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Yamuna Nagar News: हरियाली पर दिनभर चली कुल्हाड़ी
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सेक्टर-17 के कम्युनिटी सेंटर समीप पार्क में शुक्रवार को दिनभर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलती रही। एक के बाद एक दो दर्जन पेड़ काट दिए गए। हालांकि इसका पता लगते ही एचईएस (हरियाणा एनवायरनमेंट सोसाइटी) के अध्यक्ष एवं ग्रीन मैन एसएल सैनी ने मौके के फोटो सहित नगर निगम आयुक्त, मेयर व जेई को अवगत कराया, पर आरोप है कि कोई अधिकारी कार्रवाई करना तो दूर मौके पर भी नहीं आया। एसएल सैनी ने बताया कि पार्क में काटे गए सभी पेड़ छायादार व हरे भरे थे, जिन्हें काटने का कोई औचित्य नहीं बनता था। इनमें कोई पेड़ सूखा नहीं था और न ही कोई गिरने की कगार पर था। सभी पेड़ पार्क में आसपास के घरों से दूर थे, इसके बाद भी इन्हें काट दिया गया। अगर कोई इसे छंटाई का नाम दे तो भी यह सही नहीं है। क्योंकि पेड़ों को कई फीट लंबे तने काट दिए गए हैं। यह छंटाई नहीं बल्कि सीधे तौर पर हरे भरे पेड़ काटे गए हैं, जो कानूनन अपराध है। एसएल सैनी ने कहा कि यह मामला पहला नहीं है, जब सरेआम पेड़ काट दिए गए। जबकि इससे पहले भी नगर निगम को कई बार अलग-अलग जगह विभिन्न तरीकों से पेड़ काटने व खत्म करने की शिकायतें दी जा चुकी हैं, जिनमें से नाममात्र शिकायतों पर ही नगर निगम अफसरों ने एफआईआर कराई। इससे संदेह है कि ऐसे मामलों में नगर निगम की मिलीभगत हो सकती है, तभी शिकायतों पर न तो जांच होती है न कार्रवाई। कई बार सदन बैठकों में ऐसे मामलों पर कार्रवाई के प्रस्ताव भी पास हो चुके हैं, पर धरातल पर उन्हें अमल में नहीं लाया गया। सैनी ने आरोप लगाया कि पेड़ काटने के बाद लकड़ कहां जाती है, ये भी पता नहीं चलता। जिसे बिना मंजूरी काटने के साथ मंडी में बेचने का भी शक है।
सेक्टर-17 निवासी नेहा गुप्ता ने बताया कि सेक्टर-17 में ही आयकर विभाग के कार्यालय समीप 70 साल पुराना पेड़ काट दिया गया था। ऐसा होते देख एतराज जताया था, पर पेड़ कटवाने वाले नहीं रुके। तब हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, नगर निगम, वन विभाग के अफसरों को अवगत कराया। सभी एक दूसरे पर बात डालते रहे। इसी तरह 16 दिन में भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। क्योंकि पेड़ 70 साल पुराना था, इसलिए उसकी कीमत लाखों रुपये में थी। इसी तरह अब पार्क में भी पेड़ काटे गए।
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सेक्टर-17 निवासी नेहा गुप्ता ने बताया कि सेक्टर-17 में ही आयकर विभाग के कार्यालय समीप 70 साल पुराना पेड़ काट दिया गया था। ऐसा होते देख एतराज जताया था, पर पेड़ कटवाने वाले नहीं रुके। तब हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, नगर निगम, वन विभाग के अफसरों को अवगत कराया। सभी एक दूसरे पर बात डालते रहे। इसी तरह 16 दिन में भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। क्योंकि पेड़ 70 साल पुराना था, इसलिए उसकी कीमत लाखों रुपये में थी। इसी तरह अब पार्क में भी पेड़ काटे गए।
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