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शाही स्नान के साथ ऐतिहासिक कपालमोचन मेला शुरू, पहले दिन दो लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवरों में लगाई श्रद्धा की डूबकी
Updated Tue, 20 Nov 2018 12:32 AM IST
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शाही स्नान के साथ ऐतिहासिक कपालमोचन मेला शुरू, पहले दिन दो लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवरों में लगाई श्रद्धा की डुबकी
यमुनानगर। साधु प्रवेश और शाही स्नान के साथ सोमवार को ऐतिहासिक कपालमोचन मेला शुरू हो गया। पहले दिन करीब दो लाख श्रद्धालु मेले में पहुंचे और पवित्र सरोवरों में श्रद्धा की डूबकी लगाई। मेला प्रशासक व डीसी गिरीश अरोड़ा ने रिबन काट कर पांच दिवसीय समारोह का शुभारंभ किया। मेले में सबसे अधिक संख्या पंजाब के श्रद्धालुओं की है। शाम को तीन बजे यमुनानगर के डीसी गिरीश अरोड़ा ने रिबन काट कर मेले का शुभारंभ किया। मेले की मान्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां स्नान के लिए दस लाख से अधिक तक श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिनमें ग्रामीण क्षेत्र के श्रद्धालुओं की संख्या सबसे अधिक होती है।
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कार्तिक मास की पूर्णिमा पर लगता है मेला
कपालमोचन तीर्थ यमुनानगर जिले में सिंधुवन में बिलासपुर के पास स्थित है। देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में श्रद्धालु हर वर्ष कार्तिक मास की पूर्णिमा के अवसर पर यहां लगने वाले विशाल मेले में पहुंचते हैं। मोक्ष की कामना से तीन पवित्र सरोवरों कपालमोचन सरोवर, ऋण मोचन सरोवर व सूरजकुंड सरोवर में स्नान करते हैं। श्रद्धालु ट्रेनों, बसों और निजी वाहनों से मेले में पहुंच रहे हैं। ट्रेनों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रोडवेज ने यमुनानगर, जगाधरी, अंबाला बस स्टैंड व यमुनानगर रेलवे स्टेशन से 100 बसों की व्यवस्था की है।
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तीनों लोकों के पाप से मुक्ति दिलाने वाला है तीर्थ
कपालमोचन तीर्थ स्वयं में प्राचीन इतिहास समेटे है। पुराणों के अनुसार कपाल मोचन तीर्थ तीनों लोकों के पाप से मुक्ति दिलाने वाला स्थल है। इसके पवित्र सरोवरों में स्नान करने से ब्रह्म हत्या जैसे महापाप का निवारण होता है। आदि काल में कार्तिक पूर्णिमा की अर्धरात्रि के समय ही भगवान शिव की ब्रह्म कपाली इसी कपाल मोचन सरोवर में स्नान करने से दूर हुई थी।
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110 एकड़ में फैला मेला
एसडीएम नवीन आहुजा ने बताया मेला क्षेत्र 110 एकड़ में फैला है। सही से प्रबंधन व देखरेख के लिए इसे चार सेक्टरों में बांटा गया है। हर एरिया में अलग से ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। मेले में व्यवस्था बनाए रखने के करीब तीन हजार सिविल प्रशासन व पुलिस कर्मी लगाए गए हैं। दो हजार से ज्यादा पुलिस कर्मी दूसरे जिलों से मंगवाए गए हैं। करीब एक हजार दुकानें व 70 से अधिक भंडारों का आयोजन किया गया है। इसके अलावा 19 जगहों पर नाके, और पांच जगहों पर वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था की गई है तथा आठ घुड़सवार हर समय मेला क्षेत्र के पांच किलोमीटर दायरे व बम रोधक दस्ता भी तैनात किया गया है।
वर्जन
