फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   डॉक्टरों की हड़ताल से अस्पतालों में इलाज के लिये भटकते रहे मरीज

डॉक्टरों की हड़ताल से अस्पतालों में इलाज के लिये भटकते रहे मरीज

Tue, 18 Jun 2019 12:44 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 18 Jun 2019 12:44 AM IST
विज्ञापन
डॉक्टरों की हड़ताल से अस्पतालों में इलाज के लिये भटकते रहे मरीज

विज्ञापन
पश्चिमी बंगाल में डॉक्टरों के ऊपर हुए जानलेवा हमले के विरोध की आग जिला में पहुंची। यहां 170 छोटे-बड़े अस्पतालों के 900 से अधिक डॉक्टर सड़कों पर उतर आये। ऐसे में अस्पताल डॉक्टरों से खाली हो गये। जिसके चलते जिला की पांच हजार से अधिक ओपीडी बंद रही। अस्पतालों में डॉक्टर न होने से मरीज व तीमारदार भटकते रहे। हालांकि डॉक्टर्स की तरफ से अस्पतालों के मेन गेट के बाहर हड़ताल होने का बैनर लगाया हुआ था, फिर लोग इलाज के लिये पहुंचे। यहां हड़ताल की सूचना मिलने पर उन्हें निराश वापस लौटना पड़ा।

150 ओटी हुई प्रभावित
हालांकि आईएमए के बैनर तले डॉक्टरों की हड़ताल रही। लेकिन इस दौरान केवल इमरजेंसी व रेफर व मरहम पट्टी केसों को ही देखा गया। जबकि सभी अस्पतालों की ओपीडी पूरी तरह से बंद रही। आईएमए के प्रधान डॉ. योगेश जिंदल के मुताबिक रोजाना की होने वाली 150 ओटी को बंद रखा गया। केवल इमरजेंसी ही हेंडल की गई। जिन जगहों पर एंबुलेंस की जरूरत थी वहां भेजी गई।
विज्ञापन


हड़ताल का अस्पताल आने पर पता लगा
गाबा अस्पताल में गांव कलावड़ गांव से आये बलविंद्र ने बताया कि वह अपनी माता संतोष को ओपीडी में दिखाने आया था। लेकिन यहां आने पर डॉक्टरों की हड़ताल होने का पता चला। अब मंगलवार को 24 किलोमीटर दूर से दोबारा आना होगा। हड़ताल के बारे में जानकारी न होने पर काफी परेशानी झेलनी पड़ी है। इसी तरह आशीर्वाद अस्पताल में मिल्क माजरा से आये मुकेश कुमार ने बताया कि वह ओपीडी में दिखाने के लिए बच्चे को लेकर आया, परंतु अस्पताल के स्टॉफ ने हड़ताल का हवाला देकर दिखाने से मना कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

बॉक्स
एकजुट हो निकाला रोष मार्च
बता दें जिला भर के सभी डॉक्टर ओपीडी बंद रख रोष प्रकट करने के लिये सोमवार को नेहरू पार्क पर इकट्ठा हुये। यहां से डॉक्टर हाथों में रोष स्लोगन लिए पैदल रोष मार्च निकालते हुए पंचायत भवन पहुंचे। इस रोष मार्च में जगह-जगह रुककर पश्चिमी बंगाल सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। डॉक्टरों की मांग थी कि हिंसा के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रीय कानून लाया जाया। यह कानून पोक्सो की तर्ज पर होना चाहिये, जिसमें कड़ी सजा हो।
बॉक्स
मंगलवार सुबह छह बजे तक रहेगी हड़ताल
हड़ताल के दौरान चिकित्सकों ने मंगलवार सुबह छह बजे तक हड़ताल को जारी रखने का निर्णय लिया है। इस दौरान कोई ओपीडी नहीं देखी जाएगी। सभी डॉक्टर्स काले बिल्ले लगाकर रखेंगे।
बॉक्स
इतनी यूनियनों के डॉक्टर रहे हड़ताल में शामिल
आईएमए के बैनर तले 900 से अधिक डॉक्टर हड़ताल रहे। इसमें आईएमए के 250, निमा व केमिस्ट के 300, डेंटल 200 व यमुनानगर व जगाधरी के अन्य यूनियन के 150 डॉक्टर हड़ताल में शामिल रहे। उधर, जहां प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी बंद रही, वहीं सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में इजाफा हुआ। उनकी ओपीडी की 20 फीसदी बढ़ गई। ऐसे में अस्पताल में ओपीडी के लिये भीड़ देखी गई।

वर्जन
हमें काम करने के लिए सुरक्षित माहौल चाहिए। वे काम करने से डर रहे हैं। आपातकालीन सेवाएं दे रहे हैं, यदि जल्द ही राष्ट्रीय कानून न बना तो वे काम ही बंद कर देंगे। वे रोजाना दबाव में रहते हैं। परिवार को भी और लोगों की तरह समय नहीं दे पाते। उन्होंने मांग रखी कि हिंसा करने वालों के खिलाफ पोक्सो जैसा कड़ा कानून बनना चाहिए। इस हड़ताल में 70 छोटे-बड़े अस्पतालों के 900 से अधिक डॉक्टर हड़ताल पर रहे और पांच हजार से अधिक ओपीडी बंद रही।
-डॉ. योगेश जिंदल, प्रधान, आईएमए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed