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मैली यमुना: जहां से निकली वहीं से मैली हो रही पश्चिमी यमुना नहर
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यमुनानगर। दिल्ली और दक्षिण हरियाणा की जीवनदायिनी पश्चिमी यमुना नहर जहां से शुरू हुई है, वहीं से मैली हो रही है। यमुनानगर जिले में रोजाना करीब 100 क्यूसेक घरेलू अपशिष्ट यानी 2800 लीटर गंदा पानी प्रति सेकेंड इसमें मिक्स हो रहा है। सिंचाई और जल संसाधन विभाग द्वारा मार्च में यमुना नदी की निगरानी समिति ने जांच के बाद सरकार को रिपोर्ट भेजी है। जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्यों का खुलासा हुआ है। मामला उजागर होने के बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने आनन-फानन में नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी और रादौर नगर पालिका के ईओ, छछरौली, जगाधरी व रादौर के बीडीपीओ और पब्लिक हेल्थ विभाग के कार्यकारी अभियंता को हरियाणा नहर और जल निकासी अधिनियम, 1974 की धारा 58 के तहत नोटिस जारी किए हैं।
19 जगहों पर डाला जा रहा गंदा पानी
यमुना निगरानी कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद सिंचाई विभाग ने जांच की तो जिले के ग्रामीण और शहरी इलाकों में 19 स्थान ऐसे पाए गए जहां सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के सीवरेज व गंदे पानी सहित घरेलू अपशिष्ट को पश्चिमी यमुना नहर में बहाया जा रहा है। कई जगहों पर तो कचरे को नहर में जाने से रोकने के लिए कोई जाली भी नहीं लगाई गई। जहां नालों में स्क्रीन लगाई गई थी, वह भी पूरी तरह कचरे से भरी हुई मिली।
नहर में प्रतिबंधित है गंदा पानी डालना
पश्चिमी यमुना नहर में ट्रीटेड और अनुपचारित पानी की आपूर्ति पूरी तरह से प्रतिबंधित है। 7 अक्टूबर, 2016 को जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार कोई भी व्यक्ति गंगा नदी या उसकी सहायक नदियों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी अनुपचारित सीवरेज या मल कीचड़ का निर्वहन नहीं करेगा। इस नहर से दिल्ली को पानी की आपूर्ति के अलावा हरियाणा की पानी की 60 प्रतिशत आवश्यकता को पूरा किया जाता है।
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हरिदेव कंबोज कार्यकारी अभियंता, जल सेवा प्रभाग, दादूपुर ने कहा कि इस समय लगभग 17,000 क्यूसेक प्रति सेकेंड पानी पश्चिमी यमुना नहर में बहता है। 1 जुलाई से लगभग 18,000 क्यूसेक पानी नहर में छोड़ा जाएगा। दादूपुर हेड से लेकर रादौर तक 100 क्यूसेक गंदा पानी, जिसमें कचरा भी मिक्स है, इसमें बहाया जा रहा है। हमने संबंधित विभागों के अधिकारियों से गंदे पानी के नालों को डब्ल्यूजेसी में रोकने के लिए कहा था। जब अधिकारी कोई भी कार्रवाई करने में विफल रहे तो उन्हें नोटिस जारी किए हैं। ताकि नहर में घरेलू अपशिष्ट के बहाव को रोका जा सके।
यमुनानगर की डीसी आमना तस्नीम ने कहा कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जा रहा है और समस्या से निपटने के लिए कदम उठाए जाएंगे। मौजूदा एसटीपी के अलावा, और अधिक एसटीपी और ईटीपी भविष्य में स्थापित किए जाएंगे।
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19 जगहों पर डाला जा रहा गंदा पानी
यमुना निगरानी कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद सिंचाई विभाग ने जांच की तो जिले के ग्रामीण और शहरी इलाकों में 19 स्थान ऐसे पाए गए जहां सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के सीवरेज व गंदे पानी सहित घरेलू अपशिष्ट को पश्चिमी यमुना नहर में बहाया जा रहा है। कई जगहों पर तो कचरे को नहर में जाने से रोकने के लिए कोई जाली भी नहीं लगाई गई। जहां नालों में स्क्रीन लगाई गई थी, वह भी पूरी तरह कचरे से भरी हुई मिली।
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नहर में प्रतिबंधित है गंदा पानी डालना
पश्चिमी यमुना नहर में ट्रीटेड और अनुपचारित पानी की आपूर्ति पूरी तरह से प्रतिबंधित है। 7 अक्टूबर, 2016 को जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार कोई भी व्यक्ति गंगा नदी या उसकी सहायक नदियों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी अनुपचारित सीवरेज या मल कीचड़ का निर्वहन नहीं करेगा। इस नहर से दिल्ली को पानी की आपूर्ति के अलावा हरियाणा की पानी की 60 प्रतिशत आवश्यकता को पूरा किया जाता है।
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हरिदेव कंबोज कार्यकारी अभियंता, जल सेवा प्रभाग, दादूपुर ने कहा कि इस समय लगभग 17,000 क्यूसेक प्रति सेकेंड पानी पश्चिमी यमुना नहर में बहता है। 1 जुलाई से लगभग 18,000 क्यूसेक पानी नहर में छोड़ा जाएगा। दादूपुर हेड से लेकर रादौर तक 100 क्यूसेक गंदा पानी, जिसमें कचरा भी मिक्स है, इसमें बहाया जा रहा है। हमने संबंधित विभागों के अधिकारियों से गंदे पानी के नालों को डब्ल्यूजेसी में रोकने के लिए कहा था। जब अधिकारी कोई भी कार्रवाई करने में विफल रहे तो उन्हें नोटिस जारी किए हैं। ताकि नहर में घरेलू अपशिष्ट के बहाव को रोका जा सके।
यमुनानगर की डीसी आमना तस्नीम ने कहा कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जा रहा है और समस्या से निपटने के लिए कदम उठाए जाएंगे। मौजूदा एसटीपी के अलावा, और अधिक एसटीपी और ईटीपी भविष्य में स्थापित किए जाएंगे।