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Yamuna Nagar News: 30 साल पुरानी गलती ठीक होगी, 74 कॉलोनियों को किया जाएगा वैध
Tue, 23 Jun 2026 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 23 Jun 2026 01:29 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर की 74 कॉलोनियों को करीब 30 वर्षों से परेशान कर रही एक प्रशासनिक गलती को सुधारने की दिशा में हरियाणा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में नगर परिषद यमुनानगर और नगर परिषद जगाधरी क्षेत्र की उन 74 कॉलोनियों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया, जो वर्ष 1996 में नियमितीकरण की प्रक्रिया के बावजूद तकनीकी त्रुटि के कारण आज तक अवैध कॉलोनियों की श्रेणी में बनी हुई हैं। सरकार के इस फैसले से हजारों संपत्ति मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
लंबे समय से इन कॉलोनियों के निवासी विकास कार्यों, रजिस्ट्रियों, नक्शा पास कराने और डेवलपमेंट चार्ज जमा करने जैसी बुनियादी प्रक्रियाओं में परेशानी झेल रहे थे। अब इन समस्याओं के समाधान का रास्ता खुलता नजर आ रहा है।
कैबिनेट ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक को नगर निगम यमुनानगर में एक विशेष समिति गठित करने के निर्देश जारी करने की मंजूरी दी है।
इस समिति की अध्यक्षता नगर निगम आयुक्त करेंगे। समिति में मुख्य नगर योजनाकार अथवा जिला नगर योजनाकार, मुख्य अभियंता या अधीक्षक अभियंता, अतिरिक्त नगर आयुक्त, मेयर का नामित प्रतिनिधि, कार्यकारी अभियंता, राजस्व अधिकारी और जोनल कराधान अधिकारी सदस्य होंगे। समिति उन कॉलोनियों की पहचान करेगी, जहां हरियाणा नागरिक सुविधाएं एवं बुनियादी ढांचा कमी वाले नगर पालिका क्षेत्र प्रबंधन अधिनियम, 2013 लागू होने से पहले भवनों को नियमित किया गया था, लेकिन जिनके खसरा नंबर अथवा स्वीकृत लेआउट प्लान उपलब्ध नहीं हैं।
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समिति संबंधित क्षेत्रों की बाहरी सीमाएं तय कर प्रस्ताव तैयार करेगी, जिससे इन कॉलोनियों का रिकॉर्ड एनडीसी पोर्टल से जोड़ा जा सके और सुनियोजित विकास को गति मिल सके।
इन कॉलोनियों के निवासियों को वर्षों से अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पोर्टल पर डेवलपमेंट चार्ज जमा करने का विकल्प उपलब्ध नहीं होने के कारण एनडीसी जारी नहीं हो पा रही थी। इसके चलते संपत्तियों की रजिस्ट्रियां अटक रही थीं और भवन नक्शे भी स्वीकृत नहीं हो रहे थे। कई क्षेत्रों में पानी और सीवरेज जैसी सुविधाएं तो पहुंच गईं, लेकिन गलियों और नालियों का निर्माण नहीं हो सका। कॉलोनीवासी लगातार इस मुद्दे के समाधान की मांग कर रहे थे।
निगम हाउस की बैठक में उठा था मामला
यह मामला हाल ही में नगर निगम हाउस की बैठक में भी उठा था। पार्षदों ने कहा था कि दशकों पुरानी और आबाद कॉलोनियां आज भी पोर्टल पर अवैध दिखाई जा रही हैं, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अब सरकार द्वारा समिति गठन के निर्णय के बाद इन 74 कॉलोनियों के निवासियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। यदि प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी होती है तो वर्षों से विकास की राह देख रही इन कॉलोनियों से अवैध का दाग हट सकेगा।
एक शब्द की गलती बनी बड़ी परेशानी
दरअसल वर्ष 1996 में शहर की विभिन्न कॉलोनियों का सर्वे कर उन्हें नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। सर्वे रिपोर्ट शहरी स्थानीय निकाय विभाग को भेजी गई, लेकिन नोटिफिकेशन जारी करते समय कॉलोनी को नियमित घोषित करने के बजाय भवनों को नियमित दर्शा दिया गया। यह तकनीकी और शाब्दिक त्रुटि आगे चलकर बड़ी समस्या बन गई। नतीजतन कई कॉलोनियां पोर्टल पर आज भी अनधिकृत या आंशिक रूप से अवैध दर्ज हैं। इनमें प्रोफेसर कॉलोनी पार्ट-2 का हिस्सा, छोटा मॉडल टाउन, लालद्वारा रोड क्षेत्र सहित 74 से अधिक कॉलोनियां शामिल हैं। हालांकि सरकार ने इनमें से 65 को रिजेक्ट कर दिया था। शेष बची नौ कॉलोनियों को ही वैध करने पर विचार हो रहा था। परंतु अब कमेटी गठित होने से सभी 74 कॉलोनियों के लोगों को राहत मिलेगी। इन कॉलोनियों का कुछ हिस्सा वैध और कुछ हिस्सा अवैध श्रेणी में दर्ज है।
विकास शुल्क को लेकर भी मिली राहत
कैबिनेट ने विकास शुल्क के भुगतान को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधानों को मंजूरी दी है। जिन संपत्ति मालिकों ने वर्ष 1996 की अधिसूचना से पहले भवन निर्माण किया था और विकास शुल्क जमा नहीं कराया था, उन्हें उस समय लागू दरों के अनुसार शुल्क जमा करना होगा।
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यमुनानगर। शहर की 74 कॉलोनियों को करीब 30 वर्षों से परेशान कर रही एक प्रशासनिक गलती को सुधारने की दिशा में हरियाणा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में नगर परिषद यमुनानगर और नगर परिषद जगाधरी क्षेत्र की उन 74 कॉलोनियों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया, जो वर्ष 1996 में नियमितीकरण की प्रक्रिया के बावजूद तकनीकी त्रुटि के कारण आज तक अवैध कॉलोनियों की श्रेणी में बनी हुई हैं। सरकार के इस फैसले से हजारों संपत्ति मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
लंबे समय से इन कॉलोनियों के निवासी विकास कार्यों, रजिस्ट्रियों, नक्शा पास कराने और डेवलपमेंट चार्ज जमा करने जैसी बुनियादी प्रक्रियाओं में परेशानी झेल रहे थे। अब इन समस्याओं के समाधान का रास्ता खुलता नजर आ रहा है।
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कैबिनेट ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक को नगर निगम यमुनानगर में एक विशेष समिति गठित करने के निर्देश जारी करने की मंजूरी दी है।
इस समिति की अध्यक्षता नगर निगम आयुक्त करेंगे। समिति में मुख्य नगर योजनाकार अथवा जिला नगर योजनाकार, मुख्य अभियंता या अधीक्षक अभियंता, अतिरिक्त नगर आयुक्त, मेयर का नामित प्रतिनिधि, कार्यकारी अभियंता, राजस्व अधिकारी और जोनल कराधान अधिकारी सदस्य होंगे। समिति उन कॉलोनियों की पहचान करेगी, जहां हरियाणा नागरिक सुविधाएं एवं बुनियादी ढांचा कमी वाले नगर पालिका क्षेत्र प्रबंधन अधिनियम, 2013 लागू होने से पहले भवनों को नियमित किया गया था, लेकिन जिनके खसरा नंबर अथवा स्वीकृत लेआउट प्लान उपलब्ध नहीं हैं।
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समिति संबंधित क्षेत्रों की बाहरी सीमाएं तय कर प्रस्ताव तैयार करेगी, जिससे इन कॉलोनियों का रिकॉर्ड एनडीसी पोर्टल से जोड़ा जा सके और सुनियोजित विकास को गति मिल सके।
इन कॉलोनियों के निवासियों को वर्षों से अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पोर्टल पर डेवलपमेंट चार्ज जमा करने का विकल्प उपलब्ध नहीं होने के कारण एनडीसी जारी नहीं हो पा रही थी। इसके चलते संपत्तियों की रजिस्ट्रियां अटक रही थीं और भवन नक्शे भी स्वीकृत नहीं हो रहे थे। कई क्षेत्रों में पानी और सीवरेज जैसी सुविधाएं तो पहुंच गईं, लेकिन गलियों और नालियों का निर्माण नहीं हो सका। कॉलोनीवासी लगातार इस मुद्दे के समाधान की मांग कर रहे थे।
निगम हाउस की बैठक में उठा था मामला
यह मामला हाल ही में नगर निगम हाउस की बैठक में भी उठा था। पार्षदों ने कहा था कि दशकों पुरानी और आबाद कॉलोनियां आज भी पोर्टल पर अवैध दिखाई जा रही हैं, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अब सरकार द्वारा समिति गठन के निर्णय के बाद इन 74 कॉलोनियों के निवासियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। यदि प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी होती है तो वर्षों से विकास की राह देख रही इन कॉलोनियों से अवैध का दाग हट सकेगा।
एक शब्द की गलती बनी बड़ी परेशानी
दरअसल वर्ष 1996 में शहर की विभिन्न कॉलोनियों का सर्वे कर उन्हें नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। सर्वे रिपोर्ट शहरी स्थानीय निकाय विभाग को भेजी गई, लेकिन नोटिफिकेशन जारी करते समय कॉलोनी को नियमित घोषित करने के बजाय भवनों को नियमित दर्शा दिया गया। यह तकनीकी और शाब्दिक त्रुटि आगे चलकर बड़ी समस्या बन गई। नतीजतन कई कॉलोनियां पोर्टल पर आज भी अनधिकृत या आंशिक रूप से अवैध दर्ज हैं। इनमें प्रोफेसर कॉलोनी पार्ट-2 का हिस्सा, छोटा मॉडल टाउन, लालद्वारा रोड क्षेत्र सहित 74 से अधिक कॉलोनियां शामिल हैं। हालांकि सरकार ने इनमें से 65 को रिजेक्ट कर दिया था। शेष बची नौ कॉलोनियों को ही वैध करने पर विचार हो रहा था। परंतु अब कमेटी गठित होने से सभी 74 कॉलोनियों के लोगों को राहत मिलेगी। इन कॉलोनियों का कुछ हिस्सा वैध और कुछ हिस्सा अवैध श्रेणी में दर्ज है।
विकास शुल्क को लेकर भी मिली राहत
कैबिनेट ने विकास शुल्क के भुगतान को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधानों को मंजूरी दी है। जिन संपत्ति मालिकों ने वर्ष 1996 की अधिसूचना से पहले भवन निर्माण किया था और विकास शुल्क जमा नहीं कराया था, उन्हें उस समय लागू दरों के अनुसार शुल्क जमा करना होगा।