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Yamuna Nagar News: कटाव रोकने के इंतजाम नहीं आ रहे किसी काम

Sat, 06 Sep 2025 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sat, 06 Sep 2025 01:19 AM IST
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Arrangements to stop erosion are not working
जेसीबी की सहायता से यमुना के किनारों पर लगाई जा रही बल्लियां। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। कई गांवों में तबाही मचाने के बाद आखिरकार शुक्रवार को पांचवें दिन यमुना नदी शांत हो गई। टापू कमालपुर के लोगों ने पानी घटने से राहत की सांस भले ली, लेकिन इससे पहले सारे कट्टे पानी में बह गए जिन्हें तीन दिन से लोग कटाव रोकने के लिए किनारे पर लगा रहे थे।
ग्रामीणों के अनुसार कट्टे बहने से कटाव करीब 50 फीट और गांव की तरफ बढ़ गया है। यदि दोबारा पानी बढ़ा तो गांव में तबाही लाने से कोई नहीं रोक पाएगा। उधर, दोपहर को एक बजे हथिनीकुंड बैराज पर यमुना नदी का जलस्तर एक लाख से कम होकर 89228 क्यूसेक पर आ गया। शाम पांच बजे यह और भी कम होकर 56981 क्यूसेक रह गया।
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इससे पहले आखिरी बार दोपहर 12 बजे 102947 क्यूसेक दर्ज किया गया था। पानी का स्तर घटने से पांच दिन से बंद पश्चिमी यमुना नहर व पूर्वी यमुना नहर में भी दोपहर दो बजे पानी की सप्लाई शुरू कर दी गई। बैराज पर पानी भले ही कम हो रहा है, लेकिन मैदानी इलाकों में लोगों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही।
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एक सितंबर को तड़के तीन बजे यमुना नदी का जलस्तर 97869 क्यूसेक था। इसके बाद चार बजे बढ़कर यह 165514 क्यूसेक हो गया था। इसके बाद से लगातार पानी बढ़ता चला गया। जो पांच बजे 210361 क्यूसेक, छह बजे 238551 क्यूसेक, सात बजे 272645 क्यूसेक, आठ बजे 311032 क्यूसेक और नौ बजे इस सीजन का सर्वाधिक 329313 क्यूसेक पर पहुंच गया। शुक्रवार शाम छह बजे बैराज पर 58411 क्यूसेक व सात बजे 59687 क्यूसेक पानी था।
इसमें से यमुना नदी में 55667 क्यूसेक, पश्चिमी यमुना नहर में 2510 क्यूसेक और उत्तर प्रदेश की पूर्वी यमुना नहर में 1510 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। उधर, मलिकपुर, हैबतपुर, महेश्वरी, कुलचंदू, पिंजौरा, जागधौली, नवां शहर, उधमगढ़ गांवों को भी चेतंग नदी के पानी की वजह से भूमि कटाव का सामना करना पड़ा।
उधर, मौसम साफ होने के बाद शुक्रवार को तेज धूप निकली। इससे तापमान में भी बढ़ोतरी देखने को मिली। मौसम विशेषज्ञ डॉ. अजीत कुमार ने बताया कि नौ सितंबर तक मौसम साफ रहेगा। इस दौरान बारिश होने की संभावना बहुत कम है।
125 घरों को नुकसान की मिली सूचना

बारिश की वजह से उन घरों को भी काफी नुकसान हुआ है जिनकी छत कच्ची है। कई जगह तो पूरी छत ढह गई तो कहीं लगातार पानी भरा रहने से दीवारें धंस गई। इससे घर गिरने की कगार पर पहुंच गए हैं। प्रशासन ने लोगों से कहा है कि यदि किसी के घर को बारिश या बाढ़ की वजह से नुकसान पहुंचा है वह इस बारे में अपने खंड के बीडीपीओ या एसडीएम कार्यालय में जानकारी दे सकता है। अभी तक जिला प्रशासन के पास करीब 125 घरों की सूचना आई है। डीडीपीओ नरेंद्र सिंह ने बताया आवेदनों का आगामी दो से तीन दिनों में सर्वे करवाया जाएगा। जो पात्र होंगे उन्हें ही सरकार के निर्देशानुसार मदद दी जाएगी।
गांवों में लगाए 1.91 लाख कट्टे

टापू कमालपुर, पोबारी, उन्हेड़ी, लापरा, बीबीपुर, बेलगढ़, लाकड़मय प्रतापपुर, मंडौली घग्गड़, माली माजरा, कलेसर, बंजारा बांस, कोटड़ा काहन सिंह, गुमथला राव, नगली, संधाला, खानुवाला, तिहानो, रामगढ़ सवाई आदि गांवों में हो रहे भूमि कटाव को रोकने के लिए सिंचाई व पंचायत विभाग की ओर से तैयारी की जा रही है। 16 जेसीबी, 10 ट्रैक्टर-ट्रॉली व 574 मनरेगा मजदूरों की ओर से एक लाख 91 हजार 400 मिट्टी के कट्टे नदी-नालों के तटबंधों को मजबूत करने के लिए रखे गए हैं। डीसी पार्थ गुप्ता ने बताया कि भूमि कटाव से संबंधित 50 प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिया गया है। मनरेगा के तहत मिट्टी के कट्टे भरकर, लोहे के जाल में पत्थर भरकर तटबंधों को मजबूत किया जा रहा है।

11361 एकड़ फसल प्रभावित

कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. आदित्य डबास ने बताया कि कुल 11361 एकड़ फसल व पशुचारे को नुकसान हुआ है। विभाग के अनुसार व्यासपुर में 384 एकड़, रादौर में 944 एकड़, छछरौली में 3173 एकड़, साढौरा में 556 एकड़, सरस्वतीनगर में 2199 एकड़, जगाधरी खंड में 4105 एकड़ फसल प्रभावित हुई है। जहां पर फसलों को 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान है, उसमें 150 गांवों में 3281 एकड़ में धान, 59 गांवों में 836 एकड़ गन्ना व 93 गांवों में 565 एकड़ पशु चारा शामिल है।

जेसीबी की सहायता से यमुना के किनारों पर लगाई जा रही बल्लियां। संवाद

जेसीबी की सहायता से यमुना के किनारों पर लगाई जा रही बल्लियां। संवाद

जेसीबी की सहायता से यमुना के किनारों पर लगाई जा रही बल्लियां। संवाद

जेसीबी की सहायता से यमुना के किनारों पर लगाई जा रही बल्लियां। संवाद

जेसीबी की सहायता से यमुना के किनारों पर लगाई जा रही बल्लियां। संवाद

जेसीबी की सहायता से यमुना के किनारों पर लगाई जा रही बल्लियां। संवाद

जेसीबी की सहायता से यमुना के किनारों पर लगाई जा रही बल्लियां। संवाद

जेसीबी की सहायता से यमुना के किनारों पर लगाई जा रही बल्लियां। संवाद

जेसीबी की सहायता से यमुना के किनारों पर लगाई जा रही बल्लियां। संवाद

जेसीबी की सहायता से यमुना के किनारों पर लगाई जा रही बल्लियां। संवाद

जेसीबी की सहायता से यमुना के किनारों पर लगाई जा रही बल्लियां। संवाद

जेसीबी की सहायता से यमुना के किनारों पर लगाई जा रही बल्लियां। संवाद

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