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नया साल पैकेज,

Mon, 31 Dec 2018 11:47 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 31 Dec 2018 11:47 PM IST
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नया साल पैकेज,
ये प्रोजेक्ट पूरे हो गए तो स्मार्ट सिटी से भी स्मार्ट हो जाएगा अपना शहर
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हरियाणा में नए साल पर यमुनानगर में पड़ी सूर्य की पहली किरण
लीड
नया साल
इंट्रो
-प्रदेश में नए साल पर सूर्य की पहली किरण शिवालिक की पहाड़ियों में पड़ी। पहली किरण के साथ नए साल का आगाज हो गया है। साल 2019 में 19 प्रोजेक्ट ट्विनसिटी को नया लुक देंगे। इस साल ये प्रोजेक्ट पूरे हो गए तो स्मार्ट सिटी से भी स्मार्ट हो जाएगा अपना शहर। यमुना पर नए पुल और नया एक्सप्रेस वे बनने से नॉन स्टॉप कनेक्टिविटी मिलेगी। वहीं हथिनीकुंड बैराज, कलेसर और आदिबद्री के रूप में टूरिस्ट स्पॉट के रूप में विकसित होंगे। यमुना की सहायक नदियों पर छह डैम का सर्वे चल रहा है। जिससे न केवल यमुनानगर बल्कि पूरे हरियाणा को फायदा होगा। 200 बेड के अस्पताल से जहां स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी। वहीं जिले की पहली यूनिवर्सिटी बनने से एजुकेशन हब हो जाएगा। पहली बार यहां स्टूडेंट्स कानूनी शिक्षा भी हासिल कर सकेंगे।
1.
बाढ़ से बचाव के लिए छह नए डैम बनेंगे
बाढ़ से होने वाले नुकसान और अतिरिक्त पानी को बचाने के लिए जिले में छह बांध बनाएं जा रहे हैं। जंगल में डैम बनने से बरसात का पानी मैदानी इलाकों में तबाही नहीं मचा पाएगा और बांध में जमा किया गया पानी जरूरत के समय काम आ सकेगा। सरकार र्ने आईआईटी रूड़की को हाइड्रोलोजिकल सर्वे का काम सौंपा है। एक महीने से यह टीम सर्वे कर रही है और एक महीने के अंदर सरकार को बांध बनाने की संभावनाओं की पूरी रिपोर्ट सौंपेंगी। रिपोर्ट के आधार पर कलेसर के जंगल में डैम लगाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस पर कितनी धनराशि खर्च होगी, यह डीपीआर तैयार होने के बाद पता चलेगा, लेकिन सर्वे में जुटी टीम के अधिकारियों का कहना है कि ये बड़ा प्रोजेक्ट है और इस पर कई हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। छह डैम बनने का फायदा न केवल यमुनानगर बल्कि पूरे हरियाणा को मिलेगा।
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यहां बनेंगे डैम
-चिक्कन, कांसली, खिल्लांवाला, नगली, आंबवाली और डारपुर में डैम बनाया जाना है। सर्वे पूरा होने के बाद जगह फाइनल की जाएगी।
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ये है हाईड्रोलोजिकल डेटा
कलेसर जंगल में लगने वाले डैम के लिए सर्वे कर रही टीम के इंचार्ज शगुन शर्मा ने बताया कि हाईड्रोलोजिकल के माध्यम से यह पता चल जाएगा कि किस क्षेत्र में कब-कब कितनी वर्षा हुई और कब-कब बाढ़ की स्थिति बनी। वन विभाग के जंगलों से वर्ष 1996 से यह डाटा तैयार किया जा रहा है। 1996 से लेकर अब तक कितनी बार किस क्षेत्र में बाढ़ के हालात पैदा हुए हैं। यह सब डाटा डीएसएम सिस्टम के माध्यम से तैयार किया जा रहा है जोकि एक तरह का कंप्यूटर साफ्टवेयर है। इस साफ्टवेयर के माध्यम से मदद मिल जाएगी कि कहां पर डैम लगाकर पानी को रोका जा सकता है। और यह उपयोग में भी लाया जा सकता है और कहां-कहां पर बाढ़ की मार किसानों ने झेली है। यह सॉफ्टवेयर जंगल में डैम लगाने के लिए टीम और विभाग की मदद करेगा।
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पांच इंजीनियरों की टीम खंगाल रही जंगल
इस सर्वे के कार्य में पांच लोगों की टीम हैं। इनमें शगुन शर्मा, अंकित, सौरभ, प्रीतम और पिंकी कुमार है। वे सभी प्रोजक्ट एसोसिएट हैं और आइआइटी रूड़की में प्रो. डा. कमल जैन की देखरेख में कार्य कर रहे हैं।
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इसलिए जरूरी है डैम
हर साल बरसात के मौसम में जहां यमुना नदी में बाढ़ का पानी तबाही मचाता है। वहीं पहाड़ों और जंगल के क्षेत्र में बहने वाली स्थानीय नदियां भी अपने उफान पर बहती है। नहर-नालों में बाढ़ आने से करोड़ों का नुकसान होता हे। सिंचाई विभाग द्वारा हर साल बाढ़ राहत कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। लेकिन यही स्टड और पेचिंग वर्क बरसात की एक मार तक नही झेल पाते जिसका खामियाजा जनता को उठाना पड़ता है। ग्रामीणों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ गया।
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ये होंगे फायदे
वाटर लेवल रिचार्ज होगा।
स्थानीय नदियों में बाढ़ पर नियंत्रण हो जाएगा।
गर्मियों में पानी की उपलब्धता बढ़ जाएगी।
जरूरत के समय किसानों को सिंचाई के मिलेगा पानी।
वन्य जीवों को गर्मी में राहत मिलेगी और वे मैदानी क्षेत्र में नहीं आएंगे।
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2.
