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Yamuna Nagar News: 6 करोड़ की जमीन हड़पने का आरोप फर्जी दस्तावेज बनाकर बदला रिकॉर्ड

Sat, 10 Jan 2026 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sat, 10 Jan 2026 12:25 AM IST
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Accused of grabbing land worth Rs 6 crore, records changed by creating fake documents
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। शहर की प्रोफेसर कॉलोनी में स्थित एक आवासीय संपत्ति को लेकर करीब छह करोड़ रुपये के जमीन घोटाले का मामला सामने आया है। आरोप है कि नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी के कर्मचारियों और कुछ निजी व्यक्तियों ने मिलीभगत से सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और सीमित क्षेत्रफल वाली जमीन को कई गुना बड़ा दिखाकर बेच दिया।
वहीं इस मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता साहिब सिंह गुर्जर ने सीएम विंडो के माध्यम से मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर मामले की एसआईटी या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।
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शिकायत के अनुसार, विवादित संपत्ति मकान नंबर 356, प्रोफेसर कॉलोनी यमुनानगर में स्थित है, जिसकी पुरानी प्रॉपर्टी आईडी 214सी118यू150 और नई आईडी 1सीएमपी835 बताई गई है। रिकॉर्ड के अनुसार इस संपत्ति का वास्तविक क्षेत्रफल करीब 1173 वर्गगज है, जबकि मूल स्वामित्व केवल 640 वर्गगज तक ही सीमित था। आरोप है कि जमीन हड़पने की नीयत से फर्जी मुख्तारनामे, बैनामे और अन्य दस्तावेज तैयार कर क्षेत्रफल को 1100 से 1200 वर्गगज तक दिखाया गया।
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शिकायतकर्ता का कहना है कि वर्ष 1960 के प्रलेखों में जमीन का सीमित क्षेत्र ही दर्ज है, लेकिन बाद के वर्षों में कुछ लोगों ने बिना किसी वैध अधिकार के अतिरिक्त भूमि जोड़कर कई फर्जी रजिस्ट्रियां करवाईं। वर्ष 1990 से 2004 के बीच अलग-अलग तिथियों में कई बैनामे किए गए, जिनके आधार पर करोड़ों रुपये की संपत्ति का लेन-देन हुआ। आरोप है कि इस दौरान सरकारी विभागों के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की गई और गलत प्रविष्टियां दर्ज की गईं।
मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि नगर निगम के प्रॉपर्टी आईडी रिकॉर्ड में गलत तरीके से नाम दर्ज कराए गए। इसके बावजूद अक्टूबर 2024 में फिर से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री कर दी गई। इससे पूरे प्रकरण में सुनियोजित साजिश की आशंका जताई जा रही है।

शिकायत में बताया गया कि मौजूदा समय में इस संपत्ति की बाजार कीमत लगभग छह करोड़ रुपये है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर की गई रजिस्ट्रियों को रद्द किया जाए और दोषी सरकारी कर्मचारियों व अन्य आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
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