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Yamuna Nagar News: तोरांवाला मंदिर में 15वीं सदी की भित्ति चित्रकला
Mon, 04 Nov 2024 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 04 Nov 2024 01:23 AM IST
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साहिल घई
साढौरा (यमुनानगर)।
तोरांवाला तालाब के तट स्थित प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर की भीतरी दीवारों पर पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण भित्ति चित्रकला देखी जा सकती है। इतिहासकारों के अनुसार यह भित्ति चित्रकला 15वीं व 16वीं सदी के दौरान उकेरी गई होगी।
कुरुक्षेत्र के इतिहासकार प्रो. योगेश्वर जोशी ने बताया कि भारत में चित्रकला की शुरुआत भित्ति चित्रकला से हुई थी। जबकि हरियाणा में भित्ति चित्रकला का विकास 15वीं व 16वीं सदी के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के समय हुआ था। इसी महत्वपूर्ण कला के कुछ नमूने वर्तमान में भी प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर में देखे जा सकते हैं।
इन भित्ति चित्रों में कलाकारों ने विभिन्न देवी देवताओं के विभिन्न रूपों को अलंकृत किया हुआ है। यहां मौजूद अधिकतर भित्ति चित्रों में भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं को दर्शाया हुआ है। इसके अलावा गणेश, ब्रह्मा, विष्णु, प्रह्लाद भगत के विभिन्न रूपों के चित्र भी यहां मौजूद हैं।
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मंदिर के अंदर सबसे ऊपर घोड़े पर सवार अनेकों योद्धाओं के भित्ति चित्र देखे जा सकते हैं। इन भित्ति चित्रों का अवलोकन करने पर इनको बनाने वाले कलाकारों की तन्मयता स्पष्ट नजर आती है। मंदिर जीर्णोद्धार समीति अध्यक्ष मुनीष गर्ग ने बताया कि वर्ष 2007 में इस प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार का काम शुरु किया गया था।
इस दौरान भी भित्ति चित्रकला के तौर पर मौजूद एतिहासिक विरासत को सहेजने के भरपूर प्रयास किए गए हैं। मंदिर में मौजूद देवी-देवताओं की भव्य मूर्तियों के अलावा इस भित्ति चित्रकला के दर्शन करने के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। वहीं, नगरपालिका द्वारा भी तोरांवाला तालाब की खोदाई करवाकर इसके सुंदरीकरण के प्रयास किए जा रहे हैं। जिससे इस जगह की पहचान धार्मिक के साथ पर्यटक स्थल के तौर पर होगी।
यद्यपि इस मंदिर की स्थापना के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। परंतु प्रो. योगेश्वर जोशी ने इन भित्ति चित्रों के आधार पर इस मंदिर को अत्यंत प्राचीन बताया है। उनका कहना है कि इस प्रकार के भित्ति चित्र व नक्काशी का काम 15वीं से 20वीं सदी तक होता था। इन भित्ति चित्रों को तैयार करने में ऐसे रंगों का प्रयोग होता था कि जिसकी चमक सदियों तक बरकरार रहती है। संवाद
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साढौरा (यमुनानगर)।
तोरांवाला तालाब के तट स्थित प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर की भीतरी दीवारों पर पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण भित्ति चित्रकला देखी जा सकती है। इतिहासकारों के अनुसार यह भित्ति चित्रकला 15वीं व 16वीं सदी के दौरान उकेरी गई होगी।
कुरुक्षेत्र के इतिहासकार प्रो. योगेश्वर जोशी ने बताया कि भारत में चित्रकला की शुरुआत भित्ति चित्रकला से हुई थी। जबकि हरियाणा में भित्ति चित्रकला का विकास 15वीं व 16वीं सदी के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के समय हुआ था। इसी महत्वपूर्ण कला के कुछ नमूने वर्तमान में भी प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर में देखे जा सकते हैं।
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इन भित्ति चित्रों में कलाकारों ने विभिन्न देवी देवताओं के विभिन्न रूपों को अलंकृत किया हुआ है। यहां मौजूद अधिकतर भित्ति चित्रों में भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं को दर्शाया हुआ है। इसके अलावा गणेश, ब्रह्मा, विष्णु, प्रह्लाद भगत के विभिन्न रूपों के चित्र भी यहां मौजूद हैं।
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मंदिर के अंदर सबसे ऊपर घोड़े पर सवार अनेकों योद्धाओं के भित्ति चित्र देखे जा सकते हैं। इन भित्ति चित्रों का अवलोकन करने पर इनको बनाने वाले कलाकारों की तन्मयता स्पष्ट नजर आती है। मंदिर जीर्णोद्धार समीति अध्यक्ष मुनीष गर्ग ने बताया कि वर्ष 2007 में इस प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार का काम शुरु किया गया था।
इस दौरान भी भित्ति चित्रकला के तौर पर मौजूद एतिहासिक विरासत को सहेजने के भरपूर प्रयास किए गए हैं। मंदिर में मौजूद देवी-देवताओं की भव्य मूर्तियों के अलावा इस भित्ति चित्रकला के दर्शन करने के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। वहीं, नगरपालिका द्वारा भी तोरांवाला तालाब की खोदाई करवाकर इसके सुंदरीकरण के प्रयास किए जा रहे हैं। जिससे इस जगह की पहचान धार्मिक के साथ पर्यटक स्थल के तौर पर होगी।
यद्यपि इस मंदिर की स्थापना के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। परंतु प्रो. योगेश्वर जोशी ने इन भित्ति चित्रों के आधार पर इस मंदिर को अत्यंत प्राचीन बताया है। उनका कहना है कि इस प्रकार के भित्ति चित्र व नक्काशी का काम 15वीं से 20वीं सदी तक होता था। इन भित्ति चित्रों को तैयार करने में ऐसे रंगों का प्रयोग होता था कि जिसकी चमक सदियों तक बरकरार रहती है। संवाद