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नगर निगम ने एक माह में बदल डाले बोर्ड
अमर उजाला ब्यूरो/यमुनानगर
Updated Fri, 18 Jul 2014 12:58 AM IST
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यमुनानगर। नगर निगम की ओर से अब सभी वार्ड पार्षदों के निवास स्थान पर लगाए साधारण बोर्ड को हटाकर नए रिफ्लेक्टर बोर्ड लगाए जा रहे हैं। जबकि करीब एक माह पहले ही नगर निगम ने पार्षदों के निवास स्थान पर पौने दो लाख की लागत से साधारण बोर्ड लगाए थे। निगम की इस कार्रवाई पर कई वार्ड पार्षदों ने इसे घपला बताकर जांच की मांग की हैं।
बता दें कि इस संबंध में 12 फरवरी को वार्ड पार्षदों और निगम अधिकारियों की बैठक हुई थी। इसमें सभी वार्ड पार्षदों के निवास स्थान पर रिफ्लेक्टर बोर्ड लगाए जाने पर सहमति जताई गई थी। इसके लिए करीब 1 लाख 76 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान था, लेकिन तीन माह बाद जून के पहले सप्ताह में नगर निगम ने रिफ्लेक्टर के स्थान पर सभी पार्षदों के निवास स्थान पर साधारण बोर्ड लगा दिए।
नगर निगम की इस मनमानी पर पार्षदों ने ऐतराज जताया और साधारण बोर्डों पर पौने दो लाख रुपये खर्च होने पर सवालिया निशान उठाकर घपले का आरोप लगाया। पार्षदों का कहना था कि लगाए गए साधारण बोर्डों पर पौने दो लाख खर्च आना अटपटा है, क्योंकि इतनी ही लागत पर रिफ्लेक्टर बोर्ड लगाने की बात की जा रही थी।
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खबर छपने के बाद दिया बोर्ड बदलने का आदेश
पार्षदों के निवास स्थान पर रिफ्लेक्टर के स्थान पर उतनी ही लागत पर साधारण बोर्ड लगा देने के मामले को अमर उजाला ने 18 जून के अंक में खबर के माध्यम से उजागर किया। तब वार्ड नंबर-9 के पार्षद और सीनियन डिप्टी मेयर पवन बिट्टू और वार्ड नंबर-8 के पार्षद संगीता सिंघल द्वारा मामले में घपले की आशंका जताई गई थी। सूत्रों की मानें तो खबर छपने के बाद से प्रशासन द्वारा अंदरखाते मामले की जांच की गई। जिसके बाद अब साधारण बोर्डों को हटाकर नए रिफ्लेक्टर बोर्ड लगाने के आदेश जारी किए गए हैं, लेकिन पुराने बोर्डों पर कितनी लागत आई, वह पैसा कहां से लगाया गया और अब इन बोर्डों का क्या होगा? इन प्रश्नों पर फिलहाल नगर निगम चुप्पी साधे हुए है।
पुराने बोर्डों पर आई लागत की जांच की मांग
सीनियर डिप्टी मेयर और वार्ड नंबर-9 से पार्षद पवन बिट्टू के मुताबिक निगम अधिकारियों और पार्षदाें के बीच 12 मई को हुई मीटिंग में पार्षदों को रिफ्लेक्टर बोर्ड देने पर सहमति बनी थी। जिसके तहत करीब एक लाख 76 हजार रुपये से 20 बोर्ड बनाए जाने थे, किंतु नगर निगम द्वारा उन्हें साधारण बोर्ड दे दिए। जिस पर कोई एरो को भी निशान नहीं था। इसका विरोध करते हुए प्रशासन से मामले की जांच करने की मांग की गई थी। किंतु अब साधारण बोर्ड हटाकर नए रिफ्लेकटर बोर्ड तो लगाए जा रहे हैं, किंतु जांच का मामला ठंडे बस्ते में है। पुराने बोर्डों का क्या होगा, उन पर लगा पैसा कहां से आया और इन पर कितनी लागत आई, ऐसे तमाम प्रश्न चिह्नाें को ध्यान में रख पार्षद मामले की जांच की मांग करेंगे।
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बता दें कि इस संबंध में 12 फरवरी को वार्ड पार्षदों और निगम अधिकारियों की बैठक हुई थी। इसमें सभी वार्ड पार्षदों के निवास स्थान पर रिफ्लेक्टर बोर्ड लगाए जाने पर सहमति जताई गई थी। इसके लिए करीब 1 लाख 76 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान था, लेकिन तीन माह बाद जून के पहले सप्ताह में नगर निगम ने रिफ्लेक्टर के स्थान पर सभी पार्षदों के निवास स्थान पर साधारण बोर्ड लगा दिए।
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नगर निगम की इस मनमानी पर पार्षदों ने ऐतराज जताया और साधारण बोर्डों पर पौने दो लाख रुपये खर्च होने पर सवालिया निशान उठाकर घपले का आरोप लगाया। पार्षदों का कहना था कि लगाए गए साधारण बोर्डों पर पौने दो लाख खर्च आना अटपटा है, क्योंकि इतनी ही लागत पर रिफ्लेक्टर बोर्ड लगाने की बात की जा रही थी।
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खबर छपने के बाद दिया बोर्ड बदलने का आदेश
पार्षदों के निवास स्थान पर रिफ्लेक्टर के स्थान पर उतनी ही लागत पर साधारण बोर्ड लगा देने के मामले को अमर उजाला ने 18 जून के अंक में खबर के माध्यम से उजागर किया। तब वार्ड नंबर-9 के पार्षद और सीनियन डिप्टी मेयर पवन बिट्टू और वार्ड नंबर-8 के पार्षद संगीता सिंघल द्वारा मामले में घपले की आशंका जताई गई थी। सूत्रों की मानें तो खबर छपने के बाद से प्रशासन द्वारा अंदरखाते मामले की जांच की गई। जिसके बाद अब साधारण बोर्डों को हटाकर नए रिफ्लेक्टर बोर्ड लगाने के आदेश जारी किए गए हैं, लेकिन पुराने बोर्डों पर कितनी लागत आई, वह पैसा कहां से लगाया गया और अब इन बोर्डों का क्या होगा? इन प्रश्नों पर फिलहाल नगर निगम चुप्पी साधे हुए है।
पुराने बोर्डों पर आई लागत की जांच की मांग
सीनियर डिप्टी मेयर और वार्ड नंबर-9 से पार्षद पवन बिट्टू के मुताबिक निगम अधिकारियों और पार्षदाें के बीच 12 मई को हुई मीटिंग में पार्षदों को रिफ्लेक्टर बोर्ड देने पर सहमति बनी थी। जिसके तहत करीब एक लाख 76 हजार रुपये से 20 बोर्ड बनाए जाने थे, किंतु नगर निगम द्वारा उन्हें साधारण बोर्ड दे दिए। जिस पर कोई एरो को भी निशान नहीं था। इसका विरोध करते हुए प्रशासन से मामले की जांच करने की मांग की गई थी। किंतु अब साधारण बोर्ड हटाकर नए रिफ्लेकटर बोर्ड तो लगाए जा रहे हैं, किंतु जांच का मामला ठंडे बस्ते में है। पुराने बोर्डों का क्या होगा, उन पर लगा पैसा कहां से आया और इन पर कितनी लागत आई, ऐसे तमाम प्रश्न चिह्नाें को ध्यान में रख पार्षद मामले की जांच की मांग करेंगे।