दिल्ली तक नया एक्सप्रेस वे
दिल्ली के हैदरपुर से यमुनानगर से नए एक्सप्रेस को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। करीब 1500 करोड़ रुपये की लागत से 200 किमी लंबे इस एक्सप्रेस वे को पश्चिमी यमुना नहर के पैरलल बनाया जाएगा। हाइवे बनने के बाद यमुनानगर से करनाल, पानीपत व सोनीपत शहर सीधे जुड़ जाएंगे और दिल्ली की दूरी डेढ़ घंटे कम हो जाएगी। यह एक्सप्रेस वे करनाल में एनएच 1, पानीपत में एनएच 71 और सोनीपत में केएमपी को आपस में जोड़ेगा। वहीं स्टेट हाइवे नंबर सात- आठ करनाल कैथल रोड, एसएच नंबर 9 करनाल कौल शामली, एसएच नंबर 14 पानीपत जींद, एमडीआर नंबर 114 कोहंड मूनक असंध रोड भी आपस में कनेक्ट हो जाएंगे। इस एक्सप्रेस का 40 किमी का एरिया यमुनानगर जिले में होगा, जिस पर करीब 150 रुपए खर्च किए जाएंगे।
-फेक्ट्स
-कुल लंबाई-200 किमी।
-लागत-1500 करोड़।
-4 रेलवे ओवरब्रिज।
-10 फ्लाइओवर।
-10 मीटर की सर्विस लेन।
-850 करोड़ एनसीआरपीबी देगा।
-150 करोड़ यमुनानगर में खर्च होगा।
फोटो नंबर 12
3.
यमुना पर 104 करोड़ में नया पुल
कलानौर के बाद करनाल तक यमुना नदी पर पुल न होने के कारण हरियाणा-उप्र में आवागमन की डगर बहुत मुश्किल है। आवागमन के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने यमुना नदी के नगली घाट पर पुल बनाए जाने का निर्णय लिया। अक्टूबर 2018 में सीएम मनोहर लाल ने एलान किया था। हाल ही में सरकार ने 104 करोड़ रुपये के पुल की प्रशासनिक मंजूरी दे दी।
फोटो नंबर 13
4.
जिले की पहली यूनिवर्सिटी
टिवनसिटी में पढ़ाई कर रहे बच्चों के लिए ये खुशी की बात है कि उन्हें अपनी उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली व चंडीगढ़ नहीं जाना पड़ेगा। जिले की पहली यूनिवर्सिटी को मंजूरी मिल चुकी है। डीएवी यूनिवर्सिटी का निर्माण कार्य इसी साल से शुरू हो रहा है। 65 एकड़ में 250 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस यूनिवर्सिटी में पांच हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स उच्चतर शिक्षा हासिल कर सकेंगे। पहले सत्र से ही यूनिवर्सिटी में 10 इंस्टीट्यूट में 24 कोर्सों शुरू होंगे। शुरूआत में 100 फैकल्टी से यूनिवर्सिटी में विशेष तौर पर स्कूल ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, स्कूल ऑफ होटल मैनेजमेंट, स्कूल ऑफ लॉ, स्कूल ऑफ मास कॉम्यूनिकेशन, स्कूल ऑफ एजुकेशन, स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट, स्कूल ऑफ इंडियन एनसीएंट स्टडीज, स्कूल ऑफ प्लांटेशन और स्कूल ऑफ पैरा मेडिकल साइंस स्कूल की सुविधा होगी।

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5.
खूनी नाले पर बनेगा 8 करोड़ का पुल और सड़क
-घाड क्षेत्र के लोगों को शाहपुर के जंगल वाले रास्ते पर सड़क व सोम नदी के पुल पर 8 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सोम के इस हिस्से को खूनी नाला भी कहा जाता है, क्योंकि कई गांव के लोगों को नदी पार करके जाना पड़ता है और इसमें अचानक पानी आ जाता है। कई लोग अपनी जिंदगी गवां चुके हैं। पुल की लंबाई लगभग 100 मीटर है जबकि सड़क की लंबाई 5 किलोमीटर है। शाहपुर के जंगल वाले रास्ते पर सड़क में पुल बनने से घाड़ क्षेत्र के लगभग 70 गांवों को इसका लाभ मिलेगा।
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