{"_id":"5b8ed73c867a55487f0ad4fd","slug":"153608785419-yamuna-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"यमुना हमारे खेतों में बहती है, फिर इसके रेत की कमाई बाहर क्यों जाती है,,","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यमुना हमारे खेतों में बहती है, फिर इसके रेत की कमाई बाहर क्यों जाती है,,
Updated Wed, 05 Sep 2018 12:34 AM IST
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हमारे खेतों में बहती है यमुना, फिर बाहर क्यों जाती है रेत की कमाई
सैकड़ों एकड़ जमीन पानी में समा जाने पर गुस्साएं किसानों ने सचिवालय में एक घंटे तक किया प्रदर्शन
डीसी के न आने पर सचिवालय प्रांगण में दिया धरना
डीसी आए तो बोले किसान, माइनिंग नहीं रोक सकते तो हमें दे ऑर्डर, हम रोकेंगे
डीसी बोले, कमेटी बनाकर करवाएंगे जांच, गलत व अवैध माइनिंग करने वालों को नहीं बख्शा जाएगा
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। यमुना हमारे खेतों में बहती है, फिर इसके रेत की कमाई बाहर क्यों जाती है। हमारा खेत, हमारा रेत, फिर कैसा रेट। जठलाना इलाके की सैकड़ों एकड़ जमीन पानी में समाने से गुस्साएं किसान यह नारा लगाते हुए मंगलवार को जिला सचिवालय पहुंचे। किसानों ने यहां प्रशासन व सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जमीन जलमग्न होने का मुख्य कारण किसानों ने यमुना घाटों पर गलत तरीके से की जा रही रेत की माइनिंग को बताया। इन घाटों पर अवैध तरीके से 40-50 फुट तक खुदाई करने से तटबंध टूट रहे है। इससे किसानों की फसलें तबाह हो रही है। यदि यमुना के घाटों पर गलत तरीके से रेत की माइनिंग नहीं होती तो तटबंध नहीं टूटते और किसानों की फसले तबाह नहीं होती। इन घाटों पर माइनिंग पर रोक लगाने को लेकर किसानों ने डीसी से बातचीत की। किसानों ने डीसी को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आप इस पर रोक नहीं लगवा सकते तो इसका चार्ज हमें दे दो। हम खुद माइनिंग रूकवाएंगे। डीसी ने उन्हें जवाब दिया कि वे इस संबंध में एक कमेटी का गठन करेंगे। जो गलत तरीके से माइनिंग करने वालों पर रोक लगाएंगी।
बॉक्स
इन घाटों पर हो रही गलत तरीके से माइनिंग :
एडवोकेट वरयाम सिंह, किसान राम कुमार, रमेश चंद, सर्वजीत सिंह, शेर सिंह, जरनैल, संजू आदि ने डीसी को सीएम के नाम दी शिकायत में बताया कि वे यमुनानगर व करनाल जिलों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के रहने वाले है। हमारे गांव गुमथला राव, संधाला, संधाली, लाल छप्पर, चौगांवा, हंसु माजरा, कंड्रोली, खूखनी के पास यमुदा नदी से रेत निकालने के लिए घाटों का ठेका सरकार द्वारा दिया हुआ है। यहां दस फुट तक खुदाई कर सकते है, लेकिन खनन माफिया यहां पर अवैध व गलत तरीके से 40-50 फुट तक खुदाई कर रहे है। जिस कारण यमुना में थोड़े पानी से ही तटबंध टूट रहे है और अधिकतर तटबंध वहीं से टूटे हैं जहां पर अवैध खुदाई की गई है। जिसका खामियाजा हम क्षेत्रवासियों को भुगतना पड़ा रहा है। इस अवैध खुदाई के कारण सैकड़ों एकड़ भूति यमुना के जल में समा गई। इससे वे बर्बाद हो गए हैं।
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अवैध खुदाई के साथ ओवरलोड से भी हुई बर्बादी :
किसानों ने कहा कि ठेकेदारों ने अवैध खुदाई कर क्षेत्र की फसलों व भूमि को ही बर्बाद नहीं किया, बल्कि ओवलोड ट्रकों के कारण क्षेत्र की तमाम सड़कें धंस कर खस्ताहाल हो चुकी है। इन ठेकेदारों की वजह से पूरा क्षेत्र बर्बाद हो गया है। इन ठेकेदारों की बजह से क्षेत्र के लोगों का जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई ठेकेदारों से ही वसूल की जाए। उन्होंने डीसी से मांग की कि इनके ठेके रद्द करके घाटों पर हो रही माइनिंग पर रोक लगाई जाए।
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डीसी नहीं आए तो सचिवालय में धरना देकर किया प्रदर्शन :
जठलाना क्षेत्र के दर्जनभर गांव के सैकड़ों लोग मंगलवार सुबह जगाधरी अनाजमंडी में एकत्रित हुए। इसमें भारतीय किसान यूनियन सहित कई संगठनों के पदाधिकारी भी शामिल थे। सभी प्रदर्शनकारी यहां से नारेबाजी करते हुए नेशनल हाईवे 73 से होते हुए सचिवालय पहुंचे। जहां उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों का ज्ञापन लेने के लिए पहले एसडीएम बीबी कौशिक मौके पर पहुंचे। लेकिन किसानों ने उन्हें डीसी को मौके पर भेजने की बात कही। इस दौरान किसानों और एसडीएम के बीच बहस भी हुई। बाद में डीसी के न आने पर किसान सचिवालय प्रांगण में नीचे धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। कुछ देर बाद डीसी मौके पर आए। डीसी गिरीश अरोड़ा ने किसानों को आश्वासन दिया कि अधिकारियों की कमेटी गठित कर मौके का मुआयना कराया जाएगा। गलत माइनिंग करने वालों का बख्शा नहीं जाएगा।
सैकड़ों एकड़ जमीन पानी में समा जाने पर गुस्साएं किसानों ने सचिवालय में एक घंटे तक किया प्रदर्शन
डीसी के न आने पर सचिवालय प्रांगण में दिया धरना
डीसी आए तो बोले किसान, माइनिंग नहीं रोक सकते तो हमें दे ऑर्डर, हम रोकेंगे
डीसी बोले, कमेटी बनाकर करवाएंगे जांच, गलत व अवैध माइनिंग करने वालों को नहीं बख्शा जाएगा
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। यमुना हमारे खेतों में बहती है, फिर इसके रेत की कमाई बाहर क्यों जाती है। हमारा खेत, हमारा रेत, फिर कैसा रेट। जठलाना इलाके की सैकड़ों एकड़ जमीन पानी में समाने से गुस्साएं किसान यह नारा लगाते हुए मंगलवार को जिला सचिवालय पहुंचे। किसानों ने यहां प्रशासन व सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जमीन जलमग्न होने का मुख्य कारण किसानों ने यमुना घाटों पर गलत तरीके से की जा रही रेत की माइनिंग को बताया। इन घाटों पर अवैध तरीके से 40-50 फुट तक खुदाई करने से तटबंध टूट रहे है। इससे किसानों की फसलें तबाह हो रही है। यदि यमुना के घाटों पर गलत तरीके से रेत की माइनिंग नहीं होती तो तटबंध नहीं टूटते और किसानों की फसले तबाह नहीं होती। इन घाटों पर माइनिंग पर रोक लगाने को लेकर किसानों ने डीसी से बातचीत की। किसानों ने डीसी को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आप इस पर रोक नहीं लगवा सकते तो इसका चार्ज हमें दे दो। हम खुद माइनिंग रूकवाएंगे। डीसी ने उन्हें जवाब दिया कि वे इस संबंध में एक कमेटी का गठन करेंगे। जो गलत तरीके से माइनिंग करने वालों पर रोक लगाएंगी।
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इन घाटों पर हो रही गलत तरीके से माइनिंग :
एडवोकेट वरयाम सिंह, किसान राम कुमार, रमेश चंद, सर्वजीत सिंह, शेर सिंह, जरनैल, संजू आदि ने डीसी को सीएम के नाम दी शिकायत में बताया कि वे यमुनानगर व करनाल जिलों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के रहने वाले है। हमारे गांव गुमथला राव, संधाला, संधाली, लाल छप्पर, चौगांवा, हंसु माजरा, कंड्रोली, खूखनी के पास यमुदा नदी से रेत निकालने के लिए घाटों का ठेका सरकार द्वारा दिया हुआ है। यहां दस फुट तक खुदाई कर सकते है, लेकिन खनन माफिया यहां पर अवैध व गलत तरीके से 40-50 फुट तक खुदाई कर रहे है। जिस कारण यमुना में थोड़े पानी से ही तटबंध टूट रहे है और अधिकतर तटबंध वहीं से टूटे हैं जहां पर अवैध खुदाई की गई है। जिसका खामियाजा हम क्षेत्रवासियों को भुगतना पड़ा रहा है। इस अवैध खुदाई के कारण सैकड़ों एकड़ भूति यमुना के जल में समा गई। इससे वे बर्बाद हो गए हैं।
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अवैध खुदाई के साथ ओवरलोड से भी हुई बर्बादी :
किसानों ने कहा कि ठेकेदारों ने अवैध खुदाई कर क्षेत्र की फसलों व भूमि को ही बर्बाद नहीं किया, बल्कि ओवलोड ट्रकों के कारण क्षेत्र की तमाम सड़कें धंस कर खस्ताहाल हो चुकी है। इन ठेकेदारों की वजह से पूरा क्षेत्र बर्बाद हो गया है। इन ठेकेदारों की बजह से क्षेत्र के लोगों का जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई ठेकेदारों से ही वसूल की जाए। उन्होंने डीसी से मांग की कि इनके ठेके रद्द करके घाटों पर हो रही माइनिंग पर रोक लगाई जाए।
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जठलाना क्षेत्र के दर्जनभर गांव के सैकड़ों लोग मंगलवार सुबह जगाधरी अनाजमंडी में एकत्रित हुए। इसमें भारतीय किसान यूनियन सहित कई संगठनों के पदाधिकारी भी शामिल थे। सभी प्रदर्शनकारी यहां से नारेबाजी करते हुए नेशनल हाईवे 73 से होते हुए सचिवालय पहुंचे। जहां उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों का ज्ञापन लेने के लिए पहले एसडीएम बीबी कौशिक मौके पर पहुंचे। लेकिन किसानों ने उन्हें डीसी को मौके पर भेजने की बात कही। इस दौरान किसानों और एसडीएम के बीच बहस भी हुई। बाद में डीसी के न आने पर किसान सचिवालय प्रांगण में नीचे धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। कुछ देर बाद डीसी मौके पर आए। डीसी गिरीश अरोड़ा ने किसानों को आश्वासन दिया कि अधिकारियों की कमेटी गठित कर मौके का मुआयना कराया जाएगा। गलत माइनिंग करने वालों का बख्शा नहीं जाएगा।