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Yamuna Nagar News: बस ने रौंदे आरती के सीए, अकाउंटेंट बनने के सपने
Fri, 07 Nov 2025 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 07 Nov 2025 01:36 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। प्रतापनगर बस स्टैंड पर बस की चपेट में आकर जान गंवाने वाली गांव कुटीपुर की आरती का सीए व अकाउंटेंट बनने का सपना था। बचपन से बड़े होने तक अपने पेंटर पिता रामकुमार की मेहनत देख आरती के सपने अब सपने ही रह गए। बेटी को खोने के साथ उसके अधूरे सपनों का दर्द पिता रामकुमार व उसके तीन भाई-बहनों की आंखों से छलक रहा है।
परिजनों के मुताबिक 21 वर्षीय आरती सीए व अकाउंटेंट बनना चाहती थी। इसके लिए वह बीकॉम कर रही थी। जगाधरी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से बीकॉम के दो साल पूरे हो चुके थे। अब अंतिम साल की पढ़ाई पूरी होने में भी कुछ माह शेष थे। इसके बाद आरती की सीए की पढ़ाई करने की योजना थी। साथ ही आरती का बैंक में अकाउंटेंट लगने का सपना था। सरकारी नौकरी के लिए भी फॉर्म भरने का मन बना चुकी थी। परिजनों ने बताया कि आरती ने अपने पेंटर पिता रामकुमार की मेहनत देख बुने थे।
आरती का एक बड़ा भाई व एक-एक छोटे भाई व बहन हैं। पिता रामकुमार व दो भाई व एक बहन के आरती और उसके सपनों का याद कर बार-बार आंसू छलक रहे हैं। परिजनों के मुताबिक पढ़ाई के साथ आरती अन्य गतिविधियों में भी बेहतर प्रदर्शन कर नाम रोशन कर चुकी है।
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यमुनानगर। प्रतापनगर बस स्टैंड पर बस की चपेट में आकर जान गंवाने वाली गांव कुटीपुर की आरती का सीए व अकाउंटेंट बनने का सपना था। बचपन से बड़े होने तक अपने पेंटर पिता रामकुमार की मेहनत देख आरती के सपने अब सपने ही रह गए। बेटी को खोने के साथ उसके अधूरे सपनों का दर्द पिता रामकुमार व उसके तीन भाई-बहनों की आंखों से छलक रहा है।
परिजनों के मुताबिक 21 वर्षीय आरती सीए व अकाउंटेंट बनना चाहती थी। इसके लिए वह बीकॉम कर रही थी। जगाधरी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से बीकॉम के दो साल पूरे हो चुके थे। अब अंतिम साल की पढ़ाई पूरी होने में भी कुछ माह शेष थे। इसके बाद आरती की सीए की पढ़ाई करने की योजना थी। साथ ही आरती का बैंक में अकाउंटेंट लगने का सपना था। सरकारी नौकरी के लिए भी फॉर्म भरने का मन बना चुकी थी। परिजनों ने बताया कि आरती ने अपने पेंटर पिता रामकुमार की मेहनत देख बुने थे।
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आरती का एक बड़ा भाई व एक-एक छोटे भाई व बहन हैं। पिता रामकुमार व दो भाई व एक बहन के आरती और उसके सपनों का याद कर बार-बार आंसू छलक रहे हैं। परिजनों के मुताबिक पढ़ाई के साथ आरती अन्य गतिविधियों में भी बेहतर प्रदर्शन कर नाम रोशन कर चुकी है।
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