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15 दिसंबर को बंद रहेंगे निजी अस्पताल व क्लीनिक
Updated Thu, 14 Dec 2017 12:58 AM IST
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15 दिसंबर को बंद रहेंगे निजी अस्पताल और क्लीनिक
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। आईएमए क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट 2010 के विरोध में उतर आया है। इसको लेकर हड़ताल का एलान किया है। कहा कि, 15 दिसंबर को जिले के सभी निजी अस्पताल व क्लीनिक बंद रहेंगे। अस्पतालों के सभी डॉक्टर अवकाश पर रखेंगे। सुबह छह रात 12 बजे तक अस्पताल में कोई भी कार्य नहीं किया जाएगा। अपातकालीन सेवाएं भी बंद रहेंगी। यह फैसला बुधवार को जिमखाना क्लब में हुई आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता प्रधान डॉ. धीरेंद्र कुमार सोनी ने की।
आईएमए के प्रधान डा. डीके सोनी व राज्यस्तीय कमेटी के सदस्य डा. राजन शर्मा ने बताया कि वर्ष 2010 में रही केंद्र सरकार ने क्लिनिकल इस्टैब्लिश्मेंट एक्ट लागू किया था, जिसके लागू होने से छोटे अस्पतालों एवं क्लिनिक्स को नुकसान होने के एवज में मार्च 2014 में हरियाणा सरकार ने एक अपना क्लिनिकल इस्टैब्लिश्मेंट एक्ट जारी किया था। उस एक्ट में कुछ कमियों के चलते अक्तूबर 2015 में सरकार ने आईएमए के प्रदेश स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मशवरा करके उसमें बदलाव लाते हुए दोबारा लागू किया था। आईएमए का कहना है कि प्रदेश सरकार अब फिर से 2010 में केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया क्लिनिकल इस्टैब्लिश्मेंट एक्ट लागू करने की सोच रही है, अगर यह एक्ट लागू हो गया तो या आधे से ज्यादा छोटे अस्पताल और क्लीनिक बंद हो जाएंगे या उनको चलाने के लिए इलाज महंगा करना पड़ेगा, जिससे नुकसान मरीजों को ही होगा। इस एक्ट के विरोध में उन्होंने सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, स्पीकर सहित अनेक मंत्रियों व विधायकों को ज्ञापन देकर एक्ट को लागू न करने को लेकर बातचीत की। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिसको लेकर अब उन्होंने 15 दिसंबर को अस्पताल व क्लीनिक बंद करने का फैसला लिया है। जिसमें जिले के लगभग सौ अस्पतालों के दो सौ डॉक्टर ने सहमति जताई है। मौके पर डा. योगेश जिंदल, डा. हर्ष शर्मा, डा. विजय गुप्ता, डा. ऋतू मग्गो, डा. नवीन सब्बरवाल, डा. संजीव, डा. नरेंद्र कश्यप, डा. रंगीलाल आदि मौजूद रहे।
निजी अस्पतालों में आते हैं 80 प्रतिशत मरीज :डा. राजन कपूर व डा. डीके सोनी ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में जिले के 80 प्रतिशत मरीज उपचार करवाते हैं। जबकि सिविल अस्पतालों में केवल 20 प्रतिशत की मरीज आते हैं। उन्होंने बताया कि जिले में करीब सौ निजी अस्पताल हैं। जिनमें रोजाना तीन से चार हजार मरीज उपचार के लिए आते हैं। वर्तमान समय में 80 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी प्राइवेट अस्पताल निभा रहे हैं।
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एक्ट में अस्पताल के आगे 40 फीट की सड़क होने जैसे नियम : आईएमए के पदाधिकारियों ने बताया कि क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट 2010 में ऐसे नियम है, जिन्हें अस्पताल संचालक पूरा करने में असमर्थ है। उन्होंने बताया कि एक्ट के तहत अस्पताल के आगे 40 फीट तक की सड़क होनी चाहिए। अस्पताल की 14 कारों की अपनी पार्किंग होनी चाहिए। रिसेंप्शन पर कैंटीन की सुविधा, तीन एमबीबीएस डॉक्टर की उपलब्धता, आईसीयू की वीडियोग्राफी, मरीज के रजिस्ट्रेशन के समय