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Yamuna Nagar News: बायोडिग्रेडेबल टोकरी प्राकृतिक तरीके से मच्छरों को करेगी नष्ट
Wed, 10 Sep 2025 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 10 Sep 2025 01:47 AM IST
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बायोडिग्रेडेबल मच्छर नाशक टोकरी दिखाती छात्रा अदिति। संवाद
अभय सिंह
जगाधरी। शहर की छात्रा अदिति जुयाल ने एक ऐसा प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिससे मच्छरों के लार्वा को पनपने से रोका जा सकता है। इसके प्रयोग से जहां भी मच्छरों के अंडे व लार्वा होंगे उन्हें प्राकृतिक तरीके से नष्ट किया जा सकता है। वहीं इस उत्पाद का प्रयोग बेहद सरल व सुविधाजनक है, जिसका मनुष्य के साथ पशु पक्षियों पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होगा। यह एक बायोडिग्रेडेबल मच्छर नाशक टोकरी है, जो मच्छर पनपने नहीं देगी। इसमें किसी प्रकार के केमिकल का प्रयोग नहीं किया गया है।
इस प्रोजेक्ट का प्रयोग करके मच्छरों को नियंत्रित किया जा सकता है। इससे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया सहित अन्य मच्छर जनित रोगों पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है। इसका उपयोग अभी केवल पानी जमा होने वाले स्थानों पर किया जा सकता है। अदिति ने बताया कि इस मच्छर नाशक में किसी प्रकार के केमिकल व जहरीले पदार्थ का प्रयोग नहीं किया गया है । इसके साथ यह उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल है और प्राकृतिक तरीके से मच्छरों को नष्ट कर देगा। उन्होंने बताया कि बायोडिग्रेडेबल मच्छर नाशक टोकरी मच्छर के साथ ही उनके अंडों व लार्वा को भी समाप्त कर देगी। इसका पर्यावरण, वायु सहित मनुष्य के स्वास्थ्य पर भी दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा। अदिति की इस प्रोजेक्ट और उपलब्धि से स्कूल में जश्न का माहौल है। इस प्रोजेक्ट की खूब सराहना हो रही है। प्राचार्य डॉ. बिंदु शर्मा ने इसके लिए छात्रा को शुभकामनाएं दीं।
बॉक्स
गन्ने के वेस्ट से बनाई टोकरी
अदिति जुयाल ने बताया कि इस मच्छर नाशक टोकरी में किसी प्रकार के केमिकल का प्रयोग नहीं किया गया है। इसमें गन्ने की खोई व अन्य व्यर्थ पदार्थों का प्रयोग किया गया है। इसका प्रयोग पानी जमा होने वाले स्थानों पर किया जाएगा। पानी में डालने पर इस पदार्थ से कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनेगी। जिससे पानी में मच्छर, अंडे व लार्वा सभी नष्ट हो जाएंगे। इस दौरान पानी में बनने वाले कार्बन डाई ऑक्साइड बहुत ही कम होगी, जिसका इंसान व पशु-पक्षियों पर कोई असर नहीं होगा। ऐसे में पानी में मच्छर बिल्कुल नहीं पनप पाएंगे।
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यह होती है बायोडिग्रेडेबल
बायोडिग्रेडेबल (जैव निम्ननीय) ऐसी चीज को कहा जाता है, जिसे बैक्टीरिया, कवक या अन्य जीवों द्वारा तोड़ा जा सके। प्राकृतिक वातावरण में आसानी से विघटित किया जा सके। ताकि यह पर्यावरण के लिए सुरक्षित हो सके। ये पदार्थ स्वाभाविक रूप से टूटते हैं और वापस प्राकृतिक चक्र में मिल जाते हैं, जिससे पर्यावरण पर हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता है।
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जगाधरी। शहर की छात्रा अदिति जुयाल ने एक ऐसा प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिससे मच्छरों के लार्वा को पनपने से रोका जा सकता है। इसके प्रयोग से जहां भी मच्छरों के अंडे व लार्वा होंगे उन्हें प्राकृतिक तरीके से नष्ट किया जा सकता है। वहीं इस उत्पाद का प्रयोग बेहद सरल व सुविधाजनक है, जिसका मनुष्य के साथ पशु पक्षियों पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होगा। यह एक बायोडिग्रेडेबल मच्छर नाशक टोकरी है, जो मच्छर पनपने नहीं देगी। इसमें किसी प्रकार के केमिकल का प्रयोग नहीं किया गया है।
इस प्रोजेक्ट का प्रयोग करके मच्छरों को नियंत्रित किया जा सकता है। इससे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया सहित अन्य मच्छर जनित रोगों पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है। इसका उपयोग अभी केवल पानी जमा होने वाले स्थानों पर किया जा सकता है। अदिति ने बताया कि इस मच्छर नाशक में किसी प्रकार के केमिकल व जहरीले पदार्थ का प्रयोग नहीं किया गया है । इसके साथ यह उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल है और प्राकृतिक तरीके से मच्छरों को नष्ट कर देगा। उन्होंने बताया कि बायोडिग्रेडेबल मच्छर नाशक टोकरी मच्छर के साथ ही उनके अंडों व लार्वा को भी समाप्त कर देगी। इसका पर्यावरण, वायु सहित मनुष्य के स्वास्थ्य पर भी दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा। अदिति की इस प्रोजेक्ट और उपलब्धि से स्कूल में जश्न का माहौल है। इस प्रोजेक्ट की खूब सराहना हो रही है। प्राचार्य डॉ. बिंदु शर्मा ने इसके लिए छात्रा को शुभकामनाएं दीं।
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गन्ने के वेस्ट से बनाई टोकरी
अदिति जुयाल ने बताया कि इस मच्छर नाशक टोकरी में किसी प्रकार के केमिकल का प्रयोग नहीं किया गया है। इसमें गन्ने की खोई व अन्य व्यर्थ पदार्थों का प्रयोग किया गया है। इसका प्रयोग पानी जमा होने वाले स्थानों पर किया जाएगा। पानी में डालने पर इस पदार्थ से कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनेगी। जिससे पानी में मच्छर, अंडे व लार्वा सभी नष्ट हो जाएंगे। इस दौरान पानी में बनने वाले कार्बन डाई ऑक्साइड बहुत ही कम होगी, जिसका इंसान व पशु-पक्षियों पर कोई असर नहीं होगा। ऐसे में पानी में मच्छर बिल्कुल नहीं पनप पाएंगे।
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यह होती है बायोडिग्रेडेबल
बायोडिग्रेडेबल (जैव निम्ननीय) ऐसी चीज को कहा जाता है, जिसे बैक्टीरिया, कवक या अन्य जीवों द्वारा तोड़ा जा सके। प्राकृतिक वातावरण में आसानी से विघटित किया जा सके। ताकि यह पर्यावरण के लिए सुरक्षित हो सके। ये पदार्थ स्वाभाविक रूप से टूटते हैं और वापस प्राकृतिक चक्र में मिल जाते हैं, जिससे पर्यावरण पर हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता है।

बायोडिग्रेडेबल मच्छर नाशक टोकरी दिखाती छात्रा अदिति। संवाद

बायोडिग्रेडेबल मच्छर नाशक टोकरी दिखाती छात्रा अदिति। संवाद