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चंचल, लक्ष्मी व लीली अब वाटर मेनल में नहाएंगी, डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए दिया जा रहा ओआरएस
Updated Sun, 27 May 2018 01:20 AM IST
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चंचल, लक्ष्मी व लीली अब वाटर मेनल में नहाएंगी
डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए दिया जा रहा ओआरएस
बनसंतोर के जंगल में बनाए गए हाथी पुनर्वास केंद्र में मौजूद तीन मादा हाथियों को गर्मी से बचाने की तैयारी
कौशिक खान
छछरौली।
15 किलोमीटर दूर घाड क्षेत्र के बनसंतोर के जंगल में बनाए गए चौधरी सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र में रखी गईं मादा हाथी चंचल, लक्ष्मी व लीली अब वाटर पंपिंग की जगह वाटर मेनल से गर्मी दूर करेंगी। भीषण गर्मी को देखते हुए शाम की दी जाने वाली खिचड़ी में एक हाथी को पांच पाउच ओआरएस दिए जा रहे हैं ताकि उन्हें डिहाईड्रेशन की परेशानी न हो। गर्मी के मौसम में हाथी को पानी में बैठे रहना और नहाना खेलना बहुत ही पसंद है। इसी बात को ध्यान में रखकर हाथियों के लिए वाटर पंपिंग की जगह वाटर मेनल की व्यवस्था पुनर्वास केंद्र में इसी वर्ष की गई है। वाटर मेनल में हाथी को तालाब नदी की तरह बैठने खेलने के लिए खुला पानी मिलता है।
बनाया ट्रीटमेंट स्टैंड
यहां पहली बार ट्रीटमेंट स्टैंड में हाथी को खड़ा करके दवाई देना, इंजेक्शन लगाना, ब्लड सैंपल लेना, मरहम लगाना, स्किन से संबंधित ट्रीटमेंट करना शुरू किया गया है। इसका एक बहुत बड़ा फायदा ये होगा कि हाथी के पूरे शरीर की सही से देखभाल हो जाएगी। क्योंकि हाथी पुनर्वास केंद्र में वेटरनेरी डाक्टर टीम द्वारा समय समय पर टीकाकरण व खून जांच की जाती है। प्रत्येक तीन माह के बाद हाथी के स्वास्थ्य की जांच की जाती है। अभी दो महीने पहले चंचल, लक्ष्मी व लीली को कीड़ों के टीके लगाए हैं। साथ ही खून जांच भी की है। इसमें रिपोर्ट नॉर्मल आई है। इसके अलावा जंगल विचरण करते समय हल्की खरोंच वगैरह लग जाती है, जिसका मरहम जगाकर उपचार किया जाता है। हाथियों के खान पान से लेकर दवाई बूटी करने तक का कार्य एक कुशल व ट्रेंड टीम द्वारा किया जाता है।
75 की हुई चंचल
पुनर्वास केंद्र में रह रही मादा हाथी चंचल 75 वर्ष, लक्ष्मी 60 वर्ष व लीली 39 वर्ष की हो गई है। पिछले वर्ष वेटरनेरी डाक्टर द्वारा की गई जांच में कहा गया था कि चंचल और लक्ष्मी गर्भ धारण के लिए बिल्कुल तैयार है। हालांकि इस पुनर्वास केंद्र में गर्भवती मादा हाथी को रखने के लिए पूरे बंदोबस्त नहीं है। मादा हाथी को गर्भ रखने के लिए स्पेशल बीज का टीका लगाया जाता है और यह सब विभाग की परमिशन के बिना नही किया जा सकता।
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खाने में सबसे ज्यादा पसंद गन्ना
तीनों को फल ड्राई फ्रूट खिचड़ी व गन्ना दिया जाता है। खाने में सबसे ज्यादा हाथी गन्ने को पसंद करते हैं। एक हाथी को दिन में 25 से 30 किलो गन्ना दिया जाता है। हाथियों के लिए दो समय खानपान के लिए तय है। सुबह व शाम को खानपान के लिए तय किया गया है। इस समय में हाथी को स्टाफ खानपान कराता है ओर उनके पास व उस जगह पर इस समय किसी को भी जाना मना है। खानपान के समय अगर कोई डिस्टर्ब कर दें तो बच्चों की तरह नाराज ओर गुस्सा भी हो जाते हैं।
गर्मी से बचाव के लिए तीनों मादा हाथियों का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। डिहाइड्रेशन न हो इसके लिए ओआरएस दिया जा रहा है। पंपिंग की बजाय वाटर मेनल की सुविधा भी दी गई है।
