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बिजली सरप्लस फिर भी शेड्यूल के मुताबिक सप्लाई
Yamuna Nagar
Updated Thu, 01 Aug 2013 05:35 AM IST
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यमुनानगर। एक तरफ प्रदेश सरकार मांग से अधिक बिजली उत्पादन के कारण बिजली बेचने की जुगत में लगी है। दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी शेड्यूल के मुताबिक बिजली दी जा रही है। किसानों को इस बात का मलाल है कि अब तक किसान बिजली के लिए तरसते रहे हैं। वहीं अब बिजली होते हुए भी गांवों में बिजली कटौती की जा रही है। बिजली निगम के मुताबिक इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में तय शेड्यूल से अधिक बिजली सप्लाई की जा रही है। एग्रीकल्चर के लिए आठ घंटे बिजली सप्लाई का शेड्यूल है, लेकिन 11-12 घंटे तक बिजली सप्लाई की जा रही है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में डोमेस्टिक सप्लाई का शेड्यूल 14 घंटे का है, लेकिन प्रतिदिन औसत साढ़े 15 घंटे बिजली दी जा रही है। बिजली निगम अधिकारियों का कहना है कि इस बार ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं आई है।
रात भर सोने नहीं देते मच्छर
पर्याप्त बिजली होने के बावजूद गांवों को 24 घंटे बिजली न मिलना किसानाें को अखर रहा है। किसानाें का कहना है कि गांवों में भी लोग खासकर बच्चे उमस भरी गर्मी से बेहाल हैं। रात को मच्छरों की भरमार के कारण सोना दूभर हो जाता है। यदि इस बार बिजली की कमी नहीं है तो गांवों में 24 घंटे बिजली मिलनी चाहिए।
गांवों को भी 24 घंटेे बिजली का हक
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढू़नी का कहना है कि निसंदेह इस बार एग्रीकल्चर के लिए बिजली की कमी सामने नहीं आई है। लेकिन पर्याप्त बिजली होते हुए गांवों को 24 घंटे बिजली न देना शर्मनाक है। किसान कई सालों से गर्मियों में बिजली के लिए तरसते रहे हैं। ग्रामीण उपभोक्ता भी शहरी उपभोक्ताओं की तरह बिजली का बिल अदा करते हैं। उन्हें भी पूरी बिजली मिलने का अधिकार है। सरकार पहले गांवों को 24 घंटे बिजली दें, इसके बाद सरप्लस बिजली को बेंचे।
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रात भर सोने नहीं देते मच्छर
पर्याप्त बिजली होने के बावजूद गांवों को 24 घंटे बिजली न मिलना किसानाें को अखर रहा है। किसानाें का कहना है कि गांवों में भी लोग खासकर बच्चे उमस भरी गर्मी से बेहाल हैं। रात को मच्छरों की भरमार के कारण सोना दूभर हो जाता है। यदि इस बार बिजली की कमी नहीं है तो गांवों में 24 घंटे बिजली मिलनी चाहिए।
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गांवों को भी 24 घंटेे बिजली का हक
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढू़नी का कहना है कि निसंदेह इस बार एग्रीकल्चर के लिए बिजली की कमी सामने नहीं आई है। लेकिन पर्याप्त बिजली होते हुए गांवों को 24 घंटे बिजली न देना शर्मनाक है। किसान कई सालों से गर्मियों में बिजली के लिए तरसते रहे हैं। ग्रामीण उपभोक्ता भी शहरी उपभोक्ताओं की तरह बिजली का बिल अदा करते हैं। उन्हें भी पूरी बिजली मिलने का अधिकार है। सरकार पहले गांवों को 24 घंटे बिजली दें, इसके बाद सरप्लस बिजली को बेंचे।
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