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जंगल से निकलकर हाइवे पर गजराज, आधा घंटे तक रूके रहे वाहन
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जंगल से निकलकर हाईवे पर आए गजराज, आधा घंटा थमे वाहन
खिजराबाद : कलेसर नेशनल पार्क से मंगलवार सुबह गजराज का जोड़ा नेशनल हाईवे पर आ गया। दोनों हाथी सड़क के बीचों-बीच टहलने लगे। हाईवे पर हाथियों को घूमते देख हादसे के डर से चालकों ने वाहन वापस मोड़ लिए और कई किलोमीटर दूर चले गए। करीब आधा घंटा तक हाथियों का जोड़ा हाईवे पर ही टहल कदमी करता रहा। इस दौरान वाहनों में सवार कई लोगों ने वीडियो भी बनाए। हालांकि हाथियों के इस जोड़े द्वारा किसी वाहन चालक या राहगीरों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। बाद में फिर से जंगल में चले गए। तब जाकर यातायात चालू हुआ। यह पहला मौका नहीं था, जब जंगल से निकल कर गजराज जगाधरी पावंटा साहिब हाइवे पर आएं हों। एक सप्ताह से हाथी किसी भी वक्त सड़क पर पहुंच रहे हैं। जंगल से हाथी के अलावा तेंदुए, हिरण, जंगली बिलाव समेत अन्य जानवर भी रास्ता भटक कर हाईवे पर आ जाते हैं।
वन्यप्राणी विभाग ने संख्या छह बताई
गजराज कई बार वन्यप्राणी विभाग के कर्मचारियों के पीछे भी लग चुके हैं तो कई दफा नजदीकी गांव में तबाही मचा चुके हैं। जंगल में रह रहे हाथी मैदानी इलाकों में किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। कलेसर नेशनल पार्क में इस समय छह से ज्यादा हाथी देखे जा चुके हैं। हालांकि इनकी सही संख्या बताना विभाग के लिए भी मुश्किल है। क्योंकि कलेसर और हिमाचल प्रदेश के जंगल आपस में जुड़े हैं। दोनों जंगलों के जानवर अकसर इधर-उधर आते-जाते रहते हैं।
जंगली हाथियों से किसानों बढ़ी परेशानी
हाथियों के जंगल में आने से किसान काफी परेशान हैं। क्योंकि ये झुंड में आते हैं। जिस खेत में घुस जाएं, उसे पूरा तबाह कर देते हैं। अगर इन्हें भगाने की कोशिश की जाएं तो पीछे लग जाते हैं। वैसे तो गजराज के लिए जंगल में पर्याप्त मात्रा में पानी और घास है। दिन में भी गजराज को तालाब में मस्ती करते देखा जा सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें रात और दिन में पेड़ों पर चढ़कर हाथी से रखवाली करनी पड़ती है ताकि फसलों को बचाया जा सके। ग्रामीणों ने बताया कि गर्मियों के दिनों में जंगल में रहने वाले हाथी किसानों की फसलों को अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। ग्रामीणों ने विभाग से मांग की है कि जंगल के पास वाले मैदानी इलाकों में गश्त बढ़ाई जाए जिससे जंगली जानवर किसानों की फसलों का अधिक नुकसान ना कर पाएं।
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वर्जन
हाथी बहुत ही शांत स्वभाव का जानवर होता है। यह तभी हमला करता है जब कोई इंसान इस पर हमला करता है या फिर इसके बच्चे इसके साथ हों। हाथी बच्चों की सुरक्षा के लिए भी हमला कर देता है। यदि नेशनल हाईवे या जंगल में सफारी के दौरान हाथी मिल जाए तो इसे जाने दें। यदि उस पर कोई पत्थर आदि फेंकेंगे तो वह हमला कर देगा।
-राजेश चहल, जिला निरीक्षक, वन्य प्राणी विभाग
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खिजराबाद : कलेसर नेशनल पार्क से मंगलवार सुबह गजराज का जोड़ा नेशनल हाईवे पर आ गया। दोनों हाथी सड़क के बीचों-बीच टहलने लगे। हाईवे पर हाथियों को घूमते देख हादसे के डर से चालकों ने वाहन वापस मोड़ लिए और कई किलोमीटर दूर चले गए। करीब आधा घंटा तक हाथियों का जोड़ा हाईवे पर ही टहल कदमी करता रहा। इस दौरान वाहनों में सवार कई लोगों ने वीडियो भी बनाए। हालांकि हाथियों के इस जोड़े द्वारा किसी वाहन चालक या राहगीरों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। बाद में फिर से जंगल में चले गए। तब जाकर यातायात चालू हुआ। यह पहला मौका नहीं था, जब जंगल से निकल कर गजराज जगाधरी पावंटा साहिब हाइवे पर आएं हों। एक सप्ताह से हाथी किसी भी वक्त सड़क पर पहुंच रहे हैं। जंगल से हाथी के अलावा तेंदुए, हिरण, जंगली बिलाव समेत अन्य जानवर भी रास्ता भटक कर हाईवे पर आ जाते हैं।
वन्यप्राणी विभाग ने संख्या छह बताई
गजराज कई बार वन्यप्राणी विभाग के कर्मचारियों के पीछे भी लग चुके हैं तो कई दफा नजदीकी गांव में तबाही मचा चुके हैं। जंगल में रह रहे हाथी मैदानी इलाकों में किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। कलेसर नेशनल पार्क में इस समय छह से ज्यादा हाथी देखे जा चुके हैं। हालांकि इनकी सही संख्या बताना विभाग के लिए भी मुश्किल है। क्योंकि कलेसर और हिमाचल प्रदेश के जंगल आपस में जुड़े हैं। दोनों जंगलों के जानवर अकसर इधर-उधर आते-जाते रहते हैं।
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जंगली हाथियों से किसानों बढ़ी परेशानी
हाथियों के जंगल में आने से किसान काफी परेशान हैं। क्योंकि ये झुंड में आते हैं। जिस खेत में घुस जाएं, उसे पूरा तबाह कर देते हैं। अगर इन्हें भगाने की कोशिश की जाएं तो पीछे लग जाते हैं। वैसे तो गजराज के लिए जंगल में पर्याप्त मात्रा में पानी और घास है। दिन में भी गजराज को तालाब में मस्ती करते देखा जा सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें रात और दिन में पेड़ों पर चढ़कर हाथी से रखवाली करनी पड़ती है ताकि फसलों को बचाया जा सके। ग्रामीणों ने बताया कि गर्मियों के दिनों में जंगल में रहने वाले हाथी किसानों की फसलों को अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। ग्रामीणों ने विभाग से मांग की है कि जंगल के पास वाले मैदानी इलाकों में गश्त बढ़ाई जाए जिससे जंगली जानवर किसानों की फसलों का अधिक नुकसान ना कर पाएं।
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हाथी बहुत ही शांत स्वभाव का जानवर होता है। यह तभी हमला करता है जब कोई इंसान इस पर हमला करता है या फिर इसके बच्चे इसके साथ हों। हाथी बच्चों की सुरक्षा के लिए भी हमला कर देता है। यदि नेशनल हाईवे या जंगल में सफारी के दौरान हाथी मिल जाए तो इसे जाने दें। यदि उस पर कोई पत्थर आदि फेंकेंगे तो वह हमला कर देगा।
-राजेश चहल, जिला निरीक्षक, वन्य प्राणी विभाग