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सर्दियों की आहट के साथ एक्यूआई 264 पर पहुंचा
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उखड़ी सड़क पर वाहनों की आवाजाही के कारण उड़ती धूल। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
माई सिटी रिपोर्टर
यमुनानगर। शहर में तापमान कम होने के साथ ही आबोहवा खराब होने लगी है। केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के पंचायत भवन में लगे मॉनिटरिंग सिस्टम में दो दिन से शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक यानि एक्यूआई 250 के पार दर्ज किया जा रहा है। जो कि खराब की श्रेणी में आता है। शनिवार को दोपहर दो बजे पीएम 2.5 का स्तर 264 क्यूबेक प्रति घन मीटर तक पहुंच गया। शुक्रवार शाम को आठ बजे यह 229 क्यूबेक प्रति घन मीटर था।
बढ़ते प्रदूषण से राज्य प्रदूषण बोर्ड और मौसम विशेषज्ञ चिंतित हैं। अगर हालात में सुधार नहीं हुआ तो दीपावली तक एक्यूआई 350 को भी पार कर सकता है, जो अत्यधिक खराब की श्रेणी में आता है। साल 2019 में तो एक्यूआई 400 क्यूबेक प्रति घन मीटर को भी पार कर गया था और राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को प्रदूषण कम करने के उपायों पर काम किया गया था। वहीं मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो हवा के वेग में कमी और तापमान गिरने के कारण एक्यूआई खराब हो रहा है। इसकी बड़ी वजह निर्माण कार्य में सावधानी नहीं बरतना है। साथ ही वाहनों की संख्या भी पिछले साल की तुलना में 10 फीसदी बढ़ी है। पौधे भी ज्यादा नहीं लगाए गए। ऐसे में ठंड बढ़ने के साथ हालात खतरनाक स्तर तक पहुंच सकते हैं।
धूल भरी सड़कें भी बनीं मुसीबत
प्रदूषण में बढ़ोत्तरी की वजह ठंडे होते मौसम के अलावा टूटी सड़कों से उड़ने वाली धूल और गाड़ियों की बढ़ती संख्या भी है। ज्यादा बारिश के कारण टूटी सड़कों पर दिन-रात धूल उड़ती है। अक्तूबर व नवंबर में आमतौर पर हवा का वेग कम होता है, जिससे हानिकारक कणों का घनत्व बढ़ जाता है। सांस के साथ ये कण किसी भी व्यक्ति के शरीर में पहुंचकर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
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पराली जलने के केस भी नहीं
कृषि उपनिदेशक डॉ. जसविंदर सिंह का कहना है कि इस बार पराली जलाने के केस भी सामने नहीं आ रहे। इस सीजन में केवल एक केस सामने आया है। इसके बावजूद प्रदूषण बढ़ रहा है। किसानों को भी जागरूक किया जा रहा है। पराली को अन्य तरीके से प्रयोग किया जा रहा है। किसानों से अपील है कि वे किसी भी सूरत में पराली न जलाएं।
इन दिनों में प्रदूषण में बढ़ोतरी होनी शुरू हो जाती है। प्रदूषण को रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। - निर्मल कुमार, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
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यमुनानगर। शहर में तापमान कम होने के साथ ही आबोहवा खराब होने लगी है। केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के पंचायत भवन में लगे मॉनिटरिंग सिस्टम में दो दिन से शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक यानि एक्यूआई 250 के पार दर्ज किया जा रहा है। जो कि खराब की श्रेणी में आता है। शनिवार को दोपहर दो बजे पीएम 2.5 का स्तर 264 क्यूबेक प्रति घन मीटर तक पहुंच गया। शुक्रवार शाम को आठ बजे यह 229 क्यूबेक प्रति घन मीटर था।
बढ़ते प्रदूषण से राज्य प्रदूषण बोर्ड और मौसम विशेषज्ञ चिंतित हैं। अगर हालात में सुधार नहीं हुआ तो दीपावली तक एक्यूआई 350 को भी पार कर सकता है, जो अत्यधिक खराब की श्रेणी में आता है। साल 2019 में तो एक्यूआई 400 क्यूबेक प्रति घन मीटर को भी पार कर गया था और राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को प्रदूषण कम करने के उपायों पर काम किया गया था। वहीं मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो हवा के वेग में कमी और तापमान गिरने के कारण एक्यूआई खराब हो रहा है। इसकी बड़ी वजह निर्माण कार्य में सावधानी नहीं बरतना है। साथ ही वाहनों की संख्या भी पिछले साल की तुलना में 10 फीसदी बढ़ी है। पौधे भी ज्यादा नहीं लगाए गए। ऐसे में ठंड बढ़ने के साथ हालात खतरनाक स्तर तक पहुंच सकते हैं।
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धूल भरी सड़कें भी बनीं मुसीबत
प्रदूषण में बढ़ोत्तरी की वजह ठंडे होते मौसम के अलावा टूटी सड़कों से उड़ने वाली धूल और गाड़ियों की बढ़ती संख्या भी है। ज्यादा बारिश के कारण टूटी सड़कों पर दिन-रात धूल उड़ती है। अक्तूबर व नवंबर में आमतौर पर हवा का वेग कम होता है, जिससे हानिकारक कणों का घनत्व बढ़ जाता है। सांस के साथ ये कण किसी भी व्यक्ति के शरीर में पहुंचकर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
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पराली जलने के केस भी नहीं
कृषि उपनिदेशक डॉ. जसविंदर सिंह का कहना है कि इस बार पराली जलाने के केस भी सामने नहीं आ रहे। इस सीजन में केवल एक केस सामने आया है। इसके बावजूद प्रदूषण बढ़ रहा है। किसानों को भी जागरूक किया जा रहा है। पराली को अन्य तरीके से प्रयोग किया जा रहा है। किसानों से अपील है कि वे किसी भी सूरत में पराली न जलाएं।
इन दिनों में प्रदूषण में बढ़ोतरी होनी शुरू हो जाती है। प्रदूषण को रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। - निर्मल कुमार, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी