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Yamuna Nagar News: मंदिरों में गूंजे मां के जयकारे, आज स्कंदमाता की पूजा
Wed, 02 Apr 2025 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 02 Apr 2025 12:14 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। नवरात्र के तीसरे दिन चतुर्थी तिथि पर मंगलवार को मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कुष्माण्डा की पूजा की गई। इस दौरान तड़के मंदिर पहुंचकर श्रद्धालुओं ने महाशक्ति मां दुर्गा की प्रतिमा के सम्मुख ज्योति प्रज्ज्वलित की और शीश झुकाया। पूरा दिन मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा। देर शाम तक मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने को मिली। वहीं, नवरात्र के चौथे दिन पंचमी तिथि पर मां के पांचवें स्वरूप की पूजा का विधान है। इस दौरान मां दुर्गा के पंचम स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की जाएगी।
मंगलवार को सुबह से ही मंदिरों में भोर से ही भक्तों का तांता लगा रहा। भक्तों ने मंदिर पहुंच मां की प्रतिमा के सम्मुख शीश झुका और मनोकामनाएं मांगी। मां कुष्माण्डा के जयघोष से नगरी गूंज उठी। जगाधरी के देवीभवन मंदिर और रेलवे स्टेशन स्थित श्रीमूर्ति देवी मंदिर में भक्तों का पूरा दिन तांता लगा रहा। जबकि प्रात: व संध्या आरती के दौरान मंदिरों में भारी भीड़ देखने को मिली।
वहीं, लोगों ने घरों में भी मां की आराधना की। शहर सहित जिले के सभी मंदिरों में देर शाम तक भीड़ देखने को मिली। नवरात्र को लेकर भक्तों में भारी उत्साह है। जिसके चलते सभी मंदिरों में हर दम भीड़ दिखाई दे रही है। जबकि प्राचीन व पौराणिक मंदिरों में दर्शनों की हजूम उमड़ रहा है। नवरात्र के चलते मंदिरों में भव्य रूप से सजाया गया है। मंदिरों की रोजाना फूलों से सजावट की जा रही है। ऐसे में तड़के ही मंदिरों के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए जाते हैं। बुधवार को नवरात्र के चौथे दिन मां के पंचम स्वरूप की आराधना का विधान है।
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पंडित रमन वत्स ने बताया कि नवरात्र की पंचमी तिथि को मां दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा का विधान है। उन्होंने स्कंदमाता का स्वरूप बेहद करुणा व ममतामयी है। स्कंदमाता की पूजा निसंतान दंपती को अवश्य करनी चाहिए। स्कंदमाता की पूजा करने से दंपती को संतान सुख की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि प्रात: जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर स्कंदमाता की प्रतिमा स्थापित करें और गंगाजल से स्नान करवाएं। प्रतिमा के सम्मुख धूप, दीप प्रज्ज्वलित करें। इसके बाद फल, फूल, रोली, कुमकुम, अक्षत, श्रृंगार, मिठाई अर्पित करें। पूजन के दौरान मां को केले का भोग अवश्य लगाएं। चूंकि मातारानी को केला अतिप्रिय है। इसके अलावा खीर का भोग लगाना भी उत्तम होगा।
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जगाधरी। नवरात्र के तीसरे दिन चतुर्थी तिथि पर मंगलवार को मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कुष्माण्डा की पूजा की गई। इस दौरान तड़के मंदिर पहुंचकर श्रद्धालुओं ने महाशक्ति मां दुर्गा की प्रतिमा के सम्मुख ज्योति प्रज्ज्वलित की और शीश झुकाया। पूरा दिन मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा। देर शाम तक मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने को मिली। वहीं, नवरात्र के चौथे दिन पंचमी तिथि पर मां के पांचवें स्वरूप की पूजा का विधान है। इस दौरान मां दुर्गा के पंचम स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की जाएगी।
मंगलवार को सुबह से ही मंदिरों में भोर से ही भक्तों का तांता लगा रहा। भक्तों ने मंदिर पहुंच मां की प्रतिमा के सम्मुख शीश झुका और मनोकामनाएं मांगी। मां कुष्माण्डा के जयघोष से नगरी गूंज उठी। जगाधरी के देवीभवन मंदिर और रेलवे स्टेशन स्थित श्रीमूर्ति देवी मंदिर में भक्तों का पूरा दिन तांता लगा रहा। जबकि प्रात: व संध्या आरती के दौरान मंदिरों में भारी भीड़ देखने को मिली।
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वहीं, लोगों ने घरों में भी मां की आराधना की। शहर सहित जिले के सभी मंदिरों में देर शाम तक भीड़ देखने को मिली। नवरात्र को लेकर भक्तों में भारी उत्साह है। जिसके चलते सभी मंदिरों में हर दम भीड़ दिखाई दे रही है। जबकि प्राचीन व पौराणिक मंदिरों में दर्शनों की हजूम उमड़ रहा है। नवरात्र के चलते मंदिरों में भव्य रूप से सजाया गया है। मंदिरों की रोजाना फूलों से सजावट की जा रही है। ऐसे में तड़के ही मंदिरों के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए जाते हैं। बुधवार को नवरात्र के चौथे दिन मां के पंचम स्वरूप की आराधना का विधान है।
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पंडित रमन वत्स ने बताया कि नवरात्र की पंचमी तिथि को मां दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा का विधान है। उन्होंने स्कंदमाता का स्वरूप बेहद करुणा व ममतामयी है। स्कंदमाता की पूजा निसंतान दंपती को अवश्य करनी चाहिए। स्कंदमाता की पूजा करने से दंपती को संतान सुख की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि प्रात: जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर स्कंदमाता की प्रतिमा स्थापित करें और गंगाजल से स्नान करवाएं। प्रतिमा के सम्मुख धूप, दीप प्रज्ज्वलित करें। इसके बाद फल, फूल, रोली, कुमकुम, अक्षत, श्रृंगार, मिठाई अर्पित करें। पूजन के दौरान मां को केले का भोग अवश्य लगाएं। चूंकि मातारानी को केला अतिप्रिय है। इसके अलावा खीर का भोग लगाना भी उत्तम होगा।