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देशों के बावजूद दिव्यांग कर्मचारियों को नहीं दी जा रही पदोन्नति
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कोर्ट के आदेश के बाद भी दिव्यांगों को नहीं मिल रही पदोन्नति
जठलाना। कोर्ट के आदेशों के बावजूद कई विभागों में दिव्यांग कर्मचारियों को नियम के अनुसार पदोन्नति नहीं दी गई है। जिस कारण प्रदेश के 200 से अधिक दिव्यांग कर्मचारियों में रोष है। पदोन्नति न देने के मामले में स्वास्थ्य विभाग सबसे पीछे है। स्वास्थ्य विभाग में 40 से अधिक दिव्यांग डॉक्टरों को कोर्ट के आदेश के अनुसार अपनी पदोन्नति का वर्षों से इंतजार है। उनमें सरकारी अस्पताल नाहरपुर की डॉक्टर सुशीला सैनी भी शामिल है। जिन्हें वर्षों पहले नियम के अनुसार दिव्यांग होने के कारण अब तक पदोन्नति देकर एसएमओ बना दिया जाना चाहिए था। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण उन्हें अभी तक एसएमओ नहीं बनाया गया है। विभाग की लापरवाही का खामियाजा डॉ. सुशीला सैनी को भुगतना पड़ रहा है। इसी प्रकार दूसरे सरकारी दिव्यांग डॉक्टर भी विभाग की लचर कार्यप्रणाली का खामियाजा भुगत रहे हैं। डॉ. सुशीला सैनी ने बताया कि 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने शारीरिक रूप से दिव्यांग कर्मचारियों को तीन फीसदी का कोटा पदोन्नति के लिए निर्धारित किया था। यह सभी विभागों में लागू होना था, लेकिन इसे आज तक लागू नहीं किया जा सका है। कुछ विभागों ने इसे लागू कर दिया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग आज भी कोर्ट के आदेश को लागू नहीं कर पाया है। जिस कारण दिव्यांग कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिल पाया है। जिसके लिए विभाग जिम्मेदार है।
विभाग की ओर से जल्द दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ दिया जाएगा। जल्द ही कोर्ट के आदेश के अनुसार उन्हें पदोन्नति मिल जाएगी। -कुलदीप सिंह, सिविल सर्जन
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जठलाना। कोर्ट के आदेशों के बावजूद कई विभागों में दिव्यांग कर्मचारियों को नियम के अनुसार पदोन्नति नहीं दी गई है। जिस कारण प्रदेश के 200 से अधिक दिव्यांग कर्मचारियों में रोष है। पदोन्नति न देने के मामले में स्वास्थ्य विभाग सबसे पीछे है। स्वास्थ्य विभाग में 40 से अधिक दिव्यांग डॉक्टरों को कोर्ट के आदेश के अनुसार अपनी पदोन्नति का वर्षों से इंतजार है। उनमें सरकारी अस्पताल नाहरपुर की डॉक्टर सुशीला सैनी भी शामिल है। जिन्हें वर्षों पहले नियम के अनुसार दिव्यांग होने के कारण अब तक पदोन्नति देकर एसएमओ बना दिया जाना चाहिए था। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण उन्हें अभी तक एसएमओ नहीं बनाया गया है। विभाग की लापरवाही का खामियाजा डॉ. सुशीला सैनी को भुगतना पड़ रहा है। इसी प्रकार दूसरे सरकारी दिव्यांग डॉक्टर भी विभाग की लचर कार्यप्रणाली का खामियाजा भुगत रहे हैं। डॉ. सुशीला सैनी ने बताया कि 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने शारीरिक रूप से दिव्यांग कर्मचारियों को तीन फीसदी का कोटा पदोन्नति के लिए निर्धारित किया था। यह सभी विभागों में लागू होना था, लेकिन इसे आज तक लागू नहीं किया जा सका है। कुछ विभागों ने इसे लागू कर दिया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग आज भी कोर्ट के आदेश को लागू नहीं कर पाया है। जिस कारण दिव्यांग कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिल पाया है। जिसके लिए विभाग जिम्मेदार है।
विभाग की ओर से जल्द दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ दिया जाएगा। जल्द ही कोर्ट के आदेश के अनुसार उन्हें पदोन्नति मिल जाएगी। -कुलदीप सिंह, सिविल सर्जन
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