शाही स्नान के साथ कपालमोचन मेले का शुभारंभ हुआ है और पहले दिन दो श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवरों में स्नान किया है। 23 नवंबर तक चलने वाले इस मेला में दस लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
-गिरीश अरोड़ा, मेला प्रशासक
फोटो-31 से 36 तक
यमुनानगर। साधु प्रवेश और शाही स्नान के साथ सोमवार को ऐतिहासिक कपालमोचन मेला शुरू हो गया। पहले दिन करीब दो लाख श्रद्धालु मेले में पहुंचे और पवित्र सरोवरों में श्रद्धा की डूबकी लगाई। मेला प्रशासक व डीसी गिरीश अरोड़ा ने रिबन काट कर पांच दिवसीय समारोह का शुभारंभ किया। मेले में सबसे अधिक संख्या पंजाब के श्रद्धालुओं की है। शाम को तीन बजे यमुनानगर के डीसी गिरीश अरोड़ा ने रिबन काट कर मेले का शुभारंभ किया। मेले की मान्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां स्नान के लिए दस लाख से अधिक तक श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिनमें ग्रामीण क्षेत्र के श्रद्धालुओं की संख्या सबसे अधिक होती है।
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कार्तिक मास की पूर्णिमा पर लगता है मेला
कपालमोचन तीर्थ यमुनानगर जिले में सिंधुवन में बिलासपुर के पास स्थित है। देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में श्रद्धालु हर वर्ष कार्तिक मास की पूर्णिमा के अवसर पर यहां लगने वाले विशाल मेले में पहुंचते हैं। मोक्ष की कामना से तीन पवित्र सरोवरों कपालमोचन सरोवर, ऋण मोचन सरोवर व सूरजकुंड सरोवर में स्नान करते हैं। श्रद्धालु ट्रेनों, बसों और निजी वाहनों से मेले में पहुंच रहे हैं। ट्रेनों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रोडवेज ने यमुनानगर, जगाधरी, अंबाला बस स्टैंड व यमुनानगर रेलवे स्टेशन से 100 बसों की व्यवस्था की है।
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तीनों लोकों के पाप से मुक्ति दिलाने वाला है तीर्थ
कपालमोचन तीर्थ स्वयं में प्राचीन इतिहास समेटे है। पुराणों के अनुसार कपाल मोचन तीर्थ तीनों लोकों के पाप से मुक्ति दिलाने वाला स्थल है। इसके पवित्र सरोवरों में स्नान करने से ब्रह्म हत्या जैसे महापाप का निवारण होता है। आदि काल में कार्तिक पूर्णिमा की अर्धरात्रि के समय ही भगवान शिव की ब्रह्म कपाली इसी कपाल मोचन सरोवर में स्नान करने से दूर हुई थी।
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110 एकड़ में फैला मेला
एसडीएम नवीन आहुजा ने बताया मेला क्षेत्र 110 एकड़ में फैला है। सही से प्रबंधन व देखरेख के लिए इसे चार सेक्टरों में बांटा गया है। हर एरिया में अलग से ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। मेले में व्यवस्था बनाए रखने के करीब तीन हजार सिविल प्रशासन व पुलिस कर्मी लगाए गए हैं। दो हजार से ज्यादा पुलिस कर्मी दूसरे जिलों से मंगवाए गए हैं। करीब एक हजार दुकानें व 70 से अधिक भंडारों का आयोजन किया गया है। इसके अलावा 19 जगहों पर नाके, और पांच जगहों पर वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था की गई है तथा आठ घुड़सवार हर समय मेला क्षेत्र के पांच किलोमीटर दायरे व बम रोधक दस्ता भी तैनात किया गया है।
वर्जन
शाही स्नान के साथ कपालमोचन मेले का शुभारंभ हुआ है और पहले दिन दो श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवरों में स्नान किया है। 23 नवंबर तक चलने वाले इस मेला में दस लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
-गिरीश अरोड़ा, मेला प्रशासक
फोटो-31 से 36 तक