-राजपाल, वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर
फोटो नंबर 31
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चंचल, लक्ष्मी व लीली अब वाटर मेनल में नहाएंगी
डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए दिया जा रहा ओआरएस
बनसंतोर के जंगल में बनाए गए हाथी पुनर्वास केंद्र में मौजूद तीन मादा हाथियों को गर्मी से बचाने की तैयारी
कौशिक खान
छछरौली।
15 किलोमीटर दूर घाड क्षेत्र के बनसंतोर के जंगल में बनाए गए चौधरी सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र में रखी गईं मादा हाथी चंचल, लक्ष्मी व लीली अब वाटर पंपिंग की जगह वाटर मेनल से गर्मी दूर करेंगी। भीषण गर्मी को देखते हुए शाम की दी जाने वाली खिचड़ी में एक हाथी को पांच पाउच ओआरएस दिए जा रहे हैं ताकि उन्हें डिहाईड्रेशन की परेशानी न हो। गर्मी के मौसम में हाथी को पानी में बैठे रहना और नहाना खेलना बहुत ही पसंद है। इसी बात को ध्यान में रखकर हाथियों के लिए वाटर पंपिंग की जगह वाटर मेनल की व्यवस्था पुनर्वास केंद्र में इसी वर्ष की गई है। वाटर मेनल में हाथी को तालाब नदी की तरह बैठने खेलने के लिए खुला पानी मिलता है।
बनाया ट्रीटमेंट स्टैंड
यहां पहली बार ट्रीटमेंट स्टैंड में हाथी को खड़ा करके दवाई देना, इंजेक्शन लगाना, ब्लड सैंपल लेना, मरहम लगाना, स्किन से संबंधित ट्रीटमेंट करना शुरू किया गया है। इसका एक बहुत बड़ा फायदा ये होगा कि हाथी के पूरे शरीर की सही से देखभाल हो जाएगी। क्योंकि हाथी पुनर्वास केंद्र में वेटरनेरी डाक्टर टीम द्वारा समय समय पर टीकाकरण व खून जांच की जाती है। प्रत्येक तीन माह के बाद हाथी के स्वास्थ्य की जांच की जाती है। अभी दो महीने पहले चंचल, लक्ष्मी व लीली को कीड़ों के टीके लगाए हैं। साथ ही खून जांच भी की है। इसमें रिपोर्ट नॉर्मल आई है। इसके अलावा जंगल विचरण करते समय हल्की खरोंच वगैरह लग जाती है, जिसका मरहम जगाकर उपचार किया जाता है। हाथियों के खान पान से लेकर दवाई बूटी करने तक का कार्य एक कुशल व ट्रेंड टीम द्वारा किया जाता है।
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75 की हुई चंचल
पुनर्वास केंद्र में रह रही मादा हाथी चंचल 75 वर्ष, लक्ष्मी 60 वर्ष व लीली 39 वर्ष की हो गई है। पिछले वर्ष वेटरनेरी डाक्टर द्वारा की गई जांच में कहा गया था कि चंचल और लक्ष्मी गर्भ धारण के लिए बिल्कुल तैयार है। हालांकि इस पुनर्वास केंद्र में गर्भवती मादा हाथी को रखने के लिए पूरे बंदोबस्त नहीं है। मादा हाथी को गर्भ रखने के लिए स्पेशल बीज का टीका लगाया जाता है और यह सब विभाग की परमिशन के बिना नही किया जा सकता।
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खाने में सबसे ज्यादा पसंद गन्ना
तीनों को फल ड्राई फ्रूट खिचड़ी व गन्ना दिया जाता है। खाने में सबसे ज्यादा हाथी गन्ने को पसंद करते हैं। एक हाथी को दिन में 25 से 30 किलो गन्ना दिया जाता है। हाथियों के लिए दो समय खानपान के लिए तय है। सुबह व शाम को खानपान के लिए तय किया गया है। इस समय में हाथी को स्टाफ खानपान कराता है ओर उनके पास व उस जगह पर इस समय किसी को भी जाना मना है। खानपान के समय अगर कोई डिस्टर्ब कर दें तो बच्चों की तरह नाराज ओर गुस्सा भी हो जाते हैं।
गर्मी से बचाव के लिए तीनों मादा हाथियों का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। डिहाइड्रेशन न हो इसके लिए ओआरएस दिया जा रहा है। पंपिंग की बजाय वाटर मेनल की सुविधा भी दी गई है।
-राजपाल, वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर
फोटो नंबर 31