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यमुना का रौद्र रूप, जलस्तर खतरे के निशान से आठ गुणा ज्यादा, अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़े

Mon, 19 Aug 2019 12:12 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 19 Aug 2019 12:12 AM IST
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24 hour rain delhi water
पहाड़ों और यमुना नदी क्षेत्र में बीते 24 घंटे से हो रही मूसलाधार बारिश से यमुना, सोम और पथराला नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। हथिनीकुंड बैराज पर यमुना का जलस्तर अब तक के सारे रिकार्ड तोड़कर रविवार शाम छह बजे आठ लाख 28 हजार क्यूसेक को पार कर गया, जो खतरे के निशान से आठ गुना ज्यादा है। इसके चलते सिंचाई विभाग ने यमुनानगर, करनाल, पानीपत और सोनीपत जिले में रेड अलर्ट जारी कर दिया है। यमुना की जद में आने वाले रिहायशी इलाके खाली करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही दिल्ली सरकार को भी अलर्ट कर दिया गया है। 72 घंटे के भीतर दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ आने की आशंका है। प्रशासन ने लोगों से यमुना की तरफ न जाने की अपील की है।
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सिंचाई विभाग के यमुना जल सेवा प्रभाग के एक्सईएन हरिदेव कांबोज ने बताया कि यमुनानगर में सोमनदी और पथराला नदी भी उफान पर है। इसके अलावा हरियाणा और यूपी के कई बड़े बरसाती नाले भी यमुना में गिरते हैं। ऐसे में दिल्ली पहुंचने वाला पानी आठ लाख क्यूसेक से भी काफी ज्यादा हो सकता है, क्योंकि इन नदी-नालों का जलस्तर भी खतरे के निशान से कई गुणा ज्यादा है।
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रविवार दोपहर को हाई अलर्ट जारी किया गया था, लेकिन शाम तक जलस्तर आठ लाख क्यूसेक के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। यमुनानगर के साथ-साथ तीन अन्य जिलों के लिए भी रेड अलर्ट जारी किया गया है। यमुना की जद में आने वाले रिहायशी क्षेत्रों को खाली करवाने को कहा गया है।
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मुकुल कुमार, डीसी, यमुनानगर
छह साल पहले आया था 8,06,464 क्यूसेक पानी
हथिनीकुंड बैराज बनने के बाद इससे पहले सबसे ज्यादा पानी 17 जून 2013 को 8,06,464 क्यूसेक दर्ज किया गया था, जबकि पिछले साल साढ़े छह लाख क्यूसेक पानी आया था। लगभग एक लाख क्यूसेक पानी आने पर खतरा माना जाता है। 1872 में अंग्रेजों द्वारा बनाए गए ताजेवाला हेडवर्क्स पर भी इतना ज्यादा पानी पहुंचने का कोई रिकार्ड नहीं है।
यमुनानगर में तबाही, 50 से ज्यादा गांव डूबे, 550 लोग फंसे
बाढ़ से यमुनानगर जिले के 50 से ज्यादा गांव डूब गए हैं। दो दर्जन से ज्यादा सड़कें और कई पुल भी बह गए हैं। इन गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है। इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं भी प्रभावित हैं। यमुनानगर शहर में दो से चार फीट पानी खड़ा है। यमुना से सटे लापरा गांव को खाली करवा लिया गया है। पौबारी गांव में यमुना का पानी घुसने से करीब 400 लोग फंस गए हैं। लोगों ने छत पर पनाह ली है। यमुनापार डेरों में रहने वाले 150 से अधिक लोग पानी में फंसे हुए हैं। प्रशासन ने अब तक फंसे लोगों को रेस्क्यू के लिए कोई व्यवस्था नहीं की है।

बस और रेल सेवाएं प्रभावित
कई सड़कें बह जाने से यमुनानगर में रोडवेज ने ग्रामीण क्षेत्र के रूटों से बसें हटा ली हैं। वहीं यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन पर पटरियों पर पानी भर गया। दुसानी गांव के पास रेल पटरियां धंस गईं। वहीं कलानौर और यमुनानगर के बीच ओएचई टूट गई, जिससे सुबह साढ़े नौ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक लगभग आठ घंटे तक रेल यातायात पूरी तरह से प्रभावित रहा।
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