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Yamuna Nagar News: प्रवासी मजदूर में ज्यादा फैल रहा एड्स, चपेट में 50 प्रतिशत युवा
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नशा युवाओं का जीवन न केवल तबाह कर रहा है बल्कि उन्हें जानलेवा रोग एड्स की चपेट में भी ले रहा है। एड्स के जितने रोगी मिल रहे हैं उनमें 45 से 50 प्रतिशत युवा हैं। स्वास्थ्य विभाग की काउंसलिंग व केस हिस्ट्री में सामने आया है कि युवा वर्ग एक सूई व सीरिंज से कई-कई युवा नशा कर रहे हैं। जिस कारण वह नशे की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे लोगों की स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जांच करवा कर उनका उपचार कराया जा रहा है। अच्छी बात यह है कि पिछले कुछ सालों में लोगों में एड्स के प्रति जागरूकता आई है। पहले जहां एचआईवी की जांच कराने से लोग डरते थे, अब जांच व उपचार के लिए खुद सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के एकीकृत परामर्श और परीक्षण केंद्र (आईसीटीसी) एक ऐसा केंद्र है जहां एचआईवी परामर्श और परीक्षण सेवाएं (एचसीटीएस) किसी व्यक्ति को प्रदान की जाती हैं। आईसीटीसी द्वारा इस साल अप्रैल से नवंबर तक एड्स के 61 नए रोगियों की पहचान की गई है। आईसीटीसी वर्ष 2006 से जिले में चल रहा है। तब से अब तक एड्स के 1186 रोगी मिल चुके हैं, इनमें करीब 50 प्रतिशत संख्या युवाओं की है।
एड्स के मामले में यमुनानगर हाई रिस्क जोन में है। भौगोलिक दृष्टि से यमुनानगर बड़ा औद्योगिक शहर है, जहां ज्यादातर उत्तर प्रदेश और बिहार से आए लोग यहां आकर मजदूरी करते हैं। एड्स की रोकथाम के लिए काम कर रही संस्था वाईआरजी केयर की सेंटर मैनेजर साइना ने बताया कि जिले के इंडस्ट्रियल एरिया, शादीपुर, पुराना हमीदा, विजय कॉलोनी, जसवंत कॉलोनी, लेबर कॉलोनी, दामला, कैंप हॉट स्पॉट में हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां पर सबसे ज्यादा दूसरे राज्यों से आए मजदूर रहते हैं। वह अपने घर से दूर रहते हैं, इसलिए यहां पर असुरक्षित यौन संबंध बनाते हैं। जिससे वह एड्स की चपेट में आ जाते हैं। जिले में एक साल में करीब 1500 लोगों की काउंसलिंग, 700 लोगों के एचआईवी टेस्ट करवा चुके हैं। एड्स रोगियों की समस्याओं के समाधान का भी प्रयास करते हैं।
आईसीटीसी द्वारा अप्रैल से नवंबर तक 136 कैंप लगाकर 20182 लोगों की एचआईवी एड्स को लेकर काउंसलिंग कर टेस्ट किए गए। इनमें से 59 61 एचआईवी पॉजिटिव मिले। वहीं 13631 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। जिनमें से दो एचआईवी पॉजिटिव मिली। यमुनानगर-जगाधरी में ट्रकों का बेड़ा भी राज्य में दूसरा सबसे बड़ा है। ट्रक ड्राइवरों का देश भर में आना-जाना लगा रहता है, जो एड्स के मामलों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण है।
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स्वास्थ्य विभाग में एचआईवी एड्स कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. अनूप गोयल का कहना है कि एचआईवी एक विषाणु है जो बॉडी के इम्यून सिस्टम पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। एचआईवी के शुरुआती स्टेज में इसका पता नहीं चल पाता है और व्यक्ति को इलाज कराने में देर हो जाती है। जिले में फिलहाल एड्स के 1186 केस हैं। लोगों में बहुत जागरूकता आई है। जिस कारण एड्स के रोगी लगातार कम हो रहे हैं।
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एड्स के मामले में यमुनानगर हाई रिस्क जोन में है। भौगोलिक दृष्टि से यमुनानगर बड़ा औद्योगिक शहर है, जहां ज्यादातर उत्तर प्रदेश और बिहार से आए लोग यहां आकर मजदूरी करते हैं। एड्स की रोकथाम के लिए काम कर रही संस्था वाईआरजी केयर की सेंटर मैनेजर साइना ने बताया कि जिले के इंडस्ट्रियल एरिया, शादीपुर, पुराना हमीदा, विजय कॉलोनी, जसवंत कॉलोनी, लेबर कॉलोनी, दामला, कैंप हॉट स्पॉट में हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां पर सबसे ज्यादा दूसरे राज्यों से आए मजदूर रहते हैं। वह अपने घर से दूर रहते हैं, इसलिए यहां पर असुरक्षित यौन संबंध बनाते हैं। जिससे वह एड्स की चपेट में आ जाते हैं। जिले में एक साल में करीब 1500 लोगों की काउंसलिंग, 700 लोगों के एचआईवी टेस्ट करवा चुके हैं। एड्स रोगियों की समस्याओं के समाधान का भी प्रयास करते हैं।
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आईसीटीसी द्वारा अप्रैल से नवंबर तक 136 कैंप लगाकर 20182 लोगों की एचआईवी एड्स को लेकर काउंसलिंग कर टेस्ट किए गए। इनमें से 59 61 एचआईवी पॉजिटिव मिले। वहीं 13631 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। जिनमें से दो एचआईवी पॉजिटिव मिली। यमुनानगर-जगाधरी में ट्रकों का बेड़ा भी राज्य में दूसरा सबसे बड़ा है। ट्रक ड्राइवरों का देश भर में आना-जाना लगा रहता है, जो एड्स के मामलों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण है।
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स्वास्थ्य विभाग में एचआईवी एड्स कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. अनूप गोयल का कहना है कि एचआईवी एक विषाणु है जो बॉडी के इम्यून सिस्टम पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। एचआईवी के शुरुआती स्टेज में इसका पता नहीं चल पाता है और व्यक्ति को इलाज कराने में देर हो जाती है। जिले में फिलहाल एड्स के 1186 केस हैं। लोगों में बहुत जागरूकता आई है। जिस कारण एड्स के रोगी लगातार कम हो रहे हैं।