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बाइपास के लिए अधिग्रहित की जमीन का बड़ा मुआवजा दिलाने को किसानों ने दिया तीन दिन का अल्टीमेटम 20-39-46
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नवनिर्मित एनएच 344 (पहले एनएच 73 था) के कैल कलानौर बाईपास के लिए अधिग्रहित की गई 28 गांव के करीब ढाई सौ किसानों को उनकी 427 एकड़ जमीन का बढ़ा हुआ मुआवजा छह माह से नहीं मिला है। मुआवजा न मिलने पर किसानों में एनएचएआई, सरकार व प्रशासन के खिलाफ भारी गुस्सा है। मुआवजा जल्द दिलाने की मांग को लेकर शुक्रवार को किसान भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में लघु सचिवालय पहुंचे। यहां किसानों ने एनएचएआई के खिलाफ अपना रोष प्रकट किया। किसानों ने डीसी आमना तस्नीम को लिखित में ज्ञापन देकर उनका बढ़ा हुआ मुआवजा दिलाने की मांग की। मुआवजा दिलाने के लिए किसानों ने प्रशासन को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। इस दौरान यदि बढ़ा हुआ मुआवजा किसानों को नहीं मिला तो 27 मई को किसान बाईपास पर महापंचायत करेंगे। जिसमें नेशनल हाइवे जाम करने या बड़ा आंदोलन करने का निर्णय लिया जाएगा।
अक्तूबर में साढ़े 42 लाख प्रति एकड़ देने का आया था फैसला
डीसी को दिए ज्ञापन में भाकियू प्रदेेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी, प्रदेश सचिव हरपाल सुढल, बलकार सिंह, जसविंद्र सिंह आदि ने बताया कि कैल कलानौर बाइपास के निर्माण के लिए जिले के करीब ढाई सौ किसानों की 427 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी। वर्ष 2013 में सरकार ने जमीन के हिसाब से किसानों को प्रति एकड़ 25 लाख, 30 लाख व 35 लाख का मुआवजा दिया था। लेकिन यह मुआवजा किसानों को नाकाफी लगा। जिसपर उन्होंने उचित मुआवजे की मांग की। इसके बाद यह केश आर्बिटेशन में पेंडिंग था। करीब छह साल बाद आर्बिटेशन द्वारा बीती 16 अक्तूबर 2018 को किसानों को बढ़ा हुआ देने का फैसला किया। इसके तहत प्रति एकड़ साढ़े 42 लाख मुआवजा देने का निर्णय था। कानूनी तौर पर सात दिन में पैमेंट देने का नियम है। लेकिन फैसले के छह माह बाद भी किसानों को उनका बड़ा हुआ मुआवजा नहीं दिया गया है। किसानों ने डीसी ने उनका बड़ा हुआ मुआवजा दिलाने की मांग की।
मुख्यमंत्री की मध्यस्ता के बाद बढ़ा था मुआवजा :
किसानों ने बताया कि अधिग्रहित की गई जमीन का मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री मनोहर लाल व एनएचएआई के अधिकारियों को लिखित में ज्ञापन दिए थे। लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं की गई थी। वर्ष 2018 में उन्होंने इस संबंध में एक बार फिर मुख्यमंत्री से बातचीत की थी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मामले में मध्यस्ता कर किसानों का मुआवजा बढ़ाने की बात कहीं थी। जिसके बाद आर्बिटेशन ने मुआवजा बढ़ाने का फैसला दिया था।
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पेमेंट न देकर एनएचएआई कमा रहा लाखों का ब्याज :
किसानों का कहना है कि आरबी टेशन द्वारा जो मुआवजा घोषित किया है। उसके अनुसार उन्हें पेमेंट जाए। भाकियू के प्रदेश सचिव हरपाल सिंह सुढल का कहना है कि किसानों का साढ़े सात सौ करोड़ रुपये से अधिक बड़ा हुआ मुआवजा बनता है। जो एनएचएआई को देना है। लेकिन एनएचएआई किसानों की यह पैमेंट नहीं देकर रोज लाखों रुपये का ब्याज कमा रहा है। यदि किसान ब्याज समेत अपना हक मांगने लगे तो यह पेमेंट कई अधिक बढ़ जाएगी।
तीन दिन बाद करेंगे हाइवे जाम :
