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Yamuna Nagar News: बिना फिल्टर थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को चढ़ा रहे रक्त
Sun, 13 Oct 2024 01:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 13 Oct 2024 01:37 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर।
थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को खून चढ़ाने में स्वास्थ्य विभाग की ओर से बड़ी लापरवाही बरती जा रही है। इन बच्चों को रक्त चढ़ाने के दौरान ल्यूको फिल्टर नहीं लगाया जा रहा। बिना फिल्टर के खून चढ़ाने पर बच्चों के शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ने लगती है। इससे बच्चों की किडनी, लीवर और हार्ट पर विपरीत असर पड़ सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा इस तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जा रहा। वहीं कई माता-पिता ऐसे हैं, जिन्हें ल्यूको फिल्टर के फायदे के बारे में जानकारी नहीं है। इसलिए वह इस बारे में डॉक्टरों से ज्यादा सवाल जवाब नहीं करते। जिले में थैलेसीमिया से ग्रस्त कुल 151 लोग हैं। इनमें बच्चों की संख्या करीब 105 हैं।
थैलेसीमिया पीड़ित बच्चाें काे महीने में एक या इससे भी ज्यादा बार खून की जरूरत पड़ती है। अगर किसी काे बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ रही है ताे रक्त की बोतल पर ल्यूको फिल्टर लगाना बेहद जरूरी है। क्योंकि रक्त में आयरन भी हाेता है। बिना फिल्टर रक्त चढ़ाने से बच्चों के शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ने लगती है जिसका बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
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बिना फिल्टर के खून चढ़ाने पर श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी) भी अलग नहीं हाेती। जबकि थैलेसीमिया से ग्रस्त बच्चे काे डब्ल्यूबीसी जरूरत नहीं हाेती। श्वेत रक्त कणिकाओं में भी हीमोग्लोबिन हाेता है। इससे बच्चे में फीवर, रिएक्शन और एलर्जी का खतरा बना रहता है।
थैलेसीमिया आनुवांशिक रोग है। इस रोग की पहचान बच्चे में तीन महीने बाद हो पाती है। आमतौर पर हर सामान्य व्यक्ति के शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र करीब 120 दिनों की होती है, लेकिन थैलेसीमिया से पीड़ित रोगी के शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र घटकर सिर्फ 20 दिन ही रह जाती है। इसका सीधा असर व्यक्ति के हीमोग्लोबिन पर पड़ता है, जिसके कम होने पर व्यक्ति एनीमिया का शिकार हो जाता है और हर समय किसी न किसी बीमारी से ग्रसित रहने लगता है।
एक फिल्टर की कीमत 800 से 1000 रुपये
थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चों के अभिभावक रजनी भारती, दिप्पी, मंदीप व गंगा देवी ने बताया कि अस्पताल की तरफ से उन्हें ल्यूको फिल्टर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। इसलिए उन्हें बाजार से ही खरीदना पड़ता है। एक ल्यूको फिल्टर की कीमत बाजार में 800 से 1000 रुपये है। यदि महीने में दो बार बच्चे को रक्त चढ़वाना पड़ जाए तो दो हजार रुपये खर्च आता है। सभी माता-पिता इतना खर्च वहन नहीं कर पाते। डॉक्टरों को बोलते हैं तो वह कहते हैं कि अस्पताल में है ही नहीं तो वह कहां से फिल्टर लगाएं।
फिल्टर की डिमांड की जाएगी : पीएमओ
मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉ. नवजोत कौर का कहना है कि ल्यूको फिल्टर की सप्लाई कम आ रही है। जो फिल्टर आते हैं वह बच्चों को लगा दिए जाते हैं। थैलेसीमिया से ग्रस्त बच्चों को किसी भी तरह के सामान की कमी न रहे इसके लिए सीनियर नर्सिंग ऑफिसर निशा जंग की ड्यूटी लगाई गई है। ल्यूको फिल्टर की डिमांड की जाएगी।
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यमुनानगर।
थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को खून चढ़ाने में स्वास्थ्य विभाग की ओर से बड़ी लापरवाही बरती जा रही है। इन बच्चों को रक्त चढ़ाने के दौरान ल्यूको फिल्टर नहीं लगाया जा रहा। बिना फिल्टर के खून चढ़ाने पर बच्चों के शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ने लगती है। इससे बच्चों की किडनी, लीवर और हार्ट पर विपरीत असर पड़ सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा इस तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जा रहा। वहीं कई माता-पिता ऐसे हैं, जिन्हें ल्यूको फिल्टर के फायदे के बारे में जानकारी नहीं है। इसलिए वह इस बारे में डॉक्टरों से ज्यादा सवाल जवाब नहीं करते। जिले में थैलेसीमिया से ग्रस्त कुल 151 लोग हैं। इनमें बच्चों की संख्या करीब 105 हैं।
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थैलेसीमिया पीड़ित बच्चाें काे महीने में एक या इससे भी ज्यादा बार खून की जरूरत पड़ती है। अगर किसी काे बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ रही है ताे रक्त की बोतल पर ल्यूको फिल्टर लगाना बेहद जरूरी है। क्योंकि रक्त में आयरन भी हाेता है। बिना फिल्टर रक्त चढ़ाने से बच्चों के शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ने लगती है जिसका बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
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बिना फिल्टर के खून चढ़ाने पर श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी) भी अलग नहीं हाेती। जबकि थैलेसीमिया से ग्रस्त बच्चे काे डब्ल्यूबीसी जरूरत नहीं हाेती। श्वेत रक्त कणिकाओं में भी हीमोग्लोबिन हाेता है। इससे बच्चे में फीवर, रिएक्शन और एलर्जी का खतरा बना रहता है।
थैलेसीमिया आनुवांशिक रोग है। इस रोग की पहचान बच्चे में तीन महीने बाद हो पाती है। आमतौर पर हर सामान्य व्यक्ति के शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र करीब 120 दिनों की होती है, लेकिन थैलेसीमिया से पीड़ित रोगी के शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र घटकर सिर्फ 20 दिन ही रह जाती है। इसका सीधा असर व्यक्ति के हीमोग्लोबिन पर पड़ता है, जिसके कम होने पर व्यक्ति एनीमिया का शिकार हो जाता है और हर समय किसी न किसी बीमारी से ग्रसित रहने लगता है।
एक फिल्टर की कीमत 800 से 1000 रुपये
थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चों के अभिभावक रजनी भारती, दिप्पी, मंदीप व गंगा देवी ने बताया कि अस्पताल की तरफ से उन्हें ल्यूको फिल्टर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। इसलिए उन्हें बाजार से ही खरीदना पड़ता है। एक ल्यूको फिल्टर की कीमत बाजार में 800 से 1000 रुपये है। यदि महीने में दो बार बच्चे को रक्त चढ़वाना पड़ जाए तो दो हजार रुपये खर्च आता है। सभी माता-पिता इतना खर्च वहन नहीं कर पाते। डॉक्टरों को बोलते हैं तो वह कहते हैं कि अस्पताल में है ही नहीं तो वह कहां से फिल्टर लगाएं।
फिल्टर की डिमांड की जाएगी : पीएमओ
मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉ. नवजोत कौर का कहना है कि ल्यूको फिल्टर की सप्लाई कम आ रही है। जो फिल्टर आते हैं वह बच्चों को लगा दिए जाते हैं। थैलेसीमिया से ग्रस्त बच्चों को किसी भी तरह के सामान की कमी न रहे इसके लिए सीनियर नर्सिंग ऑफिसर निशा जंग की ड्यूटी लगाई गई है। ल्यूको फिल्टर की डिमांड की जाएगी।