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नशीले पदार्थों के तस्कर को 15 साल की कैद
जगाध्ारी
Updated Sat, 19 Apr 2014 12:32 AM IST
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जगाधरी। नशीले पदार्थों के तस्कर को कोर्ट ने 15 साल कैद तथा एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर दो साल की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।
यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश रीतु गर्ग की कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट में करीब पौने तीन साल तक चली सुनवाई के दौरान 17 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत शुक्रवार को कोर्ट ने दोषी को सजा सुना दी।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार सात अगस्त 2011 को एएसआई सचिन कुमार पुलिस बल के साथ शुगर मिल के पास गश्त कर रहा था। इसी बीच उन्हें सूचना मिली कि कुरुक्षेत्र की ओर से एक गाड़ी आ रही है। इसमें नशीले पदार्थ भरे हुए हैं, जो कि यूपी की ओर जाएगी।
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सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विश्वकर्मा चौक पर नाकाबंदी कर वाहनों की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने एक स्वराज मजदा गाड़ी को रोक लिया। इसे गांव फैजगंज बैहटा जिला बदायूं उत्तर प्रदेश निवासी सुरेंद्र कुमार चला रहा था।
पुलिस ने जब उससे गाड़ी में लोडिड सामान के बारे में पूछा, तो उसने बताया कि उसमें पेठा भरा हुआ है। पुलिस ने शक के आधार पर गाड़ी की तलाशी शुरू कर दी।
पुलिस के मुताबिक गाड़ी में पेठे के नीचे चूरापोस्त व डोडा पोस्त की बोरियां भरी हुई थी। इसे देखकर पुलिस दंग रह गई। पुलिस को जांच के दौरान गाड़ी से 24 बोरी 12 कट्टे चूरा व डोडा पोस्त भरी मिलीं। इनमें एक हजार 96 किलो 500 ग्राम चूरा डोडा पोस्त भरा हुआ था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने प्रत्येक नग (बोरी व कट्टे) से जांच के लिए सैंपल लिए और उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला में भेज दिया। पुलिस ने सुरेंद्र कुमार के खिलाफ पीएनडीटी एक्ट (नशीले पदार्थ अधिनियम) के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।
पुलिस ने सुरेंद्र को कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया। इसके बाद मामले की सुनवाई कोर्ट में शुरू हुई। कोर्ट में करीब पौने तीन साल तक चली सुनवाई के दौरान 17 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के दौरान अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश रितु गर्ग की कोर्ट ने 17 अप्रैल को सुरेंद्र को दोषी करार दिया। 18 अप्रैल को कोर्ट ने सुरेंद्र को 15 साल कैद तथा एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुना दी। जुर्माना न देने पर दो साल की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।
कोर्ट ने तीन लोगों को किया बरी
पुलिस के मुताबिक सुरेंद्र से पूछताछ व कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस ने ननौता निवासी हमीद, हरिद्वार निवासी मनोज कुमार व पंकज कुमार को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलें, इसलिए कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। इसकी पुष्टि सरकारी वकील प्रदीप कुमार ने की है।
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यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश रीतु गर्ग की कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट में करीब पौने तीन साल तक चली सुनवाई के दौरान 17 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत शुक्रवार को कोर्ट ने दोषी को सजा सुना दी।
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पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार सात अगस्त 2011 को एएसआई सचिन कुमार पुलिस बल के साथ शुगर मिल के पास गश्त कर रहा था। इसी बीच उन्हें सूचना मिली कि कुरुक्षेत्र की ओर से एक गाड़ी आ रही है। इसमें नशीले पदार्थ भरे हुए हैं, जो कि यूपी की ओर जाएगी।
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सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विश्वकर्मा चौक पर नाकाबंदी कर वाहनों की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने एक स्वराज मजदा गाड़ी को रोक लिया। इसे गांव फैजगंज बैहटा जिला बदायूं उत्तर प्रदेश निवासी सुरेंद्र कुमार चला रहा था।
पुलिस ने जब उससे गाड़ी में लोडिड सामान के बारे में पूछा, तो उसने बताया कि उसमें पेठा भरा हुआ है। पुलिस ने शक के आधार पर गाड़ी की तलाशी शुरू कर दी।
पुलिस के मुताबिक गाड़ी में पेठे के नीचे चूरापोस्त व डोडा पोस्त की बोरियां भरी हुई थी। इसे देखकर पुलिस दंग रह गई। पुलिस को जांच के दौरान गाड़ी से 24 बोरी 12 कट्टे चूरा व डोडा पोस्त भरी मिलीं। इनमें एक हजार 96 किलो 500 ग्राम चूरा डोडा पोस्त भरा हुआ था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने प्रत्येक नग (बोरी व कट्टे) से जांच के लिए सैंपल लिए और उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला में भेज दिया। पुलिस ने सुरेंद्र कुमार के खिलाफ पीएनडीटी एक्ट (नशीले पदार्थ अधिनियम) के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।
पुलिस ने सुरेंद्र को कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया। इसके बाद मामले की सुनवाई कोर्ट में शुरू हुई। कोर्ट में करीब पौने तीन साल तक चली सुनवाई के दौरान 17 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के दौरान अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश रितु गर्ग की कोर्ट ने 17 अप्रैल को सुरेंद्र को दोषी करार दिया। 18 अप्रैल को कोर्ट ने सुरेंद्र को 15 साल कैद तथा एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुना दी। जुर्माना न देने पर दो साल की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।
कोर्ट ने तीन लोगों को किया बरी
पुलिस के मुताबिक सुरेंद्र से पूछताछ व कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस ने ननौता निवासी हमीद, हरिद्वार निवासी मनोज कुमार व पंकज कुमार को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलें, इसलिए कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। इसकी पुष्टि सरकारी वकील प्रदीप कुमार ने की है।