{"_id":"681124e51b7b5816b90c7628","slug":"adi-badri-akshaya-tritiya-satua-fair-today-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1020-136974-2025-04-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: आदिबद्री अक्षय तृतीया सतुआ मेला आज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: आदिबद्री अक्षय तृतीया सतुआ मेला आज
Wed, 30 Apr 2025 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 30 Apr 2025 12:43 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। महाभारत काल से लग रहा आदिबद्री अक्षय तृतीया सतुआ तीज मेला बुधवार को लगेगा। मेले की लगभग सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। यह मेला प्राचीन एवं पौराणिक कार्यक्रम है।
जो महाभारत काल में राजा विराट द्वारा प्रारंभ किया गया था। यह मेला अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त पर लगाया जाता है। जो हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ता है और इस बार अक्षय तृतीया बुधवार को है।
गांव काठगढ़ के पूर्व सरपंच एवं राजा विराट धरोहर संरक्षण संस्थान के संयोजक सुल्तान सिंह ने बताया कि गांव में वर्षों की तरह इस बार भी अक्षय तृतीया पर मेला और कुश्ती दंगल करवाया जा रहा है। इस मेले व दंगल के पीछे का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि राजा विराट की बेटी उतरा का विवाह अर्जुन के बेटे अभिमन्यु होने और दो मजबूत परिवारों के संबंध बनने की खुशी में पहली बार यह मेला लगाया गया था। इसके बाद से हर साल मेला व कुश्ती दंगल करवाया जाता है। सदियों से ग्राम पंचायत काठगढ़ निवासी ने सतुआ तीज मेले पर संत महात्माओं के पूजन के बाद क्षेत्र के बुजुर्ग लोगों का सम्मान कर दंगल प्रारंभ किया जाता है।
यह मेला आदिबद्री की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को प्रदर्शित करता है। आदिबद्री अक्षय तृतीया सतुआ तीज मेला का महत्व ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस मेले में भाग लेने वाले लोग आदिबद्री की समृद्ध विरासत को अनुभव कर सकते हैं।
सुल्तान सिंह ने बताया कि आदिबद्री एक महत्वपूर्ण धार्मिक और पौराणिक स्थल है। इस स्थान से कई महत्वपूर्ण घटनाएं व कथाएं जुड़ी हुई हैं, जो इसे एक पवित्र व धार्मिक स्थल बनाती हैं। आदिबद्री में स्थित माता मंत्रा देवी मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने राजा विराट के साथ मिलकर किया था। यह मंदिर आदिबद्री के प्रमुख आकर्षणों में से एक है और यहां के धार्मिक महत्व को और भी बढ़ाता है।
आदिबद्री अक्षय तृतीया मेला एक महत्वपूर्ण धार्मिक कार्यक्रम है, जो आदिबद्री में होता है। आदिबद्री माता मंत्रा देवी मंदिर, वेदव्यास और महाभारत की रचना, पांडवों का अज्ञातवास, राजा विराट के महल के प्राप्त अवशेषों, शिवलिंग की प्राप्ति और अक्षय तृतीया मेला से जुड़ा हुआ है।
विज्ञापन
व्यासपुर। महाभारत काल से लग रहा आदिबद्री अक्षय तृतीया सतुआ तीज मेला बुधवार को लगेगा। मेले की लगभग सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। यह मेला प्राचीन एवं पौराणिक कार्यक्रम है।
जो महाभारत काल में राजा विराट द्वारा प्रारंभ किया गया था। यह मेला अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त पर लगाया जाता है। जो हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ता है और इस बार अक्षय तृतीया बुधवार को है।
विज्ञापन
गांव काठगढ़ के पूर्व सरपंच एवं राजा विराट धरोहर संरक्षण संस्थान के संयोजक सुल्तान सिंह ने बताया कि गांव में वर्षों की तरह इस बार भी अक्षय तृतीया पर मेला और कुश्ती दंगल करवाया जा रहा है। इस मेले व दंगल के पीछे का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि राजा विराट की बेटी उतरा का विवाह अर्जुन के बेटे अभिमन्यु होने और दो मजबूत परिवारों के संबंध बनने की खुशी में पहली बार यह मेला लगाया गया था। इसके बाद से हर साल मेला व कुश्ती दंगल करवाया जाता है। सदियों से ग्राम पंचायत काठगढ़ निवासी ने सतुआ तीज मेले पर संत महात्माओं के पूजन के बाद क्षेत्र के बुजुर्ग लोगों का सम्मान कर दंगल प्रारंभ किया जाता है।
यह मेला आदिबद्री की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को प्रदर्शित करता है। आदिबद्री अक्षय तृतीया सतुआ तीज मेला का महत्व ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस मेले में भाग लेने वाले लोग आदिबद्री की समृद्ध विरासत को अनुभव कर सकते हैं।
सुल्तान सिंह ने बताया कि आदिबद्री एक महत्वपूर्ण धार्मिक और पौराणिक स्थल है। इस स्थान से कई महत्वपूर्ण घटनाएं व कथाएं जुड़ी हुई हैं, जो इसे एक पवित्र व धार्मिक स्थल बनाती हैं। आदिबद्री में स्थित माता मंत्रा देवी मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने राजा विराट के साथ मिलकर किया था। यह मंदिर आदिबद्री के प्रमुख आकर्षणों में से एक है और यहां के धार्मिक महत्व को और भी बढ़ाता है।
आदिबद्री अक्षय तृतीया मेला एक महत्वपूर्ण धार्मिक कार्यक्रम है, जो आदिबद्री में होता है। आदिबद्री माता मंत्रा देवी मंदिर, वेदव्यास और महाभारत की रचना, पांडवों का अज्ञातवास, राजा विराट के महल के प्राप्त अवशेषों, शिवलिंग की प्राप्ति और अक्षय तृतीया मेला से जुड़ा हुआ है।