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अभिषेक की तीन पीढ़ियों का वकालत से रहा नाता, जज बनकर पिता का सपना साकार
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दृढ़ इच्छा और लगन इंसान को मनचाही मंजिल पर आसित कर देती है। जहां चाह, वहां राह होती है। यह पंक्तियां जगाधरी की कल्याण पुरी कॉलोनी निवासी एडवोकेट अभिषेक वर्मा ने साबित कर दिखाई है। अभिषेक वर्मा ने पहली बार में ही हरियाणा ज्यूडिशियल एग्जाम क्लीयर किया है। अभिषेक की इस उपलब्धि से परिवार, रिश्तेदारों व दोस्तों में जश्न का माहौल है। परिणाम घोषणा के बाद से ही सैकड़ों लोग उनके घर बधाई देने पहुंच गए हैं। घर पर बधाई और आशीर्वाद देने वालों का तांता लगा हुआ। परिवार के छह सदस्य एडवोकेट हैं। लेकिन 25 साल की आयु में न्यायाधीश बनने पर एकमात्र अभिषेक ही हैं। इसके अलावा जगाधरी बार एसोसिएशन सदस्य करण सिंह अहलावत के पुत्र एडवाकेट अमित अहलावत ने भी यह परीक्षा उर्तीण की है।
रोजना करते थे सात से आठ घंटे पढ़ाई
अभिषेक वर्मा ने बताया कि उन्होंने पहली बार में यह परीक्षा उर्त्तीण की है। शुरू में थोड़ा मुश्किल लगा, लेकिन फिर कुछ रोज में यह आसान लगने लगा। वह रोज सात से आठ घंटे अपनी सेल्फ स्टडी के लिए निकालते थे। लेकिन वह जितनी देर पढ़ते थे तो उनका पूरा ध्यान व एकाग्रता सिर्फ उनके लक्ष्य पर होती थी। जिस कारण यह संभव हुआ।
पिता का सपना किया साकार
अभिषेक वर्मा ने बताया कि उनके पिता राजीव वर्मा भी एडवोकेट थे। वे जगाधरी बार एसोसिएशन के सदस्य रहे और डिस्ट्रिक कोर्ट में प्रैक्टिस करते रहे। परंतु 2009 में उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि उनके पिता की भी यही इच्छा थी कि वे जज बने। आज अपने दिवंगत पिता की अंतिम इच्छा पूरी कर वे आत्म सुख का अनुभव कर रहे हैं।
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पहली बार में पास की परीक्षा, सिर्फ 27 बने जज
अभिषेक वर्मा ने हुडा के स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल से नॉन मेडिकल संकाय से 12वीं पास की। इसके बाद उन्होंने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से 2017 में लॉ की। इसके बाद जगाधरी बार एसोसिशन ज्वाइंन कर यहीं प्रैक्टिस शुरू कर दी। दिसंबर 2018 में हरियाणा ज्यूडिशियल का एग्जाम दिया। एग्जाम के बाद फिर से उन्होंने अपनी प्रैक्टिस शुरू कर दी। परीक्षा में साढ़े 14 से ज्यादा एडवोकेट्स ने परीक्षा दी थी। जिसमें 69 ने साक्षात्कार दिया। जिसके बाद सिर्फ 27 का ही चयन हो पाया।
परिवार का न्याय से 46 साल का नाता
भविष्य के न्यायाधीश अभिषेक वर्मा का न्याय से पीढ़ी दर पीढ़ी का संबंध है। अभिषेक वर्मा के दादा रमेश चंद वर्मा भी एडवोकेट हैं। आरसी वर्मा ने बताया कि 1974 में उन्होंने जगाधरी बार एसोसिएशन की सदस्य के साथ प्रैक्टिस शुरू की थी। जो वे अभी भी कर रहे हैं। इसके बाद उनके तीनों बेटे राजीव वर्मा, संजय वर्मा, अमित वर्मा भी एडवोकेट बने। 2009 में बेटे राजीव की मौत हो गई। बेटा संजय हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करता है। जबकि दूसरा बेटा अमित बिलासपुर बार एसोसिएशन का मैंबर हैं। अब उनके पोते और राजीव के दोनों अभिषेक और शुभम भी वकालत के पेश में हैं।
भाई की तरह करना चाहते हैं पिता का नाम रोशन
अभिषेक वर्मा के छोटे भाई शुभम वर्मा भी जगाधरी बार एसोसिएशन के मैंबर हैं और यहीं प्रैक्टिस करते हैं। शुभम ने बताया कि उनके पिता का सपना था कि उनके बेटे जज बने। बड़े भाई ने उनका सपना पूरा किया है। वह भी भाई की तरह अपने पिता का नाम रोशन करना चाहते हैं।
सोशल मीडिया का करें सदुपयोग
