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Yamuna Nagar News: थैलेसीमिया से जंग लड़ रहे 151 बच्चे और युवा

Wed, 08 May 2024 04:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Wed, 08 May 2024 04:15 AM IST
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151 children and youth fighting the battle against thalassemia
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। थैलेसीमिया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर में खून का बनना बंद हो जाता है। शरीर का विकास रुक जाता है। ऐसे रोगियों को हर माह रक्त चढ़ाना पड़ता है। जिले में 151 ऐसे बच्चे व युवा हैं जो थैलेसीमिया रोग से ग्रस्त हैं, इनका उपचार जिला नागरिक अस्पताल से चल रहा है। साथ ही जरूरत के हिसाब से उन्हें रक्त भी चढ़ाया जा रहा है।
इनरव्हील, हेल्पिंग हैंड ग्रुप जैसी सामाजिक संस्थाएं रक्त चढ़ाने के दौरान इन बच्चों को कोई न कोई उपहार भेंट कर रही हैं ताकि उनका मनोबल बढ़े और वह खुद को स्वस्थ बच्चों जैसा ही समझें। जिला नागरिक अस्पताल में थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चों के लिए अलग से वार्ड बनाया गया है। वार्ड में 10 बेड की व्यवस्था की गई है। इस वार्ड में रोजाना बच्चों को पांच से सात के ग्रुप में बुलाकर रक्त चढ़ाया जाता है।
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रक्त चढ़ाने के दौरान उनकी विशेष निगरानी रखनी पड़ती है ताकि किसी के स्वास्थ्य पर कोई विपरीत असर न पड़े। जिला नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉ. दिव्या मंगला ने बताया कि थैलेसीमिया आनुवांशिक बीमारी है। अगर माता-पिता को माइनर थैलेसीमिया है तो बच्चों को मेजर थैलेसीमिया होने की संभावना ज्यादा है। शुरू में तो बच्चे को महीने में रक्त चढ़ता है, लेकिन जैसे-जैसे बच्चे की उम्र बढ़ती है उसे दो हफ्ते में रक्त चढ़ने लगता है।
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रक्त बार-बार चढ़ने से शरीर के कई हिस्सों में आयरन जमने लगता है। ऐसा न हो इसके लिए भी मरीज को दवाई दी जाती है। अस्पताल में गर्भवती का टेस्ट किया जाता है। यदि वह माइनर थैलेसीमिया है तो उसके पति का टेस्ट होता है। यदि वह भी माइनर मिले तो बच्चे की जांच होती है। यदि माता-पिता में से किसी को माइनर थैलेसीमिया नहीं है तो उनके बच्चे स्वस्थ पैदा होते हैं।
थैलेसिमिया के लक्षण
बच्चों के नाखून और जीभ पीली पड़ जाने से पीलिया का भ्रम पैदा हो जाता हैं। बच्चे के जबड़ों और गालों में असामान्यता आ जाती हैं। बच्चे का विकास रुक जाता हैं और वह उम्र से काफी छोटा नजर आता हैं। सूखता चेहरा, वजन न बढ़ना, हमेशा बीमार नजर आना, कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ आदि ये भी लक्षण दिखाई देते हैं।

बचाव एवं सावधानी
विवाह से पहले महिला-पुरुष की रक्त की जांच कराएं। गर्भावस्था के दौरान जांच कराएं। रोगी का हीमोग्लोबिन 11 या 12 बनाए रखने की कोशिश करें। समय पर दवाइयां लें और इलाज पूरा लें।
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