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इस साल 480 लाभपात्रों को मिलेगी रोजगार के लिए वितीय सहायता
Updated Tue, 01 Aug 2017 12:47 AM IST
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480 पात्रों को रोजगार के लिए मिलेगी वित्तीय सहायता
यमुनानगर। हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की ओर से चालू वित्त वर्ष में जिले में विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं के अंतर्गत अनुसूचित जाति के 480 लाभार्थियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। चालू वित्त वर्ष में अनुसूचित जाति के 13 युवाओं को आठ लाख 10 हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई गई है। उपायुक्त रोहतास सिंह खरब ने बताया कि निगम की ओर से अनुसूचित जाति के उन परिवारों, जिनका नाम गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने की सूची में दर्ज है, उन्हें उपार्जन योजनाओं जैसे पशुपालन, हथकरघा, आटा चक्की, दरी बनाना, चमड़ा और चमड़े के कार्य, फोटोग्राफी, कानूनी व्यवसाय और आटो रिक्शा इत्यादि के लिए एक लाख 50 हजार रुपये तक वित्तीय सहायता बैंकों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। इन योजनाओं के तहत निगम की ओर से कुल योजना लागत का 50 प्रतिशत अनुदान के रूप में जिसकी अधिकतम सीमा 10 हजार रुपये है और 10 प्रतिशत सीमांत धन के रूप में तथा शेष राशि बैंकों से ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाती है। इसके अतिरिक्त निगम की ओर से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम के सहयोग से अनुसूचित जाति के लोगों और सफाई कर्मचारियों के आश्रितों को स्वरोजगार शुरू करने के लिए दो लाख रुपये तक का सीधा ऋण छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर दिया जाता है। इन योजनाओं के तहत बीपीएल परिवार के लाभार्थियों को 10 हजार रुपये तक अनुदान भी दिया जाता है।
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यमुनानगर। हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की ओर से चालू वित्त वर्ष में जिले में विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं के अंतर्गत अनुसूचित जाति के 480 लाभार्थियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। चालू वित्त वर्ष में अनुसूचित जाति के 13 युवाओं को आठ लाख 10 हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई गई है। उपायुक्त रोहतास सिंह खरब ने बताया कि निगम की ओर से अनुसूचित जाति के उन परिवारों, जिनका नाम गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने की सूची में दर्ज है, उन्हें उपार्जन योजनाओं जैसे पशुपालन, हथकरघा, आटा चक्की, दरी बनाना, चमड़ा और चमड़े के कार्य, फोटोग्राफी, कानूनी व्यवसाय और आटो रिक्शा इत्यादि के लिए एक लाख 50 हजार रुपये तक वित्तीय सहायता बैंकों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। इन योजनाओं के तहत निगम की ओर से कुल योजना लागत का 50 प्रतिशत अनुदान के रूप में जिसकी अधिकतम सीमा 10 हजार रुपये है और 10 प्रतिशत सीमांत धन के रूप में तथा शेष राशि बैंकों से ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाती है। इसके अतिरिक्त निगम की ओर से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम के सहयोग से अनुसूचित जाति के लोगों और सफाई कर्मचारियों के आश्रितों को स्वरोजगार शुरू करने के लिए दो लाख रुपये तक का सीधा ऋण छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर दिया जाता है। इन योजनाओं के तहत बीपीएल परिवार के लाभार्थियों को 10 हजार रुपये तक अनुदान भी दिया जाता है।