हरियाणा ज्यूडिशियल एग्जाम क्लीयर कर जज बने अभिषेक वर्मा ने युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए कहा कि आधुनिक काल में अधिकांश लोगों का ज्यादा समय सोशल मीडिया पर व्यतित होता है। तकनीकी अच्छी चीज है, लेकिन इसका सदुपयोग करना चाहिए। अपनी स्टडी के दौरान वे भी लोगों से कनेक्ट रहे, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी भी रखी। विद्यार्थियों को भी इंटरनेट का प्रयोग अपने लक्ष्य प्राप्ति में करना चाहिए।
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रोजना करते थे सात से आठ घंटे पढ़ाई
अभिषेक वर्मा ने बताया कि उन्होंने पहली बार में यह परीक्षा उर्त्तीण की है। शुरू में थोड़ा मुश्किल लगा, लेकिन फिर कुछ रोज में यह आसान लगने लगा। वह रोज सात से आठ घंटे अपनी सेल्फ स्टडी के लिए निकालते थे। लेकिन वह जितनी देर पढ़ते थे तो उनका पूरा ध्यान व एकाग्रता सिर्फ उनके लक्ष्य पर होती थी। जिस कारण यह संभव हुआ।
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पिता का सपना किया साकार
अभिषेक वर्मा ने बताया कि उनके पिता राजीव वर्मा भी एडवोकेट थे। वे जगाधरी बार एसोसिएशन के सदस्य रहे और डिस्ट्रिक कोर्ट में प्रैक्टिस करते रहे। परंतु 2009 में उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि उनके पिता की भी यही इच्छा थी कि वे जज बने। आज अपने दिवंगत पिता की अंतिम इच्छा पूरी कर वे आत्म सुख का अनुभव कर रहे हैं।
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पहली बार में पास की परीक्षा, सिर्फ 27 बने जज
अभिषेक वर्मा ने हुडा के स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल से नॉन मेडिकल संकाय से 12वीं पास की। इसके बाद उन्होंने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से 2017 में लॉ की। इसके बाद जगाधरी बार एसोसिशन ज्वाइंन कर यहीं प्रैक्टिस शुरू कर दी। दिसंबर 2018 में हरियाणा ज्यूडिशियल का एग्जाम दिया। एग्जाम के बाद फिर से उन्होंने अपनी प्रैक्टिस शुरू कर दी। परीक्षा में साढ़े 14 से ज्यादा एडवोकेट्स ने परीक्षा दी थी। जिसमें 69 ने साक्षात्कार दिया। जिसके बाद सिर्फ 27 का ही चयन हो पाया।
परिवार का न्याय से 46 साल का नाता
भविष्य के न्यायाधीश अभिषेक वर्मा का न्याय से पीढ़ी दर पीढ़ी का संबंध है। अभिषेक वर्मा के दादा रमेश चंद वर्मा भी एडवोकेट हैं। आरसी वर्मा ने बताया कि 1974 में उन्होंने जगाधरी बार एसोसिएशन की सदस्य के साथ प्रैक्टिस शुरू की थी। जो वे अभी भी कर रहे हैं। इसके बाद उनके तीनों बेटे राजीव वर्मा, संजय वर्मा, अमित वर्मा भी एडवोकेट बने। 2009 में बेटे राजीव की मौत हो गई। बेटा संजय हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करता है। जबकि दूसरा बेटा अमित बिलासपुर बार एसोसिएशन का मैंबर हैं। अब उनके पोते और राजीव के दोनों अभिषेक और शुभम भी वकालत के पेश में हैं।
भाई की तरह करना चाहते हैं पिता का नाम रोशन
अभिषेक वर्मा के छोटे भाई शुभम वर्मा भी जगाधरी बार एसोसिएशन के मैंबर हैं और यहीं प्रैक्टिस करते हैं। शुभम ने बताया कि उनके पिता का सपना था कि उनके बेटे जज बने। बड़े भाई ने उनका सपना पूरा किया है। वह भी भाई की तरह अपने पिता का नाम रोशन करना चाहते हैं।
सोशल मीडिया का करें सदुपयोग
हरियाणा ज्यूडिशियल एग्जाम क्लीयर कर जज बने अभिषेक वर्मा ने युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए कहा कि आधुनिक काल में अधिकांश लोगों का ज्यादा समय सोशल मीडिया पर व्यतित होता है। तकनीकी अच्छी चीज है, लेकिन इसका सदुपयोग करना चाहिए। अपनी स्टडी के दौरान वे भी लोगों से कनेक्ट रहे, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी भी रखी। विद्यार्थियों को भी इंटरनेट का प्रयोग अपने लक्ष्य प्राप्ति में करना चाहिए।