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-अधिग्रहित जमीन की बजाय दूसरी जमीन पर बना दी सड़क, आठ साल कोर्ट के चक्कर काटने के बाद किसान को मिला न्याय
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अधिग्रहित जमीन की बजाय दूसरी जमीन पर बना दी सड़क, आठ साल कोर्ट के चक्कर काटने के बाद किसान को मिला न्याय
नौ साल पहले बनाई गई थी सड़क, किसानों को न मुआवजा दिया गया और न ही बदले में जमीन
-सफिलपुर से रंजीतपुर सड़क पर बुधवार को कब्जा लेंगे किसान
यमुनानगर। नौ साल पहले पीडब्लयूडी विभाग के अधिकारियों ने अधिग्रहित जमीन की बजाय खेती की जमीन में साढ़े तीन किमी लंबी सड़क बना दी। किसानों को न तो मुआवजा दिया गया और न ही बदले में जमीन। एक किसान ने अपना हक लेने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। आठ साल कोर्ट के चक्कर काटने के बाद न्याय मिला। अब किसान अपनी उसी जमीन पर कब्जा लेगा जिसका वो हकदार हैं। कोर्ट ने प्रशासन को किसान को कब्जा दिलाने की तारीख भी निर्धारित कर दी है। मजे की बात है विभाग ने बिना किसी की परमिशन और बिना किसानों को मुआवजा दिए यह सड़क बना दी। जिससे पचास से ज्यादा किसान प्रभावित हैं, क्योंकि उनकी जमीन भी इसकी चपेट में आ गई। किसानों का कहना है कि जहां सड़क बनाई जानी थी, वहां कुछ अन्य लोगों का कब्जा है।
बॉक्स
अपनी जमीन के लिए कोर्ट में लड़ी लंबी लड़ाई
जमीन की मालकिन जयवंती ने बताया कि सफीलपुर व मुगलवाली के बीच उनकी जमीन है। करीब नौ साल पहले पीब्डल्यूडी विभाग ने बिना मुआवजा दिए उसकी करीब दो कनाल जमीन पर सड़क बना दी। अपनी जमीन वापस पाने के लिए उसने बिलासपुर कोर्ट में नवंबर 2010 में गुहार लगाई। यहां से 30 जनवरी 2014 को फैसला उसके हक में आया। इसके बाद पीडब्लयूडी विभाग ने सेशन कोर्ट में अपील कर दी। यहां भी फैसला किसान के हक में आया। इसके बाद पीडब्ल्यूडी विभाग ने हाईकोर्ट में अपील की। जिसका फैसला भी किसान के हक में हुआ। जयवंती ने बताया कि सभी जगह से कोर्ट केस जीतने के बाद उन्होंने बिलासपुर कोर्ट में कब्जा लेने की अपील की। जिसमें कोर्ट ने 25 जनवरी से पहले कब्जा दिलाने के आदेश दिए।
वर्जन
हमने पंचायती राज को इसके बारे में बात की है। वे हमें जगह की डी मार्केशन कर देंगे। उसके बाद हम दूसरी तरह से रास्ता बनाएंगे। कोर्ट ने 25 जनवरी तक कब्जा दिलाने के आदेश दिए हैं।-सुनील, एसडीओ
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नौ साल पहले बनाई गई थी सड़क, किसानों को न मुआवजा दिया गया और न ही बदले में जमीन
-सफिलपुर से रंजीतपुर सड़क पर बुधवार को कब्जा लेंगे किसान
यमुनानगर। नौ साल पहले पीडब्लयूडी विभाग के अधिकारियों ने अधिग्रहित जमीन की बजाय खेती की जमीन में साढ़े तीन किमी लंबी सड़क बना दी। किसानों को न तो मुआवजा दिया गया और न ही बदले में जमीन। एक किसान ने अपना हक लेने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। आठ साल कोर्ट के चक्कर काटने के बाद न्याय मिला। अब किसान अपनी उसी जमीन पर कब्जा लेगा जिसका वो हकदार हैं। कोर्ट ने प्रशासन को किसान को कब्जा दिलाने की तारीख भी निर्धारित कर दी है। मजे की बात है विभाग ने बिना किसी की परमिशन और बिना किसानों को मुआवजा दिए यह सड़क बना दी। जिससे पचास से ज्यादा किसान प्रभावित हैं, क्योंकि उनकी जमीन भी इसकी चपेट में आ गई। किसानों का कहना है कि जहां सड़क बनाई जानी थी, वहां कुछ अन्य लोगों का कब्जा है।
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अपनी जमीन के लिए कोर्ट में लड़ी लंबी लड़ाई
जमीन की मालकिन जयवंती ने बताया कि सफीलपुर व मुगलवाली के बीच उनकी जमीन है। करीब नौ साल पहले पीब्डल्यूडी विभाग ने बिना मुआवजा दिए उसकी करीब दो कनाल जमीन पर सड़क बना दी। अपनी जमीन वापस पाने के लिए उसने बिलासपुर कोर्ट में नवंबर 2010 में गुहार लगाई। यहां से 30 जनवरी 2014 को फैसला उसके हक में आया। इसके बाद पीडब्लयूडी विभाग ने सेशन कोर्ट में अपील कर दी। यहां भी फैसला किसान के हक में आया। इसके बाद पीडब्ल्यूडी विभाग ने हाईकोर्ट में अपील की। जिसका फैसला भी किसान के हक में हुआ। जयवंती ने बताया कि सभी जगह से कोर्ट केस जीतने के बाद उन्होंने बिलासपुर कोर्ट में कब्जा लेने की अपील की। जिसमें कोर्ट ने 25 जनवरी से पहले कब्जा दिलाने के आदेश दिए।
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हमने पंचायती राज को इसके बारे में बात की है। वे हमें जगह की डी मार्केशन कर देंगे। उसके बाद हम दूसरी तरह से रास्ता बनाएंगे। कोर्ट ने 25 जनवरी तक कब्जा दिलाने के आदेश दिए हैं।-सुनील, एसडीओ
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