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पहली बार हाइवे पर किसानों की महापंचायत, डीसी के आश्वासन पर 13 जून तक धरना स्थगित

Fri, 07 Jun 2019 12:25 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 07 Jun 2019 12:25 AM IST
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पहली बार हाइवे पर किसानों की महापंचायत, डीसी के आश्वासन पर 13 जून तक धरना स्थगित
यमुनानगर। चंडीगढ़ में बुधवार को बेनतीजा रही वार्ता के बाद किसानों ने बढ़ा हुआ मुआवजा मिलने की मांग पर वीरवार को पहली बार हाईवे पर महापंचायत की। जिसमें भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी पहुंचे। महापंचायत में शामिल होने के लिए सुबह नौ बजे किसान पहुंचना शुरू हो गए। दोपहर तक उनकी संख्या साढे़ तीन सौ पार कर गई। वहीं स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन की तरफ से पुलिस फोर्स का भी इंतजाम किया गया। हालांकि किसानों ने महापंचायत में कोई बड़ा कदम नहीं उठाया, लेकिन पंचायत खत्म होने तक प्रशासन के हाथ पांव फूले रहे। यहां तक किसानों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए गुप्त विभाग की भी नजर रही।
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पहले ना, फिर धरना स्थगित
दोपहर डेढ़ बजे डीसी आमना तस्नीम और एसपी कुलदीप सिंह यादव किसानों के बीच पहुंचे। उन्होंने किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा दिलवाने का आश्वासन दिया। जिस पर किसान राजी हो गए। इसके बाद डीसी ने उन्हें धरना समाप्त करने की बात कही, लेकिन गुरनाम सिंह चढूनी नहीं माने। डीसी के दबाव के बाद किसानों ने पांच मिनट का समय मांगा और 25 सदस्यीय कमेटी से बातचीत करने के बाद 13 जून तक धरने को स्थगित करने का फैसला लिया। चढूनी ने कहा कि इसी तारीख को दोबारा से हाईवे पर महापंचायत होगी। यदि मुआवजा नहीं मिला तो उसके बाद किसान बड़ा कदम उठाएंगे।
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महापंचायत में बनाई बाईपास आंदोलन कमेटी
गुरनाम सिंह चढूनी की अध्यक्षता में बाइपास आंदोलन कमेटी बनाई गई। जिसमें गधौला के गुरविंद्र सिंह, लंडौरा के हरमिंद्र सिंह, मिल्क माजरा के सुरजीत सिंह, गधौली से करनैल सिंह, गोलनपुर से रिखी राम, बहादरपुर मंगत राम कपूर, रोड छप्पर के दविंद्र सिंह, कैल से हरदीप सिंह, रूलाखेड़ी से जगबीर सिंह, सुढैल से गुरनाम सिंह, सुढल से संदीप, गुगलों से रोहताश, खंडवा से राजेश, हरगढ़ के जसविंद्र सिंह, रमनदीप, करहेड़ा खुर्द के दिलबाग सिंह, पांजूपुर के महीपाल सिंह, तिगरी के राजेश, हरिपुर कांबोज के चंद्रपाल, कलानौर अमरीक सिंह, मंडौली के अब्दूल रातार, हरनौल के गुरमीत सिंह, मंडेबर से रणजीत सिंह समेत दो और सदस्यों को कमेटी में शामिल किया गया।
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इस शर्त को ठुकरा लिया था आंदोलन करने का फैसला
दरअसल, कैल से कलानौर तक बने 23 किमी. लंबे बाईपास हाईवे में 427 एकड़ जमीन एक्वायर की गई थी। जून 2018 में इस हाईवे बनकर तैयार हुआ। किसानों ने मुआवजे बढ़ाने की मांग को लेकर आर्बिट्रेटर के पारस केस किए थे। करीब छह माह पहले ही आर्बिट्रेटर ने किसानों की एक्वायर जमीन का प्रति एकड़ 17.50 लाख रुपये मुआवजा बढ़ाया है। यह बढ़ा हुआ मुआवजा एनएचएआई देने को तैयार नहीं है। एनएचएआई इस फैसले के खिलाफ कोर्ट में चला गया है। वहीं किसानों ने नलवी नहर में अधिग्रहित जमीन के मामले में हाईकोर्ट के आदेश और अन्य एरिया में अधिग्रहित जमीन के मुआवजे को आधार बनाकर कोर्ट में याचिका दायर की है। वहीं आर्बिट्रेटर के फैसले के अनुसार बढ़ा मुआवजा देने के लिए किसानों ने एनएचएआई के अधिकारियों ने किसानों के सामने शर्त रखी थी कि अगर किसान कोर्ट केस वापस लेकर यह लिखकर दें कि ये कोर्ट में मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर नहीं आएंगे तो उन्हें आर्बिट्रेटर के फैसले के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। इस शर्त को किसानों ने ठुकरा कर आंदोलन करने का फैसला लिया था।

-किसानों को उनका हक जरूर मिलेगा। एनएचएआई के अधिकारियों से बात की जा रही है। सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है। उम्मीद है कि जल्द ही किसानों के खाते में बढ़ी हुई धनराशि आ जाएगी।
-आमना तस्नीम, डीसी।
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