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सरकार से बनी सहमति तो दस दिन बाद अतिथि अध्यापकों ने खाली किया हाईवे
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यमुनानगर। तीन दिन में मुख्यमंत्री से मुलाकात करवाने और अन्य मांगों पर सहमति बनने के बाद मंगलवार को अतिथि अध्यापकों ने दस दिन बाद अंबाला-सहारनपुर पुराना हाईवे खाली कर दिया। हाईवे पर आंदोलन के लिए लगाया गया टेंट उतार दिया गया। अतिथि अध्यापकों ने हाईवे तो खाली कर दिया है, लेकिन आंदोलन समाप्त नहीं किया है। पदाधिकारियों का कहना है कि 15 दिन के भीतर मानी गई मांगों के लिखित आदेश जारी नहीं किए जाते तो आंदोलन फिर से शुरू कर दिया जाएगा।
मंगलवार से अतिथि अध्यापक वहीं पर सड़क किनारे प्रदर्शन के लिए बैठ गए हैं। चूंकि सरकार ने अतिथि अध्यापकों की कुछ मांगें मान ली हैं, तो संघर्ष समिति ने सांकेतिक धरना देने का निर्णय लिया है। पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार उनकी तरफ एक कदम बढ़ी है, तो आंदोलन का एक कदम पीछे हटा लिया गया है। वहीं पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि सरकार व मंत्रियों पर उन्हें भरोसा नहीं है। भरोसा न होने के कारण ही आंदोलन समाप्त नहीं किया गया है। यदि कहे अनुसार सरकार ने 15 दिन में मानी मांगों का लिखित आदेश जारी नहीं किए तो आंदोलन फिर से शुरू कर दिया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ अतिथि अध्यापकों के उठने के बाद प्रशासन व पुलिस अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। चूंकि नाइट कर्फ्यू के बीच आंदोलन चलना पुलिस व प्रशासन के लिए सिर दर्द बना हुआ था। हाईवे खाली करने से पहले आंदोलन स्थल पर अतिथि अध्यापकों व संघर्ष समिति सदस्यों की बैठक सड़क पर हुई। जिसमें आगामी आंदोलन की चर्चा की गई। वहीं शिक्षा निदेशालय में मांगों के दस्तावेज लेने के लिए प्रतिनिधिमंडल चंडीगढ़ रवाना कर दिया गया। शाम साढ़े चार बजे के बाद इस सड़क पर यातायात बहाल हो गया। इस दौरान कुरुक्षेत्र प्रधान गुरुदत्त शास्त्री, कोषाध्यक्ष हरदीप गिल, संघर्ष समिति संरक्षक राजकुमार कालीरमन, सिरसा जिला प्रधान सुभाष खटाना, फतेहाबाद जिला प्रधान जयदीप सहित अन्य मौजूद रहे।
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मंगलवार से अतिथि अध्यापक वहीं पर सड़क किनारे प्रदर्शन के लिए बैठ गए हैं। चूंकि सरकार ने अतिथि अध्यापकों की कुछ मांगें मान ली हैं, तो संघर्ष समिति ने सांकेतिक धरना देने का निर्णय लिया है। पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार उनकी तरफ एक कदम बढ़ी है, तो आंदोलन का एक कदम पीछे हटा लिया गया है। वहीं पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि सरकार व मंत्रियों पर उन्हें भरोसा नहीं है। भरोसा न होने के कारण ही आंदोलन समाप्त नहीं किया गया है। यदि कहे अनुसार सरकार ने 15 दिन में मानी मांगों का लिखित आदेश जारी नहीं किए तो आंदोलन फिर से शुरू कर दिया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ अतिथि अध्यापकों के उठने के बाद प्रशासन व पुलिस अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। चूंकि नाइट कर्फ्यू के बीच आंदोलन चलना पुलिस व प्रशासन के लिए सिर दर्द बना हुआ था। हाईवे खाली करने से पहले आंदोलन स्थल पर अतिथि अध्यापकों व संघर्ष समिति सदस्यों की बैठक सड़क पर हुई। जिसमें आगामी आंदोलन की चर्चा की गई। वहीं शिक्षा निदेशालय में मांगों के दस्तावेज लेने के लिए प्रतिनिधिमंडल चंडीगढ़ रवाना कर दिया गया। शाम साढ़े चार बजे के बाद इस सड़क पर यातायात बहाल हो गया। इस दौरान कुरुक्षेत्र प्रधान गुरुदत्त शास्त्री, कोषाध्यक्ष हरदीप गिल, संघर्ष समिति संरक्षक राजकुमार कालीरमन, सिरसा जिला प्रधान सुभाष खटाना, फतेहाबाद जिला प्रधान जयदीप सहित अन्य मौजूद रहे।
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