एसपी विभाग की सहभागिता, अस्पताल के पड़ोसी से एनओसी सहित कई शर्तें है। जो बेकार की शर्तें हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। आईएमए क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट 2010 के विरोध में उतर आया है। इसको लेकर हड़ताल का एलान किया है। कहा कि, 15 दिसंबर को जिले के सभी निजी अस्पताल व क्लीनिक बंद रहेंगे। अस्पतालों के सभी डॉक्टर अवकाश पर रखेंगे। सुबह छह रात 12 बजे तक अस्पताल में कोई भी कार्य नहीं किया जाएगा। अपातकालीन सेवाएं भी बंद रहेंगी। यह फैसला बुधवार को जिमखाना क्लब में हुई आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता प्रधान डॉ. धीरेंद्र कुमार सोनी ने की।
आईएमए के प्रधान डा. डीके सोनी व राज्यस्तीय कमेटी के सदस्य डा. राजन शर्मा ने बताया कि वर्ष 2010 में रही केंद्र सरकार ने क्लिनिकल इस्टैब्लिश्मेंट एक्ट लागू किया था, जिसके लागू होने से छोटे अस्पतालों एवं क्लिनिक्स को नुकसान होने के एवज में मार्च 2014 में हरियाणा सरकार ने एक अपना क्लिनिकल इस्टैब्लिश्मेंट एक्ट जारी किया था। उस एक्ट में कुछ कमियों के चलते अक्तूबर 2015 में सरकार ने आईएमए के प्रदेश स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मशवरा करके उसमें बदलाव लाते हुए दोबारा लागू किया था। आईएमए का कहना है कि प्रदेश सरकार अब फिर से 2010 में केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया क्लिनिकल इस्टैब्लिश्मेंट एक्ट लागू करने की सोच रही है, अगर यह एक्ट लागू हो गया तो या आधे से ज्यादा छोटे अस्पताल और क्लीनिक बंद हो जाएंगे या उनको चलाने के लिए इलाज महंगा करना पड़ेगा, जिससे नुकसान मरीजों को ही होगा। इस एक्ट के विरोध में उन्होंने सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, स्पीकर सहित अनेक मंत्रियों व विधायकों को ज्ञापन देकर एक्ट को लागू न करने को लेकर बातचीत की। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिसको लेकर अब उन्होंने 15 दिसंबर को अस्पताल व क्लीनिक बंद करने का फैसला लिया है। जिसमें जिले के लगभग सौ अस्पतालों के दो सौ डॉक्टर ने सहमति जताई है। मौके पर डा. योगेश जिंदल, डा. हर्ष शर्मा, डा. विजय गुप्ता, डा. ऋतू मग्गो, डा. नवीन सब्बरवाल, डा. संजीव, डा. नरेंद्र कश्यप, डा. रंगीलाल आदि मौजूद रहे।
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निजी अस्पतालों में आते हैं 80 प्रतिशत मरीज :डा. राजन कपूर व डा. डीके सोनी ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में जिले के 80 प्रतिशत मरीज उपचार करवाते हैं। जबकि सिविल अस्पतालों में केवल 20 प्रतिशत की मरीज आते हैं। उन्होंने बताया कि जिले में करीब सौ निजी अस्पताल हैं। जिनमें रोजाना तीन से चार हजार मरीज उपचार के लिए आते हैं। वर्तमान समय में 80 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी प्राइवेट अस्पताल निभा रहे हैं।
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एक्ट में अस्पताल के आगे 40 फीट की सड़क होने जैसे नियम : आईएमए के पदाधिकारियों ने बताया कि क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट 2010 में ऐसे नियम है, जिन्हें अस्पताल संचालक पूरा करने में असमर्थ है। उन्होंने बताया कि एक्ट के तहत अस्पताल के आगे 40 फीट तक की सड़क होनी चाहिए। अस्पताल की 14 कारों की अपनी पार्किंग होनी चाहिए। रिसेंप्शन पर कैंटीन की सुविधा, तीन एमबीबीएस डॉक्टर की उपलब्धता, आईसीयू की वीडियोग्राफी, मरीज के रजिस्ट्रेशन के समय एसपी विभाग की सहभागिता, अस्पताल के पड़ोसी से एनओसी सहित कई शर्तें है। जो बेकार की शर्तें हैं।