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आषाढ़ के गुप्त नवरात्र आज से, विशेष पूजन होगा फलकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। बुड़िया निवासी पंड़ित ललित शर्मा ने बताया कि आषाढ़ माह की प्रतिपदा से मां गुप्त नवरात्र का शुभारंभ हो रहा है। गुप्त नवरात्र बेहद शुभ नक्षत्र में शुरू हो रहे हैं। ये गुप्त नवरात्र पुष्य नक्षत्र में होंगे। वहीं रवि पुष्य नक्षत्र, राजयोग व सर्वार्थसिद्धि योग होगा। जो अनंत फलदायी होगा। इस बार नौ की जगह कुल आठ नवरात्र होंगे, एक तिथि क्षय होने के कारण एक दिन घट गया है।
ज्योतिषों की माने तो गुप्त नवरात्रों में विशेष मंत्रों से मां की आराधना करने से अनंत व विशेष फल की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि इस बार षष्ठी तिथि का क्षय है। जिस कारण नवरात्र आठ दिन के होंगे।
उन्होंने बताया कि इन नवरात्र में मां के बीज मंत्र और सप्तशती पाठ अवश्य करना चाहिए। वहीं हवन करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलेगी। घर में हवन करने से नकारात्मकता दूर होगी। इससे साधक परिवार को निरोगता का वर प्राप्त होगा।
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आषाढ़ माह में बारिश के दिनों में हवन करने से वातावरण में फैले तमाम तरह के रोगाणु भी नष्ट हो जाएंगे। जिससे घर के सभी सदस्य तमाम तरह के संक्रमण से सुरक्षित रहेंगे। वहीं साधना से साधक के परिवार में संपन्नता आएगी।
साल में होते हैं चार नवरात्र
पं. ललित शर्मा ने बताया कि वर्ष में कुल चार नवरात्र आते हैं। इसमें दो प्रकट व दो गुप्त नवरात्र होते हैं। चैत्र व अश्विनी मास में प्रकट नवरात्र होते हैं, जबकि माघ और आषाढ़ के नवरात्र गुप्त होते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रों में मां की आराधना करना बेहद फलकारी होता है। इनमें पूजा व साधना करने से मां जल्दी प्रसन्न होती हैं। इस दौरान मंत्र व तंत्र दोनों साधनाएं होने से साधक उत्साहित रहते हैं। गुप्त नवरात्र में पूजा करने से मां शीघ्र प्रसन्न होती हैं और मनवाच्छित फल देती हैं।
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यमुनानगर। बुड़िया निवासी पंड़ित ललित शर्मा ने बताया कि आषाढ़ माह की प्रतिपदा से मां गुप्त नवरात्र का शुभारंभ हो रहा है। गुप्त नवरात्र बेहद शुभ नक्षत्र में शुरू हो रहे हैं। ये गुप्त नवरात्र पुष्य नक्षत्र में होंगे। वहीं रवि पुष्य नक्षत्र, राजयोग व सर्वार्थसिद्धि योग होगा। जो अनंत फलदायी होगा। इस बार नौ की जगह कुल आठ नवरात्र होंगे, एक तिथि क्षय होने के कारण एक दिन घट गया है।
ज्योतिषों की माने तो गुप्त नवरात्रों में विशेष मंत्रों से मां की आराधना करने से अनंत व विशेष फल की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि इस बार षष्ठी तिथि का क्षय है। जिस कारण नवरात्र आठ दिन के होंगे।
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उन्होंने बताया कि इन नवरात्र में मां के बीज मंत्र और सप्तशती पाठ अवश्य करना चाहिए। वहीं हवन करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलेगी। घर में हवन करने से नकारात्मकता दूर होगी। इससे साधक परिवार को निरोगता का वर प्राप्त होगा।
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आषाढ़ माह में बारिश के दिनों में हवन करने से वातावरण में फैले तमाम तरह के रोगाणु भी नष्ट हो जाएंगे। जिससे घर के सभी सदस्य तमाम तरह के संक्रमण से सुरक्षित रहेंगे। वहीं साधना से साधक के परिवार में संपन्नता आएगी।
साल में होते हैं चार नवरात्र
पं. ललित शर्मा ने बताया कि वर्ष में कुल चार नवरात्र आते हैं। इसमें दो प्रकट व दो गुप्त नवरात्र होते हैं। चैत्र व अश्विनी मास में प्रकट नवरात्र होते हैं, जबकि माघ और आषाढ़ के नवरात्र गुप्त होते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रों में मां की आराधना करना बेहद फलकारी होता है। इनमें पूजा व साधना करने से मां जल्दी प्रसन्न होती हैं। इस दौरान मंत्र व तंत्र दोनों साधनाएं होने से साधक उत्साहित रहते हैं। गुप्त नवरात्र में पूजा करने से मां शीघ्र प्रसन्न होती हैं और मनवाच्छित फल देती हैं।