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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिलने के बाद भी जर्जर हालात, रोजाना 350 ओपीडी, मरीज हो रहे बेहाल
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पेज तीन की लीड
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिलने के बाद भी जर्जर हालात, रोजाना 350 ओपीडी, मरीज हो रहे बेहाल
1974 में बनी थी बिल्डिंग, अस्पताल में कर्मचारियों का भी टोटा
अमर उजाला ब्यूरो
खिजराबाद। 1974 में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बिल्डिंग बनी थी। ऐसे में अस्पताल को बने 45 साल हो चुके। यहां तक केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिले भी तीन साल हो चुके हैं। लेकिन अस्पताल पुरानी जर्जर बिल्डिंग में ही चल रहा है। ऐसे में विभाग को यहां आने वाली 350 ओपीडी का भी ख्याल नहीं। ऐसे में जर्जर हो चुका अस्पताल कभी भी ढह सकता है। इतना ही नहीं यहां स्टाफ का भी भारी टोटा है। ऐसे में मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
बॉक्स
30 बेड का होगा सरकारी अस्पताल
खिजराबाद के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा तो मिल गया और इसको छछरौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की तर्ज पर 30 बेड का बनाया जाएगा और इसमें हर प्रकार की सुविधा मरीज को मिलेगी। राज्य सरकार द्वारा इसके लिए लगभग पांच करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है और इसके लिए सरकार द्वारा चिकित्सकों और अन्य स्टाफ के लिए भी मंजूरी प्रदान कर दी गई है। आने वाले तीन माह में खिजराबाद सरकारी अस्पताल के विस्तारीकरण का कार्य शुरू हो जाएगा।
बॉक्स
अस्पताल में कुछ इस तरह से खाली पड़े पद
मेडिकल ऑफिसर छह होने चाहिए लेकिन है दो।
फार्मासिस्ट के दो पद और दोनों खाली।
रेडियोलोजिस्ट का एक पद स्वीकृत लेकिन वह भी खाली।
क्लर्क का एक पद है।
लैब टेक्निशियन के तीन पद जिनमें से दो भरे हुए और एक खाली।
एएनएम के छह पद स्वीकृत हैं।
एमपीएचडब्ल्यू के छह पद स्वीकृत लेकिन वह भी खाली।
स्टाफ नर्स के छह पद स्वीकृत लेकिन है एक भी नहीं।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद भरे हुए हैं।
स्वीपर के दो पदों में से एक खाली।
स्टेनो का एक पद वो भी खाली।
बॉक्स
एक्स रे मशीन भी फांक रही धूल
इतना ही नहीं अस्पताल में एक एक्स रे मशीन है लेकिन वह भी धूल फांक रही है। क्योंकि मशीन को चलाने वाला नहीं है। ऐसे में मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में जाकर एक्स रे करवाना पड़ रहा है ऐसे में उनकी जेबें भी ढीली हो रही। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि यदि अस्पताल में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए तो काफी राहत मिलेगी। लेकिन यहां तो सालों से स्टाफ का टोटा पड़ा हुआ है।
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वर्जन
केंद्र के विस्तार का कार्य चार माह में शुरू हो जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से बजट और स्टाफ के लिए मंजूरी मिल गई है। टेंडर अलॉट के बाद इसके नए भवन का निर्माण शुरू हो जाएगा।
-डॉ. कुलदीप सिंह, सीएमओ।
फोटो नंबर 27
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिलने के बाद भी जर्जर हालात, रोजाना 350 ओपीडी, मरीज हो रहे बेहाल
1974 में बनी थी बिल्डिंग, अस्पताल में कर्मचारियों का भी टोटा
अमर उजाला ब्यूरो
खिजराबाद। 1974 में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बिल्डिंग बनी थी। ऐसे में अस्पताल को बने 45 साल हो चुके। यहां तक केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिले भी तीन साल हो चुके हैं। लेकिन अस्पताल पुरानी जर्जर बिल्डिंग में ही चल रहा है। ऐसे में विभाग को यहां आने वाली 350 ओपीडी का भी ख्याल नहीं। ऐसे में जर्जर हो चुका अस्पताल कभी भी ढह सकता है। इतना ही नहीं यहां स्टाफ का भी भारी टोटा है। ऐसे में मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
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30 बेड का होगा सरकारी अस्पताल
खिजराबाद के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा तो मिल गया और इसको छछरौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की तर्ज पर 30 बेड का बनाया जाएगा और इसमें हर प्रकार की सुविधा मरीज को मिलेगी। राज्य सरकार द्वारा इसके लिए लगभग पांच करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है और इसके लिए सरकार द्वारा चिकित्सकों और अन्य स्टाफ के लिए भी मंजूरी प्रदान कर दी गई है। आने वाले तीन माह में खिजराबाद सरकारी अस्पताल के विस्तारीकरण का कार्य शुरू हो जाएगा।
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अस्पताल में कुछ इस तरह से खाली पड़े पद
मेडिकल ऑफिसर छह होने चाहिए लेकिन है दो।
फार्मासिस्ट के दो पद और दोनों खाली।
रेडियोलोजिस्ट का एक पद स्वीकृत लेकिन वह भी खाली।
क्लर्क का एक पद है।
लैब टेक्निशियन के तीन पद जिनमें से दो भरे हुए और एक खाली।
एएनएम के छह पद स्वीकृत हैं।
एमपीएचडब्ल्यू के छह पद स्वीकृत लेकिन वह भी खाली।
स्टाफ नर्स के छह पद स्वीकृत लेकिन है एक भी नहीं।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद भरे हुए हैं।
स्वीपर के दो पदों में से एक खाली।
स्टेनो का एक पद वो भी खाली।
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एक्स रे मशीन भी फांक रही धूल
इतना ही नहीं अस्पताल में एक एक्स रे मशीन है लेकिन वह भी धूल फांक रही है। क्योंकि मशीन को चलाने वाला नहीं है। ऐसे में मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में जाकर एक्स रे करवाना पड़ रहा है ऐसे में उनकी जेबें भी ढीली हो रही। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि यदि अस्पताल में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए तो काफी राहत मिलेगी। लेकिन यहां तो सालों से स्टाफ का टोटा पड़ा हुआ है।
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वर्जन
केंद्र के विस्तार का कार्य चार माह में शुरू हो जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से बजट और स्टाफ के लिए मंजूरी मिल गई है। टेंडर अलॉट के बाद इसके नए भवन का निर्माण शुरू हो जाएगा।
-डॉ. कुलदीप सिंह, सीएमओ।
फोटो नंबर 27