई बार सड़क सुरक्षा की बैठक में मुद्दा उठा चुके हैं। सर्दी हो या गर्मी इस छोटे से एरिया को पार करने में ही वाहन चालकों के पसीने छूट जाते हैं।
चौक से बाईपास के बीच सिंगल रोड है। इस सड़क पर हर समय जाम रहता है। जाम से निजात दिलाने के लिए शहरवासी तत्कालीन डीसी गिरीश अरोड़ा व पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से मिले थे। लोगों को जाम से निजात दिलवानी तो दूर, उल्टा लोगों की परेशानी को अब पहले से कई गुणा ज्यादा बढ़ा दिया। इसका समाधान यह था कि सड़क को वहां से चौड़ा कर दिया जाए या फिर क्रॉसिंग के लिए अंडरपास बना दिया जाए। जगह कम होने का हवाला देकर अंडरपास के लिए सहमती नहीं बन पाई। सड़क को चौड़ा तो न किया गया, बल्कि जो पहले से सिंगल रोड थी उसके दोनों तरफ पानी निकासी के लिए नाला बनाकर उस पर लोहे की ग्रिल लगवा दी।
पार्षद विनोद मरवाह व निर्मल चौहान का कहना है कि पीडब्ल्यूडी ने सड़क के दोनों तरफ जो नाला बनाया उसके ऊपर रखी सीमेंट की स्लैब भी टूट चुकी है। आज तक इसकी सफाई नहीं कराई। जिसमें कूड़ा भरा हुआ है। दूसरा लोहे की ग्रिल भी कई बार टूट चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि लोग जानबूझ कर ग्रिल तोड़ते हैं। दोनों तरफ दो फीट ऊंचा नाला बनने से लोग न दाएं जा पाते हैं और न बाएं। वाहनों की संख्या ज्यादा है और सड़क की चौड़ाई पहले से भी कम हो गई। इसलिए यहां हर समय जाम लगा रहता है।
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दरअसल सड़क पर जहां से रेलवे बाईपास शुरू होता है वहां से एक रास्ता चांदपुर व दूसरा इंडस्ट्रियल एरिया में जाता है। इंडस्ट्रियल एरिया में ही सब्जी मंडी है। इसके अलावा शार्टकट के लिए भी ज्यादातर लोग इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। चांदपुर से इंडस्ट्रियल एरिया जाने के लिए लोगों को अपनी जान जोखिम में डाल कर वाहन से व पैदल सड़क पार करते थे। अधिकारियों का मानना था कि ग्रिल लगने से सड़क पार करने से रुक जाएंगे। परंतु पैदल निकलने वालों ने ग्रिल तोड़ कर रास्ता बना लिया। नाले के दोनों तरफ बनाई गई सड़क किसी काम नहीं आई।
पीडब्ल्यूडी के एसडीओ विनोद शर्मा का कहना है कि सड़क के साथ लगाई गई ग्रिल को बार-बार तोड़ दिया जाता है। इसे कई बार वेल्डिंग कराया जा चुका है। लोगों को जाम से निजात दिलाने के लिए विकल्प तलाशा जा रहा है।
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चौक से बाईपास के बीच सिंगल रोड है। इस सड़क पर हर समय जाम रहता है। जाम से निजात दिलाने के लिए शहरवासी तत्कालीन डीसी गिरीश अरोड़ा व पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से मिले थे। लोगों को जाम से निजात दिलवानी तो दूर, उल्टा लोगों की परेशानी को अब पहले से कई गुणा ज्यादा बढ़ा दिया। इसका समाधान यह था कि सड़क को वहां से चौड़ा कर दिया जाए या फिर क्रॉसिंग के लिए अंडरपास बना दिया जाए। जगह कम होने का हवाला देकर अंडरपास के लिए सहमती नहीं बन पाई। सड़क को चौड़ा तो न किया गया, बल्कि जो पहले से सिंगल रोड थी उसके दोनों तरफ पानी निकासी के लिए नाला बनाकर उस पर लोहे की ग्रिल लगवा दी।
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पार्षद विनोद मरवाह व निर्मल चौहान का कहना है कि पीडब्ल्यूडी ने सड़क के दोनों तरफ जो नाला बनाया उसके ऊपर रखी सीमेंट की स्लैब भी टूट चुकी है। आज तक इसकी सफाई नहीं कराई। जिसमें कूड़ा भरा हुआ है। दूसरा लोहे की ग्रिल भी कई बार टूट चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि लोग जानबूझ कर ग्रिल तोड़ते हैं। दोनों तरफ दो फीट ऊंचा नाला बनने से लोग न दाएं जा पाते हैं और न बाएं। वाहनों की संख्या ज्यादा है और सड़क की चौड़ाई पहले से भी कम हो गई। इसलिए यहां हर समय जाम लगा रहता है।
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दरअसल सड़क पर जहां से रेलवे बाईपास शुरू होता है वहां से एक रास्ता चांदपुर व दूसरा इंडस्ट्रियल एरिया में जाता है। इंडस्ट्रियल एरिया में ही सब्जी मंडी है। इसके अलावा शार्टकट के लिए भी ज्यादातर लोग इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। चांदपुर से इंडस्ट्रियल एरिया जाने के लिए लोगों को अपनी जान जोखिम में डाल कर वाहन से व पैदल सड़क पार करते थे। अधिकारियों का मानना था कि ग्रिल लगने से सड़क पार करने से रुक जाएंगे। परंतु पैदल निकलने वालों ने ग्रिल तोड़ कर रास्ता बना लिया। नाले के दोनों तरफ बनाई गई सड़क किसी काम नहीं आई।
पीडब्ल्यूडी के एसडीओ विनोद शर्मा का कहना है कि सड़क के साथ लगाई गई ग्रिल को बार-बार तोड़ दिया जाता है। इसे कई बार वेल्डिंग कराया जा चुका है। लोगों को जाम से निजात दिलाने के लिए विकल्प तलाशा जा रहा है।