डीसी को दिए ज्ञापन में किसानों ने प्रशासन को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। जिसमें चेतावनी दी गई है कि यदि उनका बड़ा हुआ मुआवजा नहीं दिया गया तो वे 27 मई को सुढैल के पास बाइपास पर महापंचायत करेंगे। जिसमें 28 गांवों के किसान शामिल होंगे। महापंचायत में किसान बड़ा आंदोलन करने का निर्णय लेंगे। इसमें बाईपास जाम करने समेत कोई भी निर्णय लिया जा सकता है।
डीसी आमना तस्नीम का कहना है कि मामले में एनएचएआई के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। जिसके बाद किसानों को उनका उचित मुआवजा दिलाया जाएगा। किसी भी किसान का हक नहीं मारा जाएगा।
अक्तूबर में साढ़े 42 लाख प्रति एकड़ देने का आया था फैसला
डीसी को दिए ज्ञापन में भाकियू प्रदेेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी, प्रदेश सचिव हरपाल सुढल, बलकार सिंह, जसविंद्र सिंह आदि ने बताया कि कैल कलानौर बाइपास के निर्माण के लिए जिले के करीब ढाई सौ किसानों की 427 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी। वर्ष 2013 में सरकार ने जमीन के हिसाब से किसानों को प्रति एकड़ 25 लाख, 30 लाख व 35 लाख का मुआवजा दिया था। लेकिन यह मुआवजा किसानों को नाकाफी लगा। जिसपर उन्होंने उचित मुआवजे की मांग की। इसके बाद यह केश आर्बिटेशन में पेंडिंग था। करीब छह साल बाद आर्बिटेशन द्वारा बीती 16 अक्तूबर 2018 को किसानों को बढ़ा हुआ देने का फैसला किया। इसके तहत प्रति एकड़ साढ़े 42 लाख मुआवजा देने का निर्णय था। कानूनी तौर पर सात दिन में पैमेंट देने का नियम है। लेकिन फैसले के छह माह बाद भी किसानों को उनका बड़ा हुआ मुआवजा नहीं दिया गया है। किसानों ने डीसी ने उनका बड़ा हुआ मुआवजा दिलाने की मांग की।
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मुख्यमंत्री की मध्यस्ता के बाद बढ़ा था मुआवजा :
किसानों ने बताया कि अधिग्रहित की गई जमीन का मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री मनोहर लाल व एनएचएआई के अधिकारियों को लिखित में ज्ञापन दिए थे। लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं की गई थी। वर्ष 2018 में उन्होंने इस संबंध में एक बार फिर मुख्यमंत्री से बातचीत की थी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मामले में मध्यस्ता कर किसानों का मुआवजा बढ़ाने की बात कहीं थी। जिसके बाद आर्बिटेशन ने मुआवजा बढ़ाने का फैसला दिया था।
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पेमेंट न देकर एनएचएआई कमा रहा लाखों का ब्याज :
किसानों का कहना है कि आरबी टेशन द्वारा जो मुआवजा घोषित किया है। उसके अनुसार उन्हें पेमेंट जाए। भाकियू के प्रदेश सचिव हरपाल सिंह सुढल का कहना है कि किसानों का साढ़े सात सौ करोड़ रुपये से अधिक बड़ा हुआ मुआवजा बनता है। जो एनएचएआई को देना है। लेकिन एनएचएआई किसानों की यह पैमेंट नहीं देकर रोज लाखों रुपये का ब्याज कमा रहा है। यदि किसान ब्याज समेत अपना हक मांगने लगे तो यह पेमेंट कई अधिक बढ़ जाएगी।
तीन दिन बाद करेंगे हाइवे जाम :
डीसी को दिए ज्ञापन में किसानों ने प्रशासन को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। जिसमें चेतावनी दी गई है कि यदि उनका बड़ा हुआ मुआवजा नहीं दिया गया तो वे 27 मई को सुढैल के पास बाइपास पर महापंचायत करेंगे। जिसमें 28 गांवों के किसान शामिल होंगे। महापंचायत में किसान बड़ा आंदोलन करने का निर्णय लेंगे। इसमें बाईपास जाम करने समेत कोई भी निर्णय लिया जा सकता है।
डीसी आमना तस्नीम का कहना है कि मामले में एनएचएआई के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। जिसके बाद किसानों को उनका उचित मुआवजा दिलाया जाएगा। किसी भी किसान का हक नहीं मारा जाएगा।