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मुआवजे की मांग को लेकर दूसरे दिन भी हाइवे पर डटे रहे किसान
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यमुनानगर। नवनिर्मित एनएच 344 कैल से कलानौर बाइपास पर बढ़े मुआवजे की मांग को लेकर मंगलवार को भी 28 गांवों के किसान धरने पर डटे रहे। सुबह नौ बजे किसानों का धरना शुरू हुआ जोकि शाम पांच बजे तक चला। इस दौरान किसानों ने नारेबाजी की। उधर, एसडीएम किसानों को धरना खत्म करने के लिए किसानों के पास जाकर मनाने की कोशिश कर चुके, परंतु किसानों ने बिना कोई बात माने धरने को जारी रखा। किसानों के अनुसार जब तक उन्हें बढ़ा हुआ मुआवजा या हाईकमान उनसे बात नहीं कर लेता वह धरने से नहीं उठेंगे।
छह जून को होगी महापंचायत
किसानों ने छह जून तक प्रशासन और हाईकमान को मसला हल करने का समय दिया है। इसके बाद किसान उसी दिन महापंचायत कर बड़ा कदम उठाएंगे। यह चेतावनी भाकियू के गुरनाम सिंह चढूनी सोमवार को प्रशासनिक अधिकारियों के सामने दे चुके हैं। तब किसानों ने धरने को जारी रखने का फैसला लिया है। किसान बलकार सिंह, जसविंद्र सिंह व हरपाल सुढल का कहना है कि बढ़ा मुआवजा उनका अधिकार है, इसके लिए वे कई बार सरकार को भी अवगत करवा चुके हैं किंतु कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
इतनी जमीन की गई थी अधिग्रहित
भाकियू के प्रदेश सचिव हरपाल सुढल ने बताया कि कैल बाइपास के निर्माण के लिए जिले के करीब ढाई सौ किसानों की 427 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी। साल 2013 में सरकार ने जमीन के हिसाब से किसानों को प्रति एकड़ 25 लाख, 30 लाख तथा 35 लाख रुपए का मुआवजा दिया था। लेकिन यह मुआवजा किसानों को नाकाफी लगा। जिस पर उन्होंने उचित मुआवजे की मांग की। इसके बाद यह आर्बिट्रेशन द्वारा 16 अक्तूबर 2018 को किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा देने का फैसला किया। इसके तहत प्रति एकड़ 42 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्णय था। कानूनी तौर पर सात दिन में पैसे देने का नियम है। परंतु फैसले के बाद छह माह बाद भी किसानों को उनका बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं दिया गया है। बता दें कैल से कलानौर तक 23 किमी. लंबा बाईपास जून 2018 में बनकर तैयार हुआ था। किसानों ने मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर आर्बिट्रेटर के पास केस किया था। करीब छह माह पहले ही आर्बिट्रेटर ने किसानों की एक्वायर जमीन का प्रति एकड़ 17.50 लाख रुपए मुआवजा बढ़ाया है। यह बढ़ा हुआ मुआवजा एनएचएआई दे नहीं रहा और एनएचएआई इस फैसले के खिलाफ कोर्ट में चला गया है।
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छह जून को होगी महापंचायत
किसानों ने छह जून तक प्रशासन और हाईकमान को मसला हल करने का समय दिया है। इसके बाद किसान उसी दिन महापंचायत कर बड़ा कदम उठाएंगे। यह चेतावनी भाकियू के गुरनाम सिंह चढूनी सोमवार को प्रशासनिक अधिकारियों के सामने दे चुके हैं। तब किसानों ने धरने को जारी रखने का फैसला लिया है। किसान बलकार सिंह, जसविंद्र सिंह व हरपाल सुढल का कहना है कि बढ़ा मुआवजा उनका अधिकार है, इसके लिए वे कई बार सरकार को भी अवगत करवा चुके हैं किंतु कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
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इतनी जमीन की गई थी अधिग्रहित
भाकियू के प्रदेश सचिव हरपाल सुढल ने बताया कि कैल बाइपास के निर्माण के लिए जिले के करीब ढाई सौ किसानों की 427 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी। साल 2013 में सरकार ने जमीन के हिसाब से किसानों को प्रति एकड़ 25 लाख, 30 लाख तथा 35 लाख रुपए का मुआवजा दिया था। लेकिन यह मुआवजा किसानों को नाकाफी लगा। जिस पर उन्होंने उचित मुआवजे की मांग की। इसके बाद यह आर्बिट्रेशन द्वारा 16 अक्तूबर 2018 को किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा देने का फैसला किया। इसके तहत प्रति एकड़ 42 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्णय था। कानूनी तौर पर सात दिन में पैसे देने का नियम है। परंतु फैसले के बाद छह माह बाद भी किसानों को उनका बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं दिया गया है। बता दें कैल से कलानौर तक 23 किमी. लंबा बाईपास जून 2018 में बनकर तैयार हुआ था। किसानों ने मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर आर्बिट्रेटर के पास केस किया था। करीब छह माह पहले ही आर्बिट्रेटर ने किसानों की एक्वायर जमीन का प्रति एकड़ 17.50 लाख रुपए मुआवजा बढ़ाया है। यह बढ़ा हुआ मुआवजा एनएचएआई दे नहीं रहा और एनएचएआई इस फैसले के खिलाफ कोर्ट में चला गया है।
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