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पावर हाउस से जुड़ेंगे गांव से दूर बसे डेरे
Yamuna Nagar
Updated Thu, 12 Sep 2013 05:38 AM IST
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यमुनानगर। गांव से दूर एग्रीकल्चर फीडर से जुडे़ डेरों के लिए बिजली निगम की ओर से योजना तैयार की गई है। इसमें अब इन्हें सीधा पावर हाउस से जोड़ा जाएगा। इस योजना के तहत अगले माह तक काम शुरू हो जाएगा, जो एक साल तक पूरा होगा। डेरे पावर हाउस से जुड़ने से उन्हें गांव की तरह ज्यादा समय बिजली मिल पाएगी। यमुनानगर जिले में 500 के करीब डेरे हैं, जो एग्रीकल्चर लाइन से जुड़े होने से बिजली की समस्या से जूझते रहते हैं। बिजली निगम के अधिकारियों का कहना है कि योजना के तहत जल्द ही काम शुरू होगा। इन डेरों को भी अब गांव की तर्ज पर बिजली सप्लाई की जाएगी।
सीधा जुड़ेंगे पावर हाउस से
योजना के तहत डेरों के लिए पावर हाउस में ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा। पहले डेरों का लोड चेक किया जाएगा, लोड तय होने पर उसी के हिसाब से बिजली सप्लाई की जाएगी। अगर इस सप्लाई से नलकूप की मोटर चलाने का प्रयास या अन्य जल्द लोड बढ़ाने का प्रयास किया जाता है, तो सप्लाई कट जाएगी।
यह मिलेगा फायदा
गांव से दूर बसे डेरे एग्रीकल्चर फीडर से जुड़े होने से उन्हें बिजली की कम सप्लाई ही मिल पाती है। कई बार तो पूरा-पूरा दिन लाइट गुल रहती है। गांव से दूर बसे होने से लाइट के अभाव में उन्हें रात के अंधेरे में जीवन बिताना पड़ रहा है। कई बार अंधेरे का फायदा उठाकर चोर चोरी की घटना को अंजाम देते हैं। सीधा पावर हाउस से जुड़ने से उन्हें ज्यादा सप्लाई मिल पाएगी।
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परेशानी झेलनी पड़ रही
रणजीत सिंह, तिलक राज व प्रवीन का कहना है कि एग्रीकल्चर फीडर से जुड़े होने से दिन में पांच से सात घंटे ही बिजली मिल पाती है। रात के समय में अंधेरे में रहना पड़ता है। पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। अगर डेरों को गांव की तर्ज पर बिजली मिलती है, तो उन्हें फायदा होगा। लोगों को अंधेरे में नहीं रहना पड़ेगा।
कोट
डेरों के लिए योजना बनाई गई है। गांव के आसपास बसे डेरों को अब एग्रीकल्चर फीडर से हटाकर सीधा पावर हाउस से जोड़ा जाएगा। डेरों में लोड के हिसाब से ही सप्लाई भेजी जाएगी। इससे उन्हें ज्यादा सप्लाई मिल पाएगी। इस योजना को पूरा होने में एक साल का समय लग सकता है।
- एचपी शर्मा, एसई, बिजली निगम
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सीधा जुड़ेंगे पावर हाउस से
योजना के तहत डेरों के लिए पावर हाउस में ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा। पहले डेरों का लोड चेक किया जाएगा, लोड तय होने पर उसी के हिसाब से बिजली सप्लाई की जाएगी। अगर इस सप्लाई से नलकूप की मोटर चलाने का प्रयास या अन्य जल्द लोड बढ़ाने का प्रयास किया जाता है, तो सप्लाई कट जाएगी।
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यह मिलेगा फायदा
गांव से दूर बसे डेरे एग्रीकल्चर फीडर से जुड़े होने से उन्हें बिजली की कम सप्लाई ही मिल पाती है। कई बार तो पूरा-पूरा दिन लाइट गुल रहती है। गांव से दूर बसे होने से लाइट के अभाव में उन्हें रात के अंधेरे में जीवन बिताना पड़ रहा है। कई बार अंधेरे का फायदा उठाकर चोर चोरी की घटना को अंजाम देते हैं। सीधा पावर हाउस से जुड़ने से उन्हें ज्यादा सप्लाई मिल पाएगी।
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परेशानी झेलनी पड़ रही
रणजीत सिंह, तिलक राज व प्रवीन का कहना है कि एग्रीकल्चर फीडर से जुड़े होने से दिन में पांच से सात घंटे ही बिजली मिल पाती है। रात के समय में अंधेरे में रहना पड़ता है। पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। अगर डेरों को गांव की तर्ज पर बिजली मिलती है, तो उन्हें फायदा होगा। लोगों को अंधेरे में नहीं रहना पड़ेगा।
कोट
डेरों के लिए योजना बनाई गई है। गांव के आसपास बसे डेरों को अब एग्रीकल्चर फीडर से हटाकर सीधा पावर हाउस से जोड़ा जाएगा। डेरों में लोड के हिसाब से ही सप्लाई भेजी जाएगी। इससे उन्हें ज्यादा सप्लाई मिल पाएगी। इस योजना को पूरा होने में एक साल का समय लग सकता है।
- एचपी शर्मा, एसई, बिजली निगम