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बिना लाइसेंस चल रहा पानी का काला कारोबार, डीसी ने दिए सील करने के आदेश
Updated Sun, 22 Jul 2018 06:05 PM IST
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बिना लाइसेंस चल रहा पानी का काला कारोबार, डीसी ने दिए सील करने के आदेश
अवैध आरओ प्लांट लोगों की सेहत से खिलवाड़
-डीसी ने स्वास्थ्य विभाग को दिए अवैध प्लांटों को सील करने के आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। ट्विनसिटी में चल रहे आरओ पानी के बिजनेस में प्लांट मालिक लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। नियमों को ताक पर रख धड़ल्ले से पानी की सप्लाई शहर से लेकर गांवों में कर रहे हैं। आरओ प्लांट संचालकों द्वारा न तो कोई लाइसेंस लिया गया और न ही मानक पूरे किए गए। प्लांट में कभी पानी की जांच नहीं की जाती। बिना गुणवत्ता के पानी को ठंडा कर डिब्बों मे भरकर प्रति डिब्बा 15 से 20 रुपये यह कहकर दुकानों एवं मकानों मे बेचा जाता है कि फिल्टर पानी है। जबकि भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा आरओ प्लांट संचालन के लिए रजिस्ट्रेशन के साथ साथ समय-समय पर पानी की नियमित जांच की जाती है। धन कमाने का यह अवैध कारोबार दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। जिसका लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
40 लाख का कारोबार : स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में करीब साठ आरओ प्लांट चल रहे हैं। जिनसे रोजाना आठ से दस हजार कैम्पर यानी करीब एक लाख लीटर पानी प्रतिदिन सप्लाई किया जा रहा है। यानी सीधे तौर पर प्रति महीने 40 लाख रुपये से ज्यादा का टर्नओवर है।
दो महीने में सौ से ज्यादा सैंपल भरें : दो महीने में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एक सौ से ज्यादा जगहों से पानी, बर्फ व अन्य पेय पदार्थों के सैंपल उठाएं थे। इनमें से जिनके सैंपल फेल आएं हैं। उन 13 प्लांटों पर कार्रवाई कर दी है। अगले सप्ताह 14 अन्य आरओ प्लांट के सैंपल की जांच रिपोर्ट मिल जाएगी।
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घरों तक पहुंच : दुकानों और व्यवसायिक संस्थानों के साथ-साथ घरों व गांवों में भी लोग कैंपर मंगवाने लगे हैं। एक सप्लायर का दावा है कि वे फिल्टर और चिल्ड वाटर सप्लाई करते हैं। इस कारण लोग उनका पानी लेना पसंद कर रहे हैं, परंतु स्वास्थ्य विभाग की माने तो इनके द्वारा सप्लाई हो रहा पानी मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है।
पानी की शुद्धता की पहचान करें : पानी में कड़वापन, पानी का स्वाद कठोर होना, बोतल में 2 दिन रखने के बाद पानी में पीलापन, पानी का सामान्य दांतों में भी लगना, पानी को उबालने पर चूना जैसा निकलना, पानी रखने वाले जार में चूने जैसा जमना आदि समस्या आने पर तत्काल टीडीएस चेक कराएं।
कई विभागों से परमिशन और बीआईएस का लाइसेंस जरूरी : आरओ प्लांट लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, पब्लिक हेल्थ, प्रदूषण बोर्ड समेत कई विभागों की परमिशन की आवश्यकता होती है। इसके अलावा भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का लाइसेंस भी लेना होता है। पानी जांच के बाद इसे दिल्ली से जारी किया जाता है। यहां से आईएसआई हालमार्क जारी कर पानी पैक करने की अनुमति दी जाती है। बीआईएस से लाइसेंस मिलने के बाद ही एफडीए की ओर से लाइसेंस देने की प्रक्रिया आगे शुरू होती है। शहर में सप्लाई होने वाले आरओ के पानी केन और बोतलों में सील पैक नहीं होता है।
अमोनिया मिलाकर ठंडा करते हैं पानी : पानी में अमोनिया मिलाकर बेचने की शिकायत भी आम हो चुकी है। बताया जाता है अमोनिया मिलाने से पानी जल्दी ठंडा हो जाता है और उसकी ठंडक कई घंटे तक बनी रहती है। यह ठंडा पानी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है।
सीएमओ डॉ. कुलदीप सिंह ने बताया कि बिना मानकों के साथ सप्लाई किया जा रहा आरओ का पानी सेहत के लिए खतरनाक है। इसके लगातार प्रयोग से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है। अभी तक करीब 60 आरओ प्लांट आइडेंटीफाई किए गए हैं। इनके पानी की सैंपलिंग की जा रही है। जिस भी आरओ प्लांट पर मानकों के अनुरूप काम नहीं होगा। उसे सील कर उसके मालिक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
आमजन की सेहत से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगा। बर्फ व आरओ के 13 प्लांट्स को सील कर दिया है। जिस भी प्लांट की नेगेटिव रिपोर्ट होगी, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। आमजन से भी अपील है कि वे पब्लिक हेल्थ के पानी का प्रयोग करें।
-गिरीश अरोड़ा, डीसी
फोटो नंबर 23
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अवैध आरओ प्लांट लोगों की सेहत से खिलवाड़
-डीसी ने स्वास्थ्य विभाग को दिए अवैध प्लांटों को सील करने के आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। ट्विनसिटी में चल रहे आरओ पानी के बिजनेस में प्लांट मालिक लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। नियमों को ताक पर रख धड़ल्ले से पानी की सप्लाई शहर से लेकर गांवों में कर रहे हैं। आरओ प्लांट संचालकों द्वारा न तो कोई लाइसेंस लिया गया और न ही मानक पूरे किए गए। प्लांट में कभी पानी की जांच नहीं की जाती। बिना गुणवत्ता के पानी को ठंडा कर डिब्बों मे भरकर प्रति डिब्बा 15 से 20 रुपये यह कहकर दुकानों एवं मकानों मे बेचा जाता है कि फिल्टर पानी है। जबकि भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा आरओ प्लांट संचालन के लिए रजिस्ट्रेशन के साथ साथ समय-समय पर पानी की नियमित जांच की जाती है। धन कमाने का यह अवैध कारोबार दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। जिसका लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
40 लाख का कारोबार : स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में करीब साठ आरओ प्लांट चल रहे हैं। जिनसे रोजाना आठ से दस हजार कैम्पर यानी करीब एक लाख लीटर पानी प्रतिदिन सप्लाई किया जा रहा है। यानी सीधे तौर पर प्रति महीने 40 लाख रुपये से ज्यादा का टर्नओवर है।
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दो महीने में सौ से ज्यादा सैंपल भरें : दो महीने में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एक सौ से ज्यादा जगहों से पानी, बर्फ व अन्य पेय पदार्थों के सैंपल उठाएं थे। इनमें से जिनके सैंपल फेल आएं हैं। उन 13 प्लांटों पर कार्रवाई कर दी है। अगले सप्ताह 14 अन्य आरओ प्लांट के सैंपल की जांच रिपोर्ट मिल जाएगी।
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घरों तक पहुंच : दुकानों और व्यवसायिक संस्थानों के साथ-साथ घरों व गांवों में भी लोग कैंपर मंगवाने लगे हैं। एक सप्लायर का दावा है कि वे फिल्टर और चिल्ड वाटर सप्लाई करते हैं। इस कारण लोग उनका पानी लेना पसंद कर रहे हैं, परंतु स्वास्थ्य विभाग की माने तो इनके द्वारा सप्लाई हो रहा पानी मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है।
पानी की शुद्धता की पहचान करें : पानी में कड़वापन, पानी का स्वाद कठोर होना, बोतल में 2 दिन रखने के बाद पानी में पीलापन, पानी का सामान्य दांतों में भी लगना, पानी को उबालने पर चूना जैसा निकलना, पानी रखने वाले जार में चूने जैसा जमना आदि समस्या आने पर तत्काल टीडीएस चेक कराएं।
कई विभागों से परमिशन और बीआईएस का लाइसेंस जरूरी : आरओ प्लांट लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, पब्लिक हेल्थ, प्रदूषण बोर्ड समेत कई विभागों की परमिशन की आवश्यकता होती है। इसके अलावा भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का लाइसेंस भी लेना होता है। पानी जांच के बाद इसे दिल्ली से जारी किया जाता है। यहां से आईएसआई हालमार्क जारी कर पानी पैक करने की अनुमति दी जाती है। बीआईएस से लाइसेंस मिलने के बाद ही एफडीए की ओर से लाइसेंस देने की प्रक्रिया आगे शुरू होती है। शहर में सप्लाई होने वाले आरओ के पानी केन और बोतलों में सील पैक नहीं होता है।
अमोनिया मिलाकर ठंडा करते हैं पानी : पानी में अमोनिया मिलाकर बेचने की शिकायत भी आम हो चुकी है। बताया जाता है अमोनिया मिलाने से पानी जल्दी ठंडा हो जाता है और उसकी ठंडक कई घंटे तक बनी रहती है। यह ठंडा पानी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है।
सीएमओ डॉ. कुलदीप सिंह ने बताया कि बिना मानकों के साथ सप्लाई किया जा रहा आरओ का पानी सेहत के लिए खतरनाक है। इसके लगातार प्रयोग से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है। अभी तक करीब 60 आरओ प्लांट आइडेंटीफाई किए गए हैं। इनके पानी की सैंपलिंग की जा रही है। जिस भी आरओ प्लांट पर मानकों के अनुरूप काम नहीं होगा। उसे सील कर उसके मालिक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
आमजन की सेहत से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगा। बर्फ व आरओ के 13 प्लांट्स को सील कर दिया है। जिस भी प्लांट की नेगेटिव रिपोर्ट होगी, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। आमजन से भी अपील है कि वे पब्लिक हेल्थ के पानी का प्रयोग करें।
-गिरीश अरोड़ा, डीसी
फोटो